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व्यवस्थाएं ही हैं बीमार, मरीज क्या करेंगे सरकार
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कोविड की दूसरी लहर ने आमजन से लेकर सरकारों तक का ध्यान सरकारी अस्पतालों की ओर खींचा। सांसद और विधायक निधि से इन अस्पतालों में लाखों रुपये के संसाधन जुटाए गए। जबकि इन्हीं अस्पतालों में वर्षों से जंक खा रहे उन स्वास्थ्य उपकरणों की सुध आज तक नहीं ली गई जो कभी इस उम्मीद के साथ खरीदे गए थे कि इनका लाभ मरीजों को मिलेगा। सरकार, विभाग और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के कारण आज भी सीएचसी व पीएचसी में करोड़ों के स्वास्थ्य उपकरण और अन्य संसाधनों का उपयोग नहीं हो रहा है।
स्वामीराम कैंसर इंस्टीट्यूट : ओटी और वार्ड बना मगर उपयोग नहीं हो सका
हल्द्वानी। मेडिकल कालेज के अधीन स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट में रोगियों के उपचार के लिए दूसरी मंजिल पर ओटी और वार्डों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया, लेकिन न ओटी का सामान आया न वार्डों का ही इस्तेमाल हो सका। दूसरे मंजिल पर चिकित्सा सुविधा प्रारंभ नहीं हुई, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए एक लिफ्ट जरूर लगा दी गई है। इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। अस्पताल प्रबंधन अब कह रहा है कि यह हैंड ओवर नहीं हुआ है। बाद में संसाधनों का इस्तेमाल स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के लिए किया जाएगा। स्थिति यह है कि प्रस्तावित स्टेट कैंसर इंस्टीटयूट के लिए आवश्यक वन भूमि का मामला अभी तक पूरी तरह सुलझ नहीं सका है। वन भूमि हस्तांतरित होने के बाद उपयोग हो सकेगा।
एसटीएच में वेंटिलेटर खराब
हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल में कोविड रोगियों के उपचार के लिए वेंटिलेटर मंगाए गए थे, लेकिन इसमें कई खराब हो गए थे। मेडिकल कालेज प्राचार्य डॉ. चंद्र प्रकाश के अनुसार वेंटिलेटर को ठीक कराया जा सकता है, अब छह सात वेंटिलेटर ही खराब रह गए हैं। इनको भी ठीक करा लिया जाएगा।
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मेमोग्राफी का वाहन खड़ा है
हल्द्वानी। स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से स्तन कैंसर की जांच के लिए मेमौग्राफी की जांच सुविधा से लैस वाहन सुशीला तिवारी अस्पताल के पास है, लेकिन यह वाहन भी कोविड के चलते लंबे समय से खड़ा है। वहीं, अस्पताल प्रबंधन को एक रक्तदान से जुड़े कार्यों के लिए आधुनिक वाहन भी मिला था, जिसको कुछ समय रखने के बाद वापस कर दिया गया था।
बेस में दंत एक्सरे की मशीन खराब
हल्द्वानी। बेस अस्पताल में दांतों को एक्सरे की मशीन खराब पड़ी है। इसके चलते रोगियों का एक्सरे नहीं हो पा रहा है। इस संबंध में बेस चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हरीश लाल से पक्ष लेने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका है।
क्षयरोग आश्रम भवाली
भवाली। भवाली स्थित सैनिटोरियम में चार करोड़ की मशीनें जंक खा रही है। इसे चलाने के लिये यहां रेडियोजोलिस्ट की तैनाती ही नहीं हुई है। 2002 में सैनिटोरियम में चेस्ट इंस्टीट्यूट की स्थापना होनी थी। इसके लिए करीब 20 लाख खर्च कर एक बड़े भवन की मरम्मत कराई गई। जिसमें चार करोड़ लागत से अल्ट्रासाउंड मल्टीप्रोप मशीन के अलावा सिटी स्कैन, प्लेट गैस एनेलाइजर, एलाइजालिडर जैसी महंगी मशीनें खरीदी गई। इसके अलावा माइक्रोस्कोप कंप्यूटर खरीदे गए। न तो चेस्ट इंस्टीट्यूट बना और न ही इन मशीनों को चलाने के लिये रेडियोजोलिस्ट व तकनीशियन स्टाफ की तैनाती हुई। दो दशक से यह मशीनें जंग खा रही हैं।
सीएचसी भीमताल
भीमताल। सीएचसी में छह महीने पहले लगभग आठ लाख की लागत से एक्सरे मशीन लगाई गई जो आज तक चालू नहीं हुई है। यह हाल तब है जबकि एक पखवाड़ा पहले कोविड प्रभारी मंत्री बंशीधर भगत ने तीन दिन में एक्सरे चालू करने के निर्देश दिए थे। अब सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एनसी तिवारी कह रहे हैं कि एक दो दिन में एक्सरे मशीन चालू करा दी जाएगी।
सीएचसी ओखलकांडा
ओखलकांडा। वर्ष 2015 के आसपास ग्रामीणों की मांग पर सीएचसी में एक पुरानी एक्सरे मशीन भेजी गई। टेक्नीशियन के अभाव में यह स्थापित नहीं हुई और अब कबाड़ में बदल गई। इसी तरह वर्ष 2017 में इसी अस्पताल से टेलीमेडिसिन सुविधा भी सीएम ने शुरू की। इसका भी लाभ ग्रामीणों को नहीं मिला। अब इसके लिए लाखों रुपये खर्च कर खरीदे गये कंप्यूटर, कैमरे व संचार उपकरण जंक खा रहे हैं।
बीडी पांडे अस्पताल नैनीताल
नैनीताल। जिला अस्पताल में कुछ समय पहले ही चार वार्डों को कोविड वार्ड में तब्दील किया गया। इसके लिए इन वार्डों में आक्सीजन सुविधा समेत अन्म सुविधाएं भी जुटाई गई लेकिन स्थानीय कोविड मरीजों को इन वार्डों का लाभ नहीं मिला। अस्पताल प्रशासन ने कोविड मरीजों को भर्ती तो किया लेकिन हालत गंभीर होते ही उन्हें एसटीएच रैफर कर दिया।
सांसद अजय भट्ट का कहना है कि पिछले दिनों मैंने सैनिटोरियम दौरे के समय अधिकारियों को तकनीकी कमी दूर कर तत्काल सीटी व अल्ट्रासाउंड मशीनों को चालू करने के निर्देश दिए हैं। वहां करोड़ों की मशीनें कमरे में बंद हैं। सीएमओ को भी इन मशीनों का उपयोग करने को कहा गया है। इन मशीनों को चलाने के लिए रेडियोलाजिस्ट व तकनीशियन की जल्द तैनाती की जाएगी।
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स्वामीराम कैंसर इंस्टीट्यूट : ओटी और वार्ड बना मगर उपयोग नहीं हो सका
हल्द्वानी। मेडिकल कालेज के अधीन स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट में रोगियों के उपचार के लिए दूसरी मंजिल पर ओटी और वार्डों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया, लेकिन न ओटी का सामान आया न वार्डों का ही इस्तेमाल हो सका। दूसरे मंजिल पर चिकित्सा सुविधा प्रारंभ नहीं हुई, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए एक लिफ्ट जरूर लगा दी गई है। इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। अस्पताल प्रबंधन अब कह रहा है कि यह हैंड ओवर नहीं हुआ है। बाद में संसाधनों का इस्तेमाल स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के लिए किया जाएगा। स्थिति यह है कि प्रस्तावित स्टेट कैंसर इंस्टीटयूट के लिए आवश्यक वन भूमि का मामला अभी तक पूरी तरह सुलझ नहीं सका है। वन भूमि हस्तांतरित होने के बाद उपयोग हो सकेगा।
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एसटीएच में वेंटिलेटर खराब
हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल में कोविड रोगियों के उपचार के लिए वेंटिलेटर मंगाए गए थे, लेकिन इसमें कई खराब हो गए थे। मेडिकल कालेज प्राचार्य डॉ. चंद्र प्रकाश के अनुसार वेंटिलेटर को ठीक कराया जा सकता है, अब छह सात वेंटिलेटर ही खराब रह गए हैं। इनको भी ठीक करा लिया जाएगा।
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मेमोग्राफी का वाहन खड़ा है
हल्द्वानी। स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से स्तन कैंसर की जांच के लिए मेमौग्राफी की जांच सुविधा से लैस वाहन सुशीला तिवारी अस्पताल के पास है, लेकिन यह वाहन भी कोविड के चलते लंबे समय से खड़ा है। वहीं, अस्पताल प्रबंधन को एक रक्तदान से जुड़े कार्यों के लिए आधुनिक वाहन भी मिला था, जिसको कुछ समय रखने के बाद वापस कर दिया गया था।
बेस में दंत एक्सरे की मशीन खराब
हल्द्वानी। बेस अस्पताल में दांतों को एक्सरे की मशीन खराब पड़ी है। इसके चलते रोगियों का एक्सरे नहीं हो पा रहा है। इस संबंध में बेस चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हरीश लाल से पक्ष लेने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका है।
क्षयरोग आश्रम भवाली
भवाली। भवाली स्थित सैनिटोरियम में चार करोड़ की मशीनें जंक खा रही है। इसे चलाने के लिये यहां रेडियोजोलिस्ट की तैनाती ही नहीं हुई है। 2002 में सैनिटोरियम में चेस्ट इंस्टीट्यूट की स्थापना होनी थी। इसके लिए करीब 20 लाख खर्च कर एक बड़े भवन की मरम्मत कराई गई। जिसमें चार करोड़ लागत से अल्ट्रासाउंड मल्टीप्रोप मशीन के अलावा सिटी स्कैन, प्लेट गैस एनेलाइजर, एलाइजालिडर जैसी महंगी मशीनें खरीदी गई। इसके अलावा माइक्रोस्कोप कंप्यूटर खरीदे गए। न तो चेस्ट इंस्टीट्यूट बना और न ही इन मशीनों को चलाने के लिये रेडियोजोलिस्ट व तकनीशियन स्टाफ की तैनाती हुई। दो दशक से यह मशीनें जंग खा रही हैं।
सीएचसी भीमताल
भीमताल। सीएचसी में छह महीने पहले लगभग आठ लाख की लागत से एक्सरे मशीन लगाई गई जो आज तक चालू नहीं हुई है। यह हाल तब है जबकि एक पखवाड़ा पहले कोविड प्रभारी मंत्री बंशीधर भगत ने तीन दिन में एक्सरे चालू करने के निर्देश दिए थे। अब सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एनसी तिवारी कह रहे हैं कि एक दो दिन में एक्सरे मशीन चालू करा दी जाएगी।
सीएचसी ओखलकांडा
ओखलकांडा। वर्ष 2015 के आसपास ग्रामीणों की मांग पर सीएचसी में एक पुरानी एक्सरे मशीन भेजी गई। टेक्नीशियन के अभाव में यह स्थापित नहीं हुई और अब कबाड़ में बदल गई। इसी तरह वर्ष 2017 में इसी अस्पताल से टेलीमेडिसिन सुविधा भी सीएम ने शुरू की। इसका भी लाभ ग्रामीणों को नहीं मिला। अब इसके लिए लाखों रुपये खर्च कर खरीदे गये कंप्यूटर, कैमरे व संचार उपकरण जंक खा रहे हैं।
बीडी पांडे अस्पताल नैनीताल
नैनीताल। जिला अस्पताल में कुछ समय पहले ही चार वार्डों को कोविड वार्ड में तब्दील किया गया। इसके लिए इन वार्डों में आक्सीजन सुविधा समेत अन्म सुविधाएं भी जुटाई गई लेकिन स्थानीय कोविड मरीजों को इन वार्डों का लाभ नहीं मिला। अस्पताल प्रशासन ने कोविड मरीजों को भर्ती तो किया लेकिन हालत गंभीर होते ही उन्हें एसटीएच रैफर कर दिया।
सांसद अजय भट्ट का कहना है कि पिछले दिनों मैंने सैनिटोरियम दौरे के समय अधिकारियों को तकनीकी कमी दूर कर तत्काल सीटी व अल्ट्रासाउंड मशीनों को चालू करने के निर्देश दिए हैं। वहां करोड़ों की मशीनें कमरे में बंद हैं। सीएमओ को भी इन मशीनों का उपयोग करने को कहा गया है। इन मशीनों को चलाने के लिए रेडियोलाजिस्ट व तकनीशियन की जल्द तैनाती की जाएगी।