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उत्तराखंड हाईकोर्ट: संविदा कर्मी हटाने के आदेश पर रोक, शहरी विकास निदेशक को जवाब दाखिल करने के निर्देश

Wed, 28 Oct 2026 09:59 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: Heera Updated Wed, 28 Oct 2026 09:59 PM IST
सार

नैनीताल हाईकोर्ट ने जियोटैगिंग और प्रगति आंकड़ों में विरोधाभास के आधार पर संविदा कर्मी को हटाने के आदेश पर रोक लगाते हुए शहरी विकास निदेशक को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

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stay on order to remove contract workers
उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नैनीताल हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकानों की जियोटैगिंग और कार्यों की प्रगति के आंकड़ों में विरोधाभास होने के आधार पर संविदा कर्मी को पद से हटाए जाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के बाद शहरी विकास निदेशक को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक संबंधित पद पर किसी अन्य कर्मचारी की नियुक्त करने पर रोक लगा दी है।

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सुनवाई के दौरान शहरी विकास निदेशक विनोद गोस्वामी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि विस्तार गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई सीडीओ पौड़ी या संबंधित अधिकारी से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर की गई थी। हालांकि, भुवन पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों और विभागीय रिपोर्ट के बीच अंतर को लेकर अदालत ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार संविदा कर्मी विस्तार गुप्ता ने पद से हटाए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि महज दो मकानो का टेंगिग करने के आधार पर उनको नौकरी से हटा दिया गया, जबकि भारत सरकार के भुवन पोर्टल पर उनके कार्यकाल में 67 से 70 प्रतिशत तक काम पूरा होने के आंकड़े दर्ज हैं।

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याचिका में कहा कि यह मामला प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकानों की जियोटैगिंग और कार्यों की निगरानी से जुड़ा है। याचिका में कहा कि वह वर्ष 2019 से उत्तराखंड शहरी विकास निदेशालय रुड़की के अंतर्गत संविदा पर कार्यरत थे। उनकी जिम्मेदारी योजना के तहत पूर्ण हुए मकानों का रिकॉर्ड रखना, जियोटैगिंग करना और अपात्र लोगों को गलत तरीके से लाभ दिए जाने की स्थिति में संबंधित अनियमितताओं को सामने लाना था। इससे पहले वह खटीमा नगर पालिका के साथ भी काम कर चुके थे। रुड़की नगर निगम में कामकाज के दौरान विस्तार गुप्ता ने कई अनियमितताएं पाईं और इसकी शिकायत की। याचिका में कहा कि शिकायत के बाद उन्हें ही नौकरी से हटा दिया गया।

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