{"_id":"58b72c5a4f1c1b9c698307e2","slug":"stonewalling-had-surgery-neurosurgeons-resigns","type":"story","status":"publish","title_hn":"सर्जरी में लगाया अड़ंगा, न्यूरो सर्जन का इस्तीफा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सर्जरी में लगाया अड़ंगा, न्यूरो सर्जन का इस्तीफा
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Thu, 02 Mar 2017 01:47 AM IST
विज्ञापन
डाक्टर
- फोटो : file photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदहाली के दौर से गुजर रहे कुमाऊं के सबसे बड़े सुशीला तिवारी अस्पताल को और बदहाल करने में डॉक्टर भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। विभागों में चल रही आपसी खींचतान मरीजों पर पड़ रही है। दो विभागों के विभागाध्यक्ष की शह पर जूनियर रेजीडेंट (जेआर) ने दो मरीजों की सर्जरी कैंसिल कर दी।
विज्ञापन
अव्यवस्थाओं से त्रस्त न्यूरो विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत न्यूरो सर्जन डॉ. मिथिलेश पांडे ने बुधवार को अपना इस्तीफा मेडिकल कालेज के प्राचार्य को भेज दिया। एसटीएच आने वाले मरीजों को अब न्यूरो विभाग में कोई भी डॉक्टर नहीं मिलेगा।
विज्ञापन
एनस्थीसिया विभाग की अड़चनों के कारण पूर्व में भी न्यूरो विभाग की सर्जरी टल रही थी। प्राचार्य के साथ बैठक होने के बाद मामले का समाधान हुआ। कुछ दिनों तक व्यवस्था ठीक चली और फिर स्थिति बिगड़ गई। व्यवस्था से परेशान न्यूरो सर्जन डॉ. दीपक पंवार ने पिछले सप्ताह की अस्पताल को अपनी सेवाएं देने से इंकार करते हुए त्याग पत्र दे दिया था।
विज्ञापन
सूत्रों की मानें तो कागजों में एक सीनियर रेजीडेंट (एसआर), पीजी जेआर न्यूरो विभाग को दिया गया है मगर वो सिर्फ कागजों तक ही सीमित है। न्यूरो विभाग को सिर्फ नान पीजी जेआर दिए गए। एसटीएच के सारे नियमों को धता बताते हुए एक जूनियर रेजीडेंट ने मरीज की ओटी कैंसिल कर दी।
जबकि हृदय रोग से संबंधित एक अन्य मरीज की ओटी ये कहते हुए कैंसिल कर दी कि कार्डिक संबंधी सुविधाएं नहीं हैं। सूत्रों की मानें तो न्यूरो और कार्डिक की ओटी कैंसिल करने से पहले डॉ. मिथिलेश पांडे और डॉ. अरुण जोशी से कुछ नहीं पूछा गया। डॉ. पांडे ने बताया कि एनस्थीसिया विभाग की ओर से सहयोग नहीं मिल रहा था।
सर्जरी के लिए एनस्थीसिया विभाग सहयोग नहीं कर रहा था। सर्जरी में आने वाली समस्याओं और असहयोग के बारे में कई बार प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा से शिकायत की गई मगर समस्या का समाधान नहीं हुआ। डॉ. पांडे ने बताया कि जेआर मरीज की सर्जरी कैंसिल नहीं कर सकता है। बिना डाक्टर की सहमति के किस आधार पर सर्जरी कैंसिल की गई।
कहा कि जेआर को सर्जरी कैंसिल कर मरीज को रिफर करने का अधिकार नहीं है। प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने बताया कि डॉ. पांडे का इस्तीफा मिला है और विचार किया जा रहा है। डॉ. पांडे ने इस्तीफा देने के पीछे कारण नहीं बताया है। बृहस्पतिवार को चिकित्सा-शिक्षा सचिव, चिकित्सा-शिक्षा निदेशक के साथ बैठकर समस्या का समाधान किया जाएगा।
चिकित्सा-शिक्षा निदेशक को बुला लिया है। एनस्थीसिया विभाग की विभागाध्यक्ष को भी बुलाया जाएगा। जेआर ने बिना अधिकार के सर्जरी कैंसिल और मरीज को कैसे रिफर किया इसकी जांच की जाएगी। अस्पताल की व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डी सैंथिल पांडियन, चिकित्सा-शिक्षा सचिव/मंडलायुक्त