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रामलीला कमेटी अध्यक्ष ने की वित्तीय अनियमितता

Fri, 05 Aug 2016 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी। Updated Fri, 05 Aug 2016 12:18 AM IST
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Ramlila Committee chief financial irregularities
रामलीला - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
रामलीला कमेटी के कोषाध्यक्ष मनोज चौहान ने कमेटी अध्यक्ष लीला कांडपाल पर वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया है। वहीं, आय-व्यय के ब्योरे के दस्तावेज सिटी मजिस्ट्रेट ने अधूरे बताकर लेने से इंकार कर दिया। बाद में कोषाध्यक्ष ने सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन भी सौंपा। 
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कोषाध्यक्ष चौहान का कहना है कि वह बृहस्पतिवार को कमेटी के आय-व्यय का लेखाजोखा लेकर सिटी मजिस्ट्रेट के पास गए थे। उन्होंने अपने पास उपलब्ध सभी दस्तावेज सिटी मजिस्ट्रेट को दिए गए, लेकिन सिटी मजिस्ट्रेट ने यह कहते हुए दस्तावेज लेने से इंकार कर दिया कि कमेटी द्वारा अन्य लोगों को बांटी गई रसीद बुकें और किताबें भी लेकर आएं, तभी मामले की जांच की जाएगी।
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उन्होंने कहा कि वह पिछले नौ महीने से अन्य लोगों को दी गई रसीद बुकें  मांग रहे हैं, लेकिन किसी ने अब तक रसीद बुकें नहीं सौंपी हैं। ऐसी स्थिति में पूरा हिसाब सिटी मजिस्ट्रेट को देना संभव नहीं है। कोषाध्यक्ष ने कहा है कि दीपावली मेले का टेंडर अध्यक्ष लीला कांडपाल द्वारा कार्यकारिणी को विश्वास में लिए बगैर मनमाने तरीके से किया गया और दुकानें मनचाहे तौर पर आवंटित कर दी गईं। इसकी शिकायत महामंत्री और कोषाध्यक्ष द्वारा मौखिक रूप से सिटी मजिस्ट्रेट से की गई थी। बड़ी राजनीतिक हस्ती का संरक्षण होने के कारण अध्यक्ष के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। 
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पाई-पाई का हिसाब दिए बगैर नहीं लूंगा दस्तावेज 
सिटी मजिस्ट्रेट हरबीर सिंह ने कहा कि रामलीला कमेटी के कोषाध्यक्ष मनोज चौहान आधा-अधूरा ब्यौरा लेकर आए थे, जिसे लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कोषाध्यक्ष को नोटिस जारी कर पांच अगस्त तक आय का पूरा ब्योरा देने के निर्देश दिए हैं। कमेटी के आयव्यय में हुई अनियमितता की जांच के लिए पाई-पाई का हिसाब मांगा गया है। पूरा हिसाब दिए बगैर जांच संभव नहीं है। 
 
पांडे का अनशन जारी, अमित स्वस्थ 

हल्द्वानी। श्री रामलीला कमेटी में गबन के खुलासे की मांग को लेकर चल रहे अनिश्चितकालीन आमरण अनशन के पांचवें दिन प्रकाश पांडे का आमरण अनशन दूसरे दिन भी जारी रहा। उधर, बेस अस्पताल में भर्ती अमित कबडवाल के स्वास्थ्य में सुधार है। 


कमेटी महामंत्री अमित कबडवाल ने लाखों रुपये गबन का आरोप लगाया है। गबन के खुलासे की मांग को लेकर महामंत्री ने अनिश्चितकालीन आमरण अनशन का आंदोलन शुरू किया है। महामंत्री को बुधवार को पुलिस एवं प्रशासन ने चौथे दिन अनशन स्थल से जबरन उठाकर बेस अस्पताल में भर्ती कराया।

 

अमित की जगह प्रकाश पांडे बुधवार को आमरण अनशन पर बैठ गए। पांडे का अनशन बृहस्पतिवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। समर्थन में कई लोग आमरण अनशन स्थल पहुंचे। बेस अस्पताल में भर्ती अमित के स्वास्थ्य में सुधार है। अमित के मुताबिक गबन का खुलासा नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा। अमित ने आरोप लगाया कि प्रशासन उनके आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रहा है। 

पर उपदेश कुशल बहुतेरे, रामराज्य या वर्चस्व की लड़ाई
हल्द्वानी। रामलीला कमेटी की राम के आदर्शों में आस्था कम और वर्चस्व की लड़ाई सदस्यों पर ज्यादा हावी हो गई है। आज भले ही कमेटी में वित्तीय गबन का आरोप लगाकर राम के आदर्शों को स्थापित करने का बहाना बनाकर अनशन किया जा रहा हो, लेकिन शहर की 130 साल से भी अधिक पुरानी कमेटी अक्सर विवादों में रही है। वित्तीय गड़बड़ी का यह पहला मामला नहीं है।

इससे पूर्व गठित की गई कमेटी में भी वित्तीय गड़बड़ी का मामला इतना अधिक गरमाया था कि रामलीला मंचन के दौरान कमेटी के कुछ सदस्य खुद को पाकसाफ बताने का प्रयास करने के लिए दर्शकों को पत्रक वितरित करते देखे गए। कमेटी में वित्तीय अनियमितता और चुनाव दोनों ही अक्सर विवादों में रहते हैं। 

वित्तीय अनियमितता या कमेटी की संपत्ति का मामला हो, यह आज तक नहीं निपट सका है। पूर्व में कमेटी के पास श्रीराम परिवार के लिए चांदी के धनुष मंगाए गए थे। उन धनुषों को कौन उड़ा ले गया, इसका आज तक पता नहीं चल पाया है। इसके अलावा कमेटी की अचल संपत्ति पर कौन लोग काबिज हैं, उन लोगों से कमेटी को कितनी आय होती है, इसका भी कमेटी के पास कोई हिसाब-किताब नहीं है।



यहां कमेटी के धन के गबन के बहाने कमेटी के आसन्न चुनावों को देखते हुए अपनी जमीन तैयार करने की भूमिका बनाई जा रही है। अगर ऐसा नहीं होता तो जो महामंत्री आज अनशन पर बैठे हैं, उन्हें ही कोषाध्यक्ष के पास कमेटी का पैसा जमा कराने का अधिकार है और उससे उसका लेखाजोखा लेने का भी अधिकार है। जब महामंत्री को इतने व्यापक अधिकार वित्तीय मामलों में हैं तो कमेटी चुनाव नजदीक आते ही यह नौबत क्यों आई। इससे पहले इस गंभीर मसले पर कमेटी ने एक्शन क्यों नहीं लिया। यह सभी सवाल कमेटी के चुनावों की ओर इशारा कर रहे हैं जो राजनीति प्रेरित हैं और इसके पीछे बड़ी राजनीतिक हस्तियों का हाथ है। 

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