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Nainital News: उद्यान विभाग में हुए घोटाले की जांच के लिए एसआईटी को दिया 15 दिन का समय
Thu, 10 Aug 2023 02:42 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Thu, 10 Aug 2023 02:42 AM IST
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नैनीताल। हाईकोर्ट ने उद्यान विभाग में हुए घोटाले की जांच के लिए एसआईटी को 15 दिन का समय दिया है। कोर्ट ने घोटाले की जांच रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में पेश करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने कहा कि वह देखना चाहती है कि एसआईटी सही जांच कर रही है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी। बता दें कि याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका दायर कर सीबीआई या किसी अन्य एजेंसी से मामले की जांच कराने की मांग की थी। मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मामले की जांच सरकार ने एसआईटी को दे दी है। एसआईटी ने जांच के लिए कमेटी गठित भी कर दी है इसलिए जांच एसआईटी से कराई जाए। सरकार ने कहा कि एसआईटी की जांच पर संदेह नहीं किया जा सकता। इस पर कोर्ट ने एसआईटी की जांच को परखने के लिए 15 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के लिए कहा है।
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याचिकाकर्ता की बात
याचिकाकर्ता की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि एसआईटी को सील रिकॉर्ड सौंपने से पहले उस रिकॉर्ड का एक कमेटी के समक्षा डिजिटलाइजेशन किया जाए। याचिकाकर्ता ने आशंका जताई कि रिकार्ड में छेड़छाड़ की जा सकती है। इस पर कोर्ट ने उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल की निगरानी में सील रिकॉर्ड का डिजिटलाइजेशन करके एसआईटी को रिकॉर्ड जांच के लिए सौंपने के निर्देश दिए।
याचिकाकर्ता दीपक करगेती के आरोप
- उद्यान विभाग में लाखों का घोटाला कर फल और पौधरोपण में गड़बडियां की गईं है। - विभाग की ओर से एक ही दिन में वर्क आर्ड़र जारी कर उसी दिन जम्मू- कश्मीर से पेड़ लाना दिखाया गया है जिसका पेमेंट भी कर दिया गया।
- शीतकालीन सत्र में निलंबित उद्यान निदेशक ने नकली नर्सरी अनिका ट्रेडर्स को पूरे राज्य में करोड़ों की पौध खरीद का कार्य देकर बड़ा घोटाला किया।
-उद्यान लगाओ उद्यान बचाओ यात्रा से जुड़े किसानों और उत्तरकाशी के किसानों के इस प्रकरण को उठाने पर अनिका ट्रेडर्स के आवंटन को रद्द करने का पत्र जारी कर दिया गया। बावजूद इसके अनिका ट्रेडर्स के पौधे बांटे गए।
- नैनीताल में मुख्य उद्यान अधिकारी राजेंद्र कुमार सिंह के साथ मिलकर बवेजा ने एक फर्जी आवंटन जम्मू-कश्मीर की एक और नर्सरी बरकत एग्रो फार्म को कर दिया। - बरकत एग्रो फार्म को इनवॉइस बिल आने से पहले ही भुगतान कर दिया गया।
- बिलों पर अकाउंटेंट के हस्ताक्षर के बिना ही करोड़ों रुपये ठिकाने लगा दिए गए।
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कोर्ट ने कहा कि वह देखना चाहती है कि एसआईटी सही जांच कर रही है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी। बता दें कि याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका दायर कर सीबीआई या किसी अन्य एजेंसी से मामले की जांच कराने की मांग की थी। मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
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सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मामले की जांच सरकार ने एसआईटी को दे दी है। एसआईटी ने जांच के लिए कमेटी गठित भी कर दी है इसलिए जांच एसआईटी से कराई जाए। सरकार ने कहा कि एसआईटी की जांच पर संदेह नहीं किया जा सकता। इस पर कोर्ट ने एसआईटी की जांच को परखने के लिए 15 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के लिए कहा है।
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याचिकाकर्ता की बात
याचिकाकर्ता की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि एसआईटी को सील रिकॉर्ड सौंपने से पहले उस रिकॉर्ड का एक कमेटी के समक्षा डिजिटलाइजेशन किया जाए। याचिकाकर्ता ने आशंका जताई कि रिकार्ड में छेड़छाड़ की जा सकती है। इस पर कोर्ट ने उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल की निगरानी में सील रिकॉर्ड का डिजिटलाइजेशन करके एसआईटी को रिकॉर्ड जांच के लिए सौंपने के निर्देश दिए।
याचिकाकर्ता दीपक करगेती के आरोप
- उद्यान विभाग में लाखों का घोटाला कर फल और पौधरोपण में गड़बडियां की गईं है। - विभाग की ओर से एक ही दिन में वर्क आर्ड़र जारी कर उसी दिन जम्मू- कश्मीर से पेड़ लाना दिखाया गया है जिसका पेमेंट भी कर दिया गया।
- शीतकालीन सत्र में निलंबित उद्यान निदेशक ने नकली नर्सरी अनिका ट्रेडर्स को पूरे राज्य में करोड़ों की पौध खरीद का कार्य देकर बड़ा घोटाला किया।
-उद्यान लगाओ उद्यान बचाओ यात्रा से जुड़े किसानों और उत्तरकाशी के किसानों के इस प्रकरण को उठाने पर अनिका ट्रेडर्स के आवंटन को रद्द करने का पत्र जारी कर दिया गया। बावजूद इसके अनिका ट्रेडर्स के पौधे बांटे गए।
- नैनीताल में मुख्य उद्यान अधिकारी राजेंद्र कुमार सिंह के साथ मिलकर बवेजा ने एक फर्जी आवंटन जम्मू-कश्मीर की एक और नर्सरी बरकत एग्रो फार्म को कर दिया। - बरकत एग्रो फार्म को इनवॉइस बिल आने से पहले ही भुगतान कर दिया गया।
- बिलों पर अकाउंटेंट के हस्ताक्षर के बिना ही करोड़ों रुपये ठिकाने लगा दिए गए।