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बागी विधायकों को नहीं मिली राहत

Sat, 26 Mar 2016 12:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल। Updated Sat, 26 Mar 2016 12:58 AM IST
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नैनीताल। हाईकोर्ट ने कांग्रेस के आठ बागी विधायकों को फिलहाल राहत नहीं दी है। विधानसभा अध्यक्ष की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका को डेढ़ घंटे तक सुनवाई के बाद प्री मेच्योर मानते हुए हाईकोर्ट ने उसे खारिज कर दिया है। साथ ही न्यायालय ने कहा कि यह स्पीकर का क्षेत्राधिकार बनता है या नहीं। यह अभी नहीं देखा जा सकता है, क्योंकि यह केवल शोकॉज नोटिस है, जिसका केवल उन्हें जवाब देना है।

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स्पीकर ने अभी कोई आदेश पास नहीं किया है। इसी आधार पर कोर्ट ने बागी विधायकों की याचिका खारिज कर दी। विधायकों की ओर से सुप्रीम कोर्ट से आए वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश द्विवेदी और स्पीकर की ओर से पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री व वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल व उनके साथ वरिष्ठ अधिवक्ता अवतार सिंह रावत व कार्तिके हरिगुप्ता ने पैरवी की।
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बता दें कि नौ विधायकों को दिए गए नोटिस में से आठ विधायकों ने ही शुक्रवार को हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। आठ विधायकों की ओर से पैरवी कर रहे सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश द्विवेदी ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल नरेंद्र दत्त से हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए मामला मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने की बात कही, जिसके बाद रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ के पास गए।
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मुख्य न्यायाधीश ने मामले को अति आवश्यक माना,  उनके आदेश के बाद होली के अवकाश के चलते इस प्रकरण पर सुनवाई के स्पेशल कोर्ट गठित की गई। सुनवाई शाम तीन बजे शुरू हुई तथा 4.30 बजे तक चली। 

न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। बागी विधायकों की तरफ से रामनगर विधायक अमृता रावत, रुद्रप्रयाग विधायक हरक सिंह रावत, खानपुर विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन, जसपुर विधायक शैलेंद्र मोहन सिंघल, केदारनाथ विधायक शैला रानी रावत, नरेंद्रनगर विधायक सुबोध उनियाल, रायपुर विधायक उमेश शर्मा व रुड़की विधायक प्रदीप बत्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर विधानसभा अध्यक्ष की ओर से 19 मार्च 2016 को दिए गए शोकॉज नोटिस को चुनौती दी थी।

जिसमें कहा गया था उनके द्वारा कांग्रेस पार्टी के खिलाफ नारे लगाए गए और भाजपा के विधायकों के साथ मिलकर सरकार को गिराने की कोशिश की गई। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वित्त मंत्री इंदिरा हृदेश की शिकायत के बाद विधानसभा अध्यक्ष की ओर से उन्हें शोकॉज नोटिस दिया गया है, इसका जवाब उन्हें 26 मार्च तक देना है, जो गलत है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि ऐसा कुछ नहीं है, जिससे यह साबित हो कि उन्होंने खिलाफत की है।

यदि सरकार कुछ गलत करती है तो उन्हें खिलाफत करने का अधिकार है। इस मामले में स्पीकर की ओर से पैरवी कर रहे पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि याचिककर्ताओं ने सरकार की खिलाफत की थी। उन्होंने विपक्षी दल से मिलकर सरकार को गिराने का प्रयास भी किया। उन्हें जो कुछ कहना है, वे स्पीकर के समक्ष कह सकते हैं।


अदालत इस स्टेज पर फिलहाल हस्तक्षेप नहीं कर सकती है, क्योंकि यह प्री मेच्योर है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने कहा कि यह स्पीकर का क्षेत्राधिकार बनता है या नहीं। यह इस स्तर पर नहीं देखा जा सकता है, क्योंकि यह केवल शोकॉज नोटिस है, स्पीकर ने उनके खिलाफ कोई आदेश पास नहीं किया है। इस आधार पर खंडपीठ ने बागियों की याचिका खारिज कर दी।  

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