Haldwani: छत से टपक रहा पानी...टूटी खिड़कियां, बारिश के बीच उत्तराखंड रोडवेज में छाता लेकर सफर कर रहे यात्री
मानसूनकाल में ये बसें यात्रियों का दर्द और बढ़ा रही हैं। टूटीं खिड़कियों से बारिश का पानी बसों में भर जाता है। छतें टपकती रहती हैं। लिहाजा, यात्रियों को रेनकोट पहनकर या छाता ओढ़कर सफर करना पड़ता है। कई बसों की सीटें बैठने लायक नहीं हैं।
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पहाड़ पर रोडवेज की बसें आम आदमी के लिए आवाजाही का एकमात्र साधन हैं। ये बसें इतनी खटारा हैं कि कभी-कभी आधे सफर में ही यात्रियों को छोड़ देती हैं। कंडम हो चुकीं इन बसों में सफर जान जोखिम में डालने जैसा है। मानसूनकाल में ये बसें यात्रियों का दर्द और बढ़ा रही हैं। टूटीं खिड़कियों से बारिश का पानी बसों में भर जाता है। छतें टपकती रहती हैं। लिहाजा, यात्रियों को रेनकोट पहनकर या छाता ओढ़कर सफर करना पड़ता है। कई बसों की सीटें बैठने लायक नहीं हैं। किसी का कवर फटा है तो किसी की गद्दी खराब है। अमर उजाला ने शुक्रवार को रोडवेज बसों हाल जाना तो यह तस्वीर सामने आई।
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अल्मोड़ा-
- अल्मोड़ा डिपो से 14 बसें चलती अन्योला हैं। अधिकतर बसों में सीटें फटी हैं। तेज हवा से खिड़कियां खुद ब खुद खुल जाती हैं
- पांच से अधिक बसों में फर्स्ट एड बॉक्स क्षतिग्रस्त। इनमें जरूरी दवाएं तक नहीं मिलीं।
- अल्मोड़ा डिपो में चालकों के 66 में से 25 पद रिक्त हैं, परिचालकों के 66 में 15 खाली हैं।
बागेश्वर-
- बागेश्वर डिपो में 15 बसों के सापेक्ष पांच बसें खराब। उम्र पूरी कर चुकीं बसों के सहारे चल रहा डिपो।
- सीटें फटी हैं, फर्स्ट एड के इंतजाम नहीं, दरवाजों के हैंडल टूटे हैं। कार्यशाला में उपकरण नहीं, मरम्मत में आती है दिक्कत।
- एजीएम नहीं हैं, लिपिक के दो, चालक के चार और परिचालकों के सात पद खाली।
चंपावत-पिथौरागढ़-
- टनकपुर डिपो की 85 बसों में 25 की उम्र पूरी चंपावत-पिथौरागढ़ हो चुकी है जबकि 12 वर्कशॉप में खड़ीं हैं।
- लोहाघाट डिपो के पास 30 बसें हैं। इनमें 5 टनकपुर वर्कशॉप में खड़ीं हैं।
- पिथौरागढ़ में 58 बसें हैं। इनमें नौ ऑफ रूट हैं। जो संचालित हो रही हैं, उनके इंजन ही नहीं, सीटें, खिड़कियां और छत भी खराब हो गई हैं।
हल्द्वानी-
- एक बस में सीटें उखड़ीं थीं। कई बसों के शीशे छितरे होने के कारण बारिश का पानी अंदर घुस रहा था। कई बसों में फर्स्ट एड बॉक्स तक नहीं था।
रुद्रपुर-
- कुल 84 बसों में 42 दानपुर अनुबंधित हैं।
- ये बसें 10 लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी हैं। कई बसों की बॉडी टूटकर गिरने लगी हैं।
- दीपक जैन, महाप्रबंधक (संचालन) परिवहन निगम, देहरादून