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कोई इस्तीफा देकर आया, किसी ने जमापूंजी खत्म होने पर पकड़ी घर की राह

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 18 May 2020 02:33 AM IST
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Someone came out resigning, someone caught the road to the house after the demolition
हल्द्वानी। राज्य के कई यात्री अहमदाबाद से चली स्पेशल ट्रेन से लालकुआं पहुंचे। इसमें से किसी ने कोरोना के खौफ के चलते नौकरी छोड़ दी। किसी की जमापूंजी खत्म हो गई तो उसे घर की राह पकड़नी पड़ी।
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नौकरी नहीं थी इसलिए आया
सोमेश्वर निवासी मोहन सिंह नेगी अहमदाबाद में एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हैं। उन्होंने बताया कि खाने पीने की दिक्कत होने लगी थी। अब नौकरी है नहीं, इसलिए वहां रुकना क्यों था। स्थिति सामान्य होगी तो वापस जाएंगे।
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कोरोना के कारण इस्तीफा दे दिया
रुद्रपुर निवासी सुमित सरकार भी एक कंपनी में काम कर रहे थे। सुमित ने कोरोना के भय और परिवार की दिक्कत के चलते नौकरी से इस्तीफा दे दिया। अब अपने शहर में नौकरी की खोज करेंगे या कोई बिजनेस देखेंगे।
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अक्तूबर से बंद है होटल
चौखुटिया सिमलखेत निवासी राहुल सिंह सूरत में एक होटल में काम करते थे। उन्होंने बताया कि होटल अक्तूबर तक बंद रहेगा। पैसा खत्म हो गया है। क्या खाएंगे यही सोच कर घर वापस आ गए। अब घर पर ही कोई काम खोजेंगे।
हालात सामान्य होंगे तब जाएंगे
खटीमा निवासी मनोज पोखरिया सूरत में एक होटल में काम करते हैं। मनोज ने बताया कि काम बंद है। पैसे की दिक्कत हो रही थी तो घर लौटना पड़ा। हालात सामान्य होंगे तो दोबारा जाऊंगा।
दो महीने से परेशान था
रीठा साहिब इलाके के रहने वाले बालादत्त ने बताया कि वह एक फैक्ट्री में दो साल से काम कर रहे थे। करीब दो महीने से कामकाज बंद था। घर का किराया देना था। खाने से जुड़ी समस्या थी।
घर वाले परेशान थे इसलिए आ गया
चंपावत जिले के रहने वाले अमर सिंह ने बताया कि वह एक रेस्टोरेंट में काम करते थे। काम बंद पड़ा है। रेस्टोरेंट स्वामी ने वेतन दिया है। उनके साथ वाले लोग डेढ़ महीने पहले ही वापस आ गए थे। घरवालों के लगातार फोन आ रहा थे।
आगे देखते हैं क्या होता है
टनकपुर के पास रहने वाले प्रताप सिंह एक होटल में काम करते हैं। उन्होंने बताया कि दो महीनों से कामकाज बंद है। अब आगे जैसे हालात होंगे उसके आधार पर भविष्य के बारे में सोचेंगे।
इनकी भी पीड़ा
अहमदाबाद के होटल में काम करता था, काफी समय से ही अहमदाबाद में था, लॉकडाउन के बाद होटल बंद हो गया है। - विकास चमोला, धारचूला
अहमदाबाद के एक रेस्त्रां में काम करता था। लॉकडाउन के बाद आधे पैसे मिले और दो टाइम का खाना मिला। यहां रोजगार मिल गया तो फिर अहमदाबाद नहीं जाएंगे। - पवन सिंह, चंपावत
होटल में काम करता था, छह महीने पहले अहमदाबाद गया था। लॉकडाउन के बाद सेठ ने सैलरी नहीं दी। घर का किराया 6000 हजार रुपये था। साथ में पत्नी भी रहती है। - दीपक चंद्र, धारचूला

देर में मिली जानकारी इसलिए छूट गई ट्रेन
हल्द्वानी। गुजरात निकट दमन और दीव में रह रहे हल्द्वानी निवासी कृष्णा बिष्ट ने दूरभाष पर बताया कि उन्हें शनिवार को 01:35 बजे ट्रेन के बारे में जानकारी मिली। मैसेज में शाम छह बजे ही अहमदाबाद स्टेशन पर पहुंचने के लिए कहा गया था, जबकि अहमदाबाद तक के सफर में 10 घंटे का समय लगता है। उन्होंने बताया कि मैसेज देर से मिलने के कारण कई लोग स्टेशन नहीं पहुंच पाए।
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