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लालकुआं और भीमताल सीट में फंसी रोहित ज्वाइनिंग

Fri, 04 Nov 2016 01:20 AM IST
निशांत खनी
निशांत खनी Updated Fri, 04 Nov 2016 01:20 AM IST
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Rohit stuck in the seat and joining Lalkuan Bhimtal
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कांग्रेसियों की कुछ समय नींद उड़ाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने अब लालकुआं और भीमताल सीट से भाजपा के संभावित प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ा दी है। कांग्रेस आलाकमान से टिकट की उम्मीद छोड़ चुके पूर्व मुख्यमंत्री तिवारी अपने पुत्र रोहित शेखर तिवारी को अब भाजपा से चुनाव लड़ाना चाहते हैं।

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मामला लालकुआं और भीमताल की सीट के बीच फंसा हुआ है। इसी असमंजस में रोहित शेखर तिवारी अभी तक भाजपा का ‘कमल’ हाथों में नहीं पकड़ पाए हैं। हालांकि रोहित को अन्य जिले की सीट से चुनाव लड़ने से भी परहेज नहीं है।
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पूर्व मुख्यमंत्री नारायण तिवारी बेटे रोहित शेखर तिवारी को सक्रिय राजनीति में उतारना चाहते हैं। सोनिया गांधी और राहुल गांधी से रोहित के लिए टिकट की आस को सिर्फ मायूसी मिली है।
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ऐसे में रोहित के लिए भाजपा से टिकट पाने की कोशिशें जारी हैं। रोहित खुद स्वीकार चुके हैं वे न कांग्रेसी हैं न सपाई। बेहतर विकल्प मिलने पर किसी भी पार्टी से चुनाव लड़ सकते हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री तिवारी के भाजपा के बड़े नेताओं से मधुर राजनीतिक संबंध जगजाहिर हैं। एनडी तिवारी के 92वें जन्मदिन समारोह में भाजपा नेताओं की उनसे नजदीकियां राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं में रही हैं।

सूत्रों के मुताबिक भाजपा भी एनडी तिवारी के नाम पर रोहित पर दांव खेलकर सीटें बढ़ाना चाहती है। रोहित के टिकट के लिए भाजपा आलाकमान सहमति दे चुका है। रोहित भाजपा के सिंबल पर चुनाव लड़ते हैं तो प्रदेश की कई सीटों में भाजपा को एनडी तिवारी के नाम का फायदा मिलेगा।

सूत्रों के मुताबिक भाजपा रोहित को लालकुआं या फिर भीमताल से मैदान में उतारना चाहती है। भीमताल में एनडी तिवारी का पैतृक गांव है। यहां भाजपा के पास जिताऊ चेहरा नहीं है। भीमताल से भाजपा के दर्जन भर दावेदार हैं। भाजपा रोहित पर दांव खेलकर जीत देख रही है।

लालकुआं सीट भी रोहित के लिए मुफीद हो सकती है। इस सीट पर बिंदुखत्ता सबसे बड़ा वोट बैंक है। बिंदुखत्ता में एनडी तिवारी के समर्थकों का एक बड़ा वर्ग है। एनडी तिवारी के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान ही वन भूमि पर बिंदुखत्ता बसाया गया।

एनडी तिवारी की हल्दूचौड़ और आसपास में रिश्तेदारी भी है। गौलापार और चोरगलिया भी एनडी तिवारी का प्रभाव क्षेत्र है। लेकिन, लालकुआं सीट पर रोहित को भितरघात के शिकार होने का डर भी है।

यहां से नवीन दुम्का और हेमंत द्विवेदी प्रबल दावेदार हैं और तैयारी में जुटे हैं। ऐन वक्त रोहित की लांचिंग होने से भाजपा  गुटबाजी का शिकार होकर  नुकसान उठा सकती है। भाजपा के बड़े नेता और रोहित सीट की इसी माथापच्ची पर उलझे हैं। जल्द ही सीट फाइनल होने के साथ रोहित की भाजपा में ज्वाइनिंग की उम्मीदें लगाई जा रही हैं।


भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी से उनकी मुलाकात का मकसद राजनीतिक नहीं था। वह तो उनको सिर्फ जन्मदिन की बधाई देने गए थे। उन्होंने कहा कि न तो एनडी तिवारी ने रोहित शेखर को भाजपा में शामिल करने की बात कही और न ही खुद रोहित ने।


20 नवंबर से पहले सीट और पार्टी की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। मेरे पिता को जहां सम्मान मिलेगा, वही मेरी पार्टी होगी। लालकुआं और भीमताल ही नहीं मैं हल्द्वानी, रामनगर के अलावा ऊधमसिंह नगर जिले की किसी भी सीट से चुनाव लड़कर जीत सकता हूं।

- रोहित शेखर तिवारी।


 

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