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Nainital News: रेस्क्यू सेंटर में अब घायल पक्षियों के इलाज को भी लगेंगे पंख
Sat, 07 Mar 2026 01:55 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Sat, 07 Mar 2026 01:55 AM IST
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रामनगर। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) के ढेला रेंज स्थित रेस्क्यू सेंटर में वन्यजीवों के साथ ही पक्षियों को भी उपचार मिलेगा। इसके लिए पार्क प्रशासन की ओर से कार्ययोजना तैयार की जा रही है। जल्द ही पक्षियों के उपचार के लिए लैब, बाड़े आदि की डीपीआर बनाई जाएगी।
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और इससे सटे वन प्रभागों में 600 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। इसमें कई प्रवासी पक्षी भी शामिल हैं। कई बार आपसी संघर्ष में पक्षी घायल हो जाते हैं लेकिन उपचार के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं होने से कई बार उनकी मौत हो जाती है। अब पार्क प्रशासन इन पक्षियों के उपचार के लिए रेस्क्यू सेंटर में लैब, बाड़े आदि बनाने की योजना बना रहा है। शासन से कार्य योजना को स्वीकृति मिलते ही डीपीआर बनाने का कार्य शुरू किया जाएगा। संवाद
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अलग से बाड़ा बनाया जाएगा
पार्क प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार रेस्क्यू सेंटर में मौजूदा समय में 15 बाघ व 15 तेंदुए के बाड़े मौजूद हैं। इन बाड़ों में 13 बाघ और 14 तेंदुए रह रहे हैं। जिस तरह बाघ और तेंदुओं को रेस्क्यू सेंटर के बाड़े में रखा जाता है उसी तर्ज पर पक्षियों के लिए अलग बाड़ा बनाया जाएगा।
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रेस्क्यू सेंटर में पक्षियों के भी उपचार की योजना बनाई जा रही है। योजना को शासन से स्वीकृति मिलते ही डीपीआर बनाने का कार्य किया जाएगा जिसके बाद बजट मिलते ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। - डॉ. साकेत बडोला, निदेशक, सीटीआर
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कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और इससे सटे वन प्रभागों में 600 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। इसमें कई प्रवासी पक्षी भी शामिल हैं। कई बार आपसी संघर्ष में पक्षी घायल हो जाते हैं लेकिन उपचार के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं होने से कई बार उनकी मौत हो जाती है। अब पार्क प्रशासन इन पक्षियों के उपचार के लिए रेस्क्यू सेंटर में लैब, बाड़े आदि बनाने की योजना बना रहा है। शासन से कार्य योजना को स्वीकृति मिलते ही डीपीआर बनाने का कार्य शुरू किया जाएगा। संवाद
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अलग से बाड़ा बनाया जाएगा
पार्क प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार रेस्क्यू सेंटर में मौजूदा समय में 15 बाघ व 15 तेंदुए के बाड़े मौजूद हैं। इन बाड़ों में 13 बाघ और 14 तेंदुए रह रहे हैं। जिस तरह बाघ और तेंदुओं को रेस्क्यू सेंटर के बाड़े में रखा जाता है उसी तर्ज पर पक्षियों के लिए अलग बाड़ा बनाया जाएगा।
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रेस्क्यू सेंटर में पक्षियों के भी उपचार की योजना बनाई जा रही है। योजना को शासन से स्वीकृति मिलते ही डीपीआर बनाने का कार्य किया जाएगा जिसके बाद बजट मिलते ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। - डॉ. साकेत बडोला, निदेशक, सीटीआर