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Nainital News: लोक सूचना अधिकारी को कारण बताओ नोटिस
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नैनीताल। उत्तराखंड राज्य सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुंवर ने गैबुआ कालाढूंगी निवासी राजेंद्र कुमार पाठक की ओर से मांगी गई आरटीआई का जवाब न देने और प्रथम विभागीय अपीलीय अधिकारी के आदेश के 17 माह बाद भी संबंधित जानकारी न देने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने इसे सूचना अधिकारी अधिनियम के नियमों की अवहेलना मानते हुए लोक सूचना अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कहा कि क्यों न आप पर 250 रुपया प्रतिदिन के अनुपात में 25 हजार रुपया जुर्माना लगाया जाए? विभागीय अपीलीय अधिकारी को इसकी समीक्षा न करने का दोषी पाया है। डीएम को मातहतों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा है। कहा कि छह जून की प्रस्तावित तिथि को अधिकारी व्यक्तिगत रूप से आयोग में उपस्थित हों।
आरटीआई कार्यकर्ता और पीड़ित पक्ष गैबुआ तहसील कालाढूंगी निवासी राजेंद्र पाठक का कहना है कि भीमताल और गौलापार में उनके नाना की संपत्ति है। नानाजी की दो बेटियां हैं। आरोप है कि मासी ने झूठे दस्तावेज प्रस्तुत कर अपनी बहन मुन्नी की संपत्ति अपने नाम कर ली है। राजेंद्र ने इसमें विभागीय मिलीभगत का भी आरोप लगाया है। वर्ष 2021 में जमीन की तहकीकात में उन्हें जमीन मासी के नाम करने की जानकारी मिली। 2022 से संबंधित मामला न्यायालय में भी विचाराधीन है। न्यायालय में न्याय के लिए उन्होंने तहसील से संबंधित जानकारियों के लिए आरटीआई लगाई। बीते तीन वर्ष से उन्हें परेशान किया जा रहा है और कोई प्रपत्र नहीं दिया जा रहा है। इसे ही उन्होंने आयोग में चुनौती दी। इसमें आयोग ने तत्कालीन प्रथम लोक सूचना अधिकारी नायब तहसीलदार एवं प्रथम विभागीय अपीलीय अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा है। संवाद
आरटीआई कार्यकर्ता और पीड़ित पक्ष गैबुआ तहसील कालाढूंगी निवासी राजेंद्र पाठक का कहना है कि भीमताल और गौलापार में उनके नाना की संपत्ति है। नानाजी की दो बेटियां हैं। आरोप है कि मासी ने झूठे दस्तावेज प्रस्तुत कर अपनी बहन मुन्नी की संपत्ति अपने नाम कर ली है। राजेंद्र ने इसमें विभागीय मिलीभगत का भी आरोप लगाया है। वर्ष 2021 में जमीन की तहकीकात में उन्हें जमीन मासी के नाम करने की जानकारी मिली। 2022 से संबंधित मामला न्यायालय में भी विचाराधीन है। न्यायालय में न्याय के लिए उन्होंने तहसील से संबंधित जानकारियों के लिए आरटीआई लगाई। बीते तीन वर्ष से उन्हें परेशान किया जा रहा है और कोई प्रपत्र नहीं दिया जा रहा है। इसे ही उन्होंने आयोग में चुनौती दी। इसमें आयोग ने तत्कालीन प्रथम लोक सूचना अधिकारी नायब तहसीलदार एवं प्रथम विभागीय अपीलीय अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा है। संवाद
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