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आश्वासन मिलते रहे पर हुआ कुछ नहीं

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 12 Feb 2022 12:13 AM IST
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Staff Union in Haldwani
हल्द्वानी। उत्तराखंड पेयजल निगम का राजकीयकरण और कोषागार से वेतन दिए जाने की मांग को लेकर आंदोलन करते पांच वर्ष बीत गए मगर निगम के अधिकारियों - कर्मचारियों को मांग पूरी होने के नाम पर मिला सिर्फ आश्वासन। कर्मचारियों के मुताबिक पिछले वर्ष हड़ताल करने पर कुछ उम्मीद भी जगी थी कि समझौते के आधार पर सरकार उनकी मांग को कैबिनेट में चर्चा के लिए रख रही है पर प्रस्ताव पर हुआ कुछ नहीं। निगम से जुड़े छह हजार अधिकारियों- कर्मचारियों और पेंशनर्स की मांग है कि उन्हें कोषागार से वेतन देने के साथ ही निगम का राजकीयकरण किया जाए।
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पेयजल निगम व जलसंस्थान के कर्मचारी एकीकरण व राजकीयकरण किए जाने की मांग पिछले पांच वर्ष से उठा रहे हैं। सरकार द्वारा राजकीयकरण होने तक कोषागार से वेतन व पेंशन देने का आश्वासन दिया गया था परंपु सरकार का आश्वासन हवाई निकला। आश्वासन देने के बाद भी शासनादेश जारी नहीं किया गया। इससे 6000 कर्मचारी व पेंशनर्स हताश हैं।
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- जितेंद्र देव सिंह अध्यक्ष, अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तराखंड पेयजल निगम
उत्तराखंड पेयजल निगम जो पूर्व में राजकीय विभाग था, भारत के ज्यादातर प्रदेशों में पेयजल सेक्टर राजकीय विभाग है। उत्तराखंड की बिडंबना है कि यहां इसके लिए हमें आंदोलन करना पड़ रहा है। उत्तराखंड में प्रत्येक माह वेतन के लाले पड़ रहते हैं, कोई सुनने वाला नहीं है। हमारी एक सूत्रीय मांग है कि पेयजल निगम का राजकीयकरण हो जिससे वेतन संबंधी मुद्दे का हल हो सके।
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- पीएस मेहरा मंडल संयोजक (कुमाऊं) अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति
अधिकारी कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति उत्तराखंड पेयजल निगम लंबे समय से पेयजल निगम के पूर्व की भांति राजकीय विभाग बनाने की मांग कर रहा है। इसको लेकर कई आंदोलन भी किए गए मगर सरकार ने न तो राजकीयकरण किया न ही कोषागार से वेतन दिए जाने का शासनादेश ही जारी किया। चुनाव बाद सभी कर्मचारी अपना हक मांगने के लिए फिर से आंदोलन पर चलने को मजबूर होंगे।
- शीतल शाह सहसंयोजक कुमाऊं, संघर्ष समिति
वेतन - पेंशन के समय से भुगतान के लिए बजट पेयजल सचिव द्वारा कैबिनेट में रखने के बावजूद लगभग दो माह पश्चात आज तक उसका शासनादेश निर्गत नहीं किया गया है। जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। अधिकारी और कर्मचारियों को दिसंबर- जनवरी माह का वेतन अब नहीं मिला है। वेतन के बगैर ही पेयजल निगम कर्मचारी चुनाव ड्यूटी कर रहे हैं।
- धर्मेंद्र चौधरी पूर्व महामंत्री, उत्तराखंड पेयजल निगम महासंघ
हमें समय पर वेतन- पेंशन का भुगतान हो, इसी मांग को हमने सरकार और शासन के समक्ष रखा था कि अगर कोषागार के माध्यम से वेतन- पेंशन का भुगतान करती है तो कर्मचारियों को समय से वेतन मिल जाएगा जिससे शासन पर कोई वित्तीय भार भी नहीं पड़ेगा और निगम से प्राप्त होने सेंटेज सरकार के खाते में जमा हो जाएगा लेकिन कैबिनेट में प्रस्ताव रखे जोन के बाद भी शासनादेश जारी नहीं हुआ।

- विजय खाली महामंत्री, समन्वय समिति
काम के बदले वेतन पाना हर सरकारी कर्मचारी का हक है। समय से वेतन न मिल पाने से पेयजल निगम के सभी अधिकारी-कर्मचारी काफी आहत हैं कई बार सरकार और शासन से समझौते होने के बाद भी आज तक वेतन का मुद्दा जस का तस है। कर्मचारियों की मांग को लेकर सरकार की मंशा अगर सही होती तो यह स्थिति न होती।
- ई. यतेंद्र सिंह रावत जनपद संयोजक, समन्वय समिति
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