{"_id":"6150dadf8ebc3e02624d2e06","slug":"state-s-first-palmetum-inaugurated-in-haldwani-haldwani-news-hld4393943129","type":"story","status":"publish","title_hn":"हल्द्वानी में प्रदेश के पहले पामेटम का उद्घाटन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हल्द्वानी में प्रदेश के पहले पामेटम का उद्घाटन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हल्द्वानी। उत्तराखंड के पहले और उत्तर भारत के सबसे बड़े पामेटम (पाम की बागवानी करने का स्थान) का उद्घाटन रविवार को मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) संजीव चतुर्वेदी और कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रो. ललित तिवारी ने संयुक्त रूप से किया। इसे फॉरेस्ट ट्रेनिंग अकादमी परिसर के तीन एकड़ में तैयार किया गया है। यहां पाम की सौ से अधिक प्रजातियों को लगाया गया है।
सीसीएफ संजीव चतुर्वेदी ने बताया कि पामेटम में 114 प्रजातियों को लगाया गया है जिसमें उत्तराखंड समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में मिलने वाली प्रजातियां शामिल हैं। इससे बड़े पामेटम दक्षिण भारत में ही हैं। उन्होंने बताया कि पाम से बने खाद्य तेल से लेकर सुपारी, खजूर का उपयोग किया जाता है। पाम प्रजातियों का इस्तेमाल सजावट के कार्यों में काफी होता है। घर, परिसर आदि की सजावट के लिए पाम प्रजातियों का लोग उपयोग करते हैं। पामेटम तैयार होने से प्रजातियों के संरक्षण, जागरूकता बढ़ाने के साथ ही शोध कार्यों में मदद मिलेगी। वनाधिकारियों के अनुसार यहां पर उत्तराखंड की टकील समेत बीस ऐसी प्रजातियों को लगाया गया है, जो कि संकटग्रस्त हैं।
पामेटम तीन साल में तैयार हुआ
हल्द्वानी। पामेटम तीन साल में तैयार हुआ है। इस कार्य के लिए कैंपा मद से 16 लाख की राशि मिली थी। इसे तीन एकड़ में तैयार किया गया है। पामेटम में ही कैना (शोभाकार प्रजाति) गार्डन भी बनाया गया है। इसमें 40 प्रजातियों को लगाया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सीसीएफ संजीव चतुर्वेदी ने बताया कि पामेटम में 114 प्रजातियों को लगाया गया है जिसमें उत्तराखंड समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में मिलने वाली प्रजातियां शामिल हैं। इससे बड़े पामेटम दक्षिण भारत में ही हैं। उन्होंने बताया कि पाम से बने खाद्य तेल से लेकर सुपारी, खजूर का उपयोग किया जाता है। पाम प्रजातियों का इस्तेमाल सजावट के कार्यों में काफी होता है। घर, परिसर आदि की सजावट के लिए पाम प्रजातियों का लोग उपयोग करते हैं। पामेटम तैयार होने से प्रजातियों के संरक्षण, जागरूकता बढ़ाने के साथ ही शोध कार्यों में मदद मिलेगी। वनाधिकारियों के अनुसार यहां पर उत्तराखंड की टकील समेत बीस ऐसी प्रजातियों को लगाया गया है, जो कि संकटग्रस्त हैं।
विज्ञापन
पामेटम तीन साल में तैयार हुआ
हल्द्वानी। पामेटम तीन साल में तैयार हुआ है। इस कार्य के लिए कैंपा मद से 16 लाख की राशि मिली थी। इसे तीन एकड़ में तैयार किया गया है। पामेटम में ही कैना (शोभाकार प्रजाति) गार्डन भी बनाया गया है। इसमें 40 प्रजातियों को लगाया गया है।
विज्ञापन