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Nainital News: जंगलात में आज भी 'जिंदा' है 99 साल पहले फांसी पर चढ़ा सुल्ताना
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हल्द्वानी। सुल्ताना डाकू को 99 साल पहले फांसी पर चढ़ाया गया था, पर उसके किस्से आज भी खूब सुने और पढ़े जाते हैं। सुल्ताना डाकू और जंगल का गहरा नाता रहा है, अभी भी सुल्ताना से जोड़कर जंगल की कई चीजों को देखा जाता है, हालांकि उनकी कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं होती। इसमें तराई केंद्रीय वन प्रभाग के गड़प्पू में सुल्ताना डाकू का कुआं से लेकर हल्द्वानी वन प्रभाग का सुल्तान नगरी ब्लाक भी है। इसके अलावा सुल्ताना डाकू हल्द्वानी जेल में भी रहा था, हालांकि यहां उसके लिखित साक्ष्य मौजूद नहीं हैं।
कहा जाता है कि सुल्ताना डाकू की छवि राबिन हुड जैसी रही। जिम कार्बेट ने मेरा हिंदुस्तान पुस्तक में हिंदुस्तान का रबिनहुड: सुल्ताना के नाम से एक चैप्टर भी लिखा है। इसमें सुल्ताना और उसकी लामाचौड़ में डकैती से लेकर उसे पकड़ने की कोशिश के बारे में विस्तार से बताया गया है। इसी में एक स्थान पर गड़प्पू के जंगल का जिक्र आता है। मौजूदा समय में तराई केंद्रीय वन प्रभाग के गड़प्पू नामक स्थान पर एक कुएं जैसी आकृति है, जो कि अब नदी के अंदर आ चुका है। वनकर्मी बताते हैं कि यह सुल्ताना डाकू का कुआं है। कई लोग सुल्ताना का कुआं देखने आते हैं। इसी तरह कुमाऊं के सबसे पुराने वन प्रभाग मौजूदा हल्द्वानी वन प्रभाग में सुल्ताननगरी ब्लाक का जिक्र अभी भी आता है, छकाता रेंज में यह ब्लाक है। इसके नाम को भी सुल्ताना से जोड़कर देखा जाता है। इसी तरह मौजूदा हल्द्वानी उप कारागार के पास ही 1903 की बनी जेल के अवशेष मौजूद है। कहा जाता है कि सुल्ताना को पकड़ने के बाद इसी जेल में रखा गया था, जहां तन्हाई बैरक भी बनी है।
क्या कहते इतिहासकार और अधिकारी
हल्द्वानी।
कुमाऊं विवि के इतिहास विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. अजय रावत कहते हैं कि सुल्ताना को पकड़कर हल्द्वानी जेल में रखा गया था। उसके केस की सुनवाई जिला न्यायालय में होती थी। उस केस के कागजात नब्बे के दशक में नष्ट कर दिए गए थे। सुल्ताना को आगरा जेल में फांसी दी गई। बताया कि नजीबाबाद से लेकर कालाढूंगी समेत अन्य इलाकों में वह सक्रिय रहता था। संभव है कि सुल्ताननगरी इलाके का नाम उसके नाम से पड़ गया हो। हल्द्वानी वन प्रभाग के डीएफओ बाबूलाल कहते हैं कि सुल्ताना के नाम पर पर सुल्तान नगरी ब्लाक का नाम पड़ा हो, उसका कोई लिखित साक्ष्य नहीं है, यह एक संभावना की बात हो सकती है। जेल अधीक्षक प्रमोद पांडे कहते हैं कि सुल्ताना डाकू से जुड़ा कोई अभी लिखित साक्ष्य मौजूद नहीं है। पर जो पुराने अभिलेख हैं, उनको दिखवा कर नए सिरे से तलाश की जाएगी।
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कहा जाता है कि सुल्ताना डाकू की छवि राबिन हुड जैसी रही। जिम कार्बेट ने मेरा हिंदुस्तान पुस्तक में हिंदुस्तान का रबिनहुड: सुल्ताना के नाम से एक चैप्टर भी लिखा है। इसमें सुल्ताना और उसकी लामाचौड़ में डकैती से लेकर उसे पकड़ने की कोशिश के बारे में विस्तार से बताया गया है। इसी में एक स्थान पर गड़प्पू के जंगल का जिक्र आता है। मौजूदा समय में तराई केंद्रीय वन प्रभाग के गड़प्पू नामक स्थान पर एक कुएं जैसी आकृति है, जो कि अब नदी के अंदर आ चुका है। वनकर्मी बताते हैं कि यह सुल्ताना डाकू का कुआं है। कई लोग सुल्ताना का कुआं देखने आते हैं। इसी तरह कुमाऊं के सबसे पुराने वन प्रभाग मौजूदा हल्द्वानी वन प्रभाग में सुल्ताननगरी ब्लाक का जिक्र अभी भी आता है, छकाता रेंज में यह ब्लाक है। इसके नाम को भी सुल्ताना से जोड़कर देखा जाता है। इसी तरह मौजूदा हल्द्वानी उप कारागार के पास ही 1903 की बनी जेल के अवशेष मौजूद है। कहा जाता है कि सुल्ताना को पकड़ने के बाद इसी जेल में रखा गया था, जहां तन्हाई बैरक भी बनी है।
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क्या कहते इतिहासकार और अधिकारी
हल्द्वानी।
कुमाऊं विवि के इतिहास विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. अजय रावत कहते हैं कि सुल्ताना को पकड़कर हल्द्वानी जेल में रखा गया था। उसके केस की सुनवाई जिला न्यायालय में होती थी। उस केस के कागजात नब्बे के दशक में नष्ट कर दिए गए थे। सुल्ताना को आगरा जेल में फांसी दी गई। बताया कि नजीबाबाद से लेकर कालाढूंगी समेत अन्य इलाकों में वह सक्रिय रहता था। संभव है कि सुल्ताननगरी इलाके का नाम उसके नाम से पड़ गया हो। हल्द्वानी वन प्रभाग के डीएफओ बाबूलाल कहते हैं कि सुल्ताना के नाम पर पर सुल्तान नगरी ब्लाक का नाम पड़ा हो, उसका कोई लिखित साक्ष्य नहीं है, यह एक संभावना की बात हो सकती है। जेल अधीक्षक प्रमोद पांडे कहते हैं कि सुल्ताना डाकू से जुड़ा कोई अभी लिखित साक्ष्य मौजूद नहीं है। पर जो पुराने अभिलेख हैं, उनको दिखवा कर नए सिरे से तलाश की जाएगी।
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