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छात्रसंघ चुनाव से पहले एबीवीपी में फाड़ 

Sun, 10 Jul 2016 10:50 AM IST
निशांत खनी हल्द्वानी।
निशांत खनी हल्द्वानी। Updated Sun, 10 Jul 2016 10:50 AM IST
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Student elections before tearing ABVP
एबीवीपी - फोटो : अमर उजाला
एमबीपीजी कॉलेज छात्रसंघ चुनाव से पहले ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) में फाड़ हो गए हैं। झगड़ा सिर्फ  अपने-अपने चहेतों को संगठन के बैनर से अध्यक्ष का चुनाव लड़वाने का है। आपसी फूट मारपीट और मुकदमेबाजी के बाद शनिवार को एबीवीपी के स्थापना दिवस पर फिर उभरकर आ गई। एक ही संगठन का झंडा उठाने वाले कार्यकर्ताओं ने अलग अलग कार्यक्रम किए। संगठन की गुटबाजी का असर छात्र संघ चुनाव ही नहीं बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है।
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हल्द्वानी एमबीपीजी कॉलेज में एबीवीपी और एनएसयूआई में सीधा मुकाबला रहता है। बावजूद इसके कॉलेज की छात्र राजनीति में एनएसयूआई का झंडा बुलंद रहा है। अभी कॉलेज खुला नहीं है, लेकिन संभावित प्रत्याशियों ने प्रचार शुरू कर दिया है। इसमें संगठन और निर्दलीय सभी संभावित दावेदार हैं। चुनाव सितंबर तक होने की संभावना है।
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प्रत्याशी घोषित होने से पहले ही एबीवीपी गुटों में बंट गई है। इसमें कुछ नेता विजय जोशी को अध्यक्ष का चुनाव लड़वाना चाहते हैं तो कुछ नीरज मेहरा को। तीसरा गुट इनके झगड़े से न्यूट्रल हो गया है। अपने-अपने चहेतों को अध्यक्ष की उम्मीदवारी के चलते संगठन में नेताओं के बीच तलवारें तक खींच गई हैं। अंदरखाने की लड़ाई पुलिस थाने पहुंचने के बाद शनिवार को सड़क पर भी आ गई।
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शनिवार को एबीवीपी का 67वां स्थापना दिवस था। ऐसा हल्द्वानी में ऐसा पहली बार हुआ कि हल्द्वानी एबीवीपी इकाई के कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग कार्यक्त्रस्म किए। विजय जोशी को चुनाव मैदान में उतारने वालों ने रक्तदान शिविर लगवाया तो नीरज के समर्थकों ने शोभा यात्रा कर शक्ति प्रदर्शन किया। शोभायात्रा के काफिले में नीरज को अध्यक्ष प्रत्याशी के रूप में लांच किया गया। हालाँकि इस लांचिंग में अधिकांश नेता एबीवीपी के पूर्व पदाधिकारी रहे। जबकि रक्तदान शिविर में एबीवीपी के नगर, जिला और विभाग से जुड़े नेता रहे। कुछ कार्यकर्ता और नेता ऐसे थे जो दोनों गुटों में नजर नहीं आए।


एबीवीपी की इस गुटबाजी का असर कॉलेज ही नहीं आगामी विधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है। 2017 में चुनाव हैं। इस लिहाज से युवाओं का रोल अहम है। भाजपा हो या कांग्रेस दोनों ही प्रत्याशियों का भविष्य युवा वोटरों पर है। हल्द्वानी विधानसभा में युवा वोटरों की संख्या काफी अधिक है। युवा वोटर ही निर्णायक भूमिका में हैं। विधानसभा चुनाव से पहले कॉलेज चुनाव में एबीवीपी नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई में सुलह नहीं हुई तो खामियाजा एबीवीपी और भाजपा दोनों को भुगतना पड़ेगा।
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