चॉक पर भारी पड़ी स्याही: चुनावी ड्यूटी में उलझे 550 शिक्षक, नैनीताल में महज 15% हुआ पाठ्यक्रम पूरा
नैनीताल जिले में 550 से अधिक शिक्षकों को जनगणना, बीएलओ और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) सहित चुनावी ड्यूटी में लगाया गया है। गैर-शैक्षणिक कार्यों के कारण सरकारी स्कूलों की पढ़ाई गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।
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सरकारी काम की स्याही जितनी गहरी होती जा रही है, स्कूलों के श्यामपट (ब्लैकबोर्ड) पर चॉक से होने वाली सफेदी उतनी ही फीकी पड़ रही है। जनगणना, बीएलओ और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की ड्यूटी में शिक्षक लगातार कक्षाओं से बाहर हैं। अब चुनावी ड्यूटी ने उनकी जिम्मेदारियां और बढ़ा दी हैं। नैनीताल जिले में 550 से अधिक शिक्षकों के गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने से सरकारी स्कूलों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। हालात यह हैं कि सत्र के तीन महीने बीतने के बाद भी कई स्कूलों में महज 15 प्रतिशत पाठ्यक्रम ही पूरा हो पाया है।
कक्षा में बच्चे, ड्यूटी पर शिक्षक
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे ऐसे परिवारों से आते हैं जिनके लिए निजी स्कूल या ट्यूशन का विकल्प आसान नहीं है। ऐसे में विद्यालय ही उनकी पढ़ाई का प्रमुख सहारा हैं लेकिन लगातार गैर-शैक्षणिक ड्यूटी लगने से बच्चों को नियमित शिक्षण नहीं मिल पा रहा है। अभिभावकों का कहना है कि शिक्षक यदि महीनों तक अलग-अलग सरकारी कार्यों में लगे रहेंगे तो बच्चों का पाठ्यक्रम कैसे पूरा होगा। जीआईसी राजपुरा के पूर्व शिक्षक-अभिभावक संघ अध्यक्ष गिरीश कुमार, महेश कुमार, अर्जुन कुमार और हरकेश का कहना है कि विद्यालय से 15 शिक्षकों की एसआईआर में ड्यूटी लगाई गई है। इससे पठन-पाठन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।
दस महीने से ड्यूटी का सिलसिला
अभिभावक राजकुमारी का कहना है कि उनके चार बच्चे जीजीआईसी हल्द्वानी में पढ़ते हैं। पिछले करीब दस महीने से कभी बीएलओ, कभी जनगणना और अब एसआईआर की ड्यूटी में शिक्षकों के लगे रहने से सरकारी स्कूलों की पढ़ाई पटरी से उतर गई है। उन्हें आशंका है कि इसके बाद जनगणना के दूसरे चरण और फिर विधानसभा चुनाव की ड्यूटी में भी शिक्षकों को लगाया जाएगा। राजकीय इंटर कॉलेज नारायण नगर की पीटीए अध्यक्ष मंजू दुर्गापाल और एसएमसी अध्यक्ष असमती देवी का कहना है कि विद्यालय के जूनियर वर्ग के शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। विद्यालय स्तर पर किसी तरह व्यवस्था बनाने की कोशिश की जा रही है लेकिन समस्या बनी हुई है।
अब दुग्ध संघ चुनाव की ड्यूटी भी
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की जिम्मेदारी संभाल रहे शिक्षकों पर अब दुग्ध संघ चुनाव की ड्यूटी भी डाल दी गई है। जिलाधिकारी की ओर से जारी आदेश के अनुसार जिले में 27 अगस्त से 11 सितंबर तक दुग्ध संघ के चुनाव प्रस्तावित हैं। इसके लिए 250 कार्मिकों की ड्यूटी लगाई गई है, जिनमें करीब 60 प्रतिशत शिक्षक हैं।
पहाड़ के स्कूलों में ज्यादा संकट
मैदानी क्षेत्रों की तुलना में पहाड़ के विद्यालयों में समस्या अधिक गंभीर है। भीमताल, ओखलकांडा, रामगढ़, धारी और बेतालघाट जैसे क्षेत्रों के कई स्कूल पहले से ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। कहीं एक तो कहीं दो शिक्षक ही विद्यालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और इनमें से भी शिक्षकों के ड्यूटी पर चले जाने से पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। अभिभावकों का कहना है कि कागजों पर सरकारी काम पूरे हो रहे हैं, लेकिन इसकी कीमत बच्चों की पढ़ाई चुकाती है। परीक्षा परिणाम खराब आने पर जिम्मेदारी आखिरकार शिक्षक और विद्यार्थियों पर ही आती है।
एसआईआर सरकार की ओर से कराया जा रहा है। यह सरकारी कर्मचारी की ड्यूटी का हिस्सा है। विद्यालयों में उपलब्ध शिक्षकों से पठन-पाठन कार्य कराया जा रहा है। - रणजीत सिंह नेगी, मुख्य शिक्षा अधिकारी, नैनीताल