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टनकपुर से उल्टी दौड़ी पूर्णागिरि जनशताब्दी एक्सप्रेस

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 18 Mar 2021 12:11 AM IST
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Purnagiri Jan Shatabdi Express ran from Tanakpur
टनकपुर (चंपावत)। दिल्ली से यात्रियों को लेकर टनकपुर पहुंची पूर्णागिरि जनशताब्दी एक्सप्रेस अचानक उल्टी दौड़ पड़ी। घटना का पता चलते ही रेलवे विभाग में हड़कंप मच गया। आननफानन अलर्ट जारी करते हुए टनकपुर से खटीमा तक फाटकों को बंद कराया गया। करीब 24 किमी उल्टी दौड़ी ट्रेन को खटीमा से पहले लालकोठी के पास किसी तरह रोका गया। इस दौरान यात्रियों की जान हलक में आ गई थी।
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ट्रेन में घटना के वक्त सवार सभी यात्री सुरक्षित हैं और उन्हें सड़क मार्ग से गंतव्य को भेज दिया गया। घटना की जांच के लिए जेए ग्रेड के तीन अधिकारियों की कमेटी गठित की गई है। बताया गया कि टनकपुर स्टेशन से एक किमी पहले होम सिग्नल के पास गाय के ट्रेन की चपेट में आने के बाद ट्रेन रुकी और अचानक पीछे की ओर दौड़ने लगी। इसके बाद सवारियों और रेलवे विभाग में हड़कंप मच गया। रेलवे के इज्जतनगर मंडल के पीआरओ राजेंद्र सिंह ने बताया कि घटना के वक्त ट्रेन में कितने यात्री थे इसका अभी सही सही पता नहीं चल पाया है। हालांकि, सभी यात्री सुरक्षित हैं।
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बुधवार को दिल्ली से पूर्णागिरि जनशताब्दी एक्सप्रेस (505326) शाम करीब चार बजे यात्रियों को लेकर टनकपुर आ रही थी कि स्टेशन से एक किमी पहले होम सिग्नल के पास एक गाय के चपेट में आने से ट्रेन रुक गई और कुछ क्षण बाद ट्रेन अचानक उल्टी दौड़ने लगी। लोको पायलट ने तुरंत इसकी सूचना दी तो रेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। सुरक्षा के दृष्टिगत हाई अलर्ट जारी करते हुए टनकपुर से खटीमा तक के सभी रेलवे क्रॉसिंग फाटकों को बंद कराया गया। टनकपुर से सात किमी दूर बनबसा स्टेशन पर ट्रेक पर पत्थर डालकर ट्रेन रोकने की कोशिश की गई, लेकिन ट्रेन पत्थरों को तोड़ती हुई आगे बढ़ गई। इससे पहले कि कोई बड़ा हादसा होता चकरपुर-खटीमा के बीच गेट संख्या 35 सी पर लाइन पर मिट्टी और बजरी डालकर किसी तरह ट्रेन को रोका गया।
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इज्जतनगर मंडल के पीआरओ राजेंद्र सिंह ने बताया कि रेल प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं। जांच में दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पीआरओ ने बताया कि ट्रेन में सवार सभी यात्री सुरक्षित हैं।
चार साल पहले भी बगैर इंजन दौड़े थे मालगाड़ी के डिब्बे
टनकपुर (चंपावत)। करीब चार साल पहले भी टनकपुर से बगैैर इंजन मालगाड़ी के आठ डिब्बे अचानक दौड़ पड़े थे। तब भी बड़ा हादसा होने से बचा था। बगैर इंजन दौड़े मालगाड़ी के इन डिब्बों को खटीमा में छह लाइनें लदी डिपट्राली को ट्रेक में अवरोधक बनाकर रोका गया था। इस घटना में भी बनबसा के पास मालगाड़ी के डिब्बों की चपेट में आकर छह बकरियों की मौत हुई थी और चकरपुर में ट्रेक पर खड़े एक ट्रैक्टर को भी डिब्बे घसीटकर खटीमा तक ले गए थे।

यह वाकया वर्ष 2017 का है, जब पीलीभीत से टनकपुर तक बड़ी रेल लाइन बिछाने का काम चल रहा था। गिट्टी ले जाने के लिए टनकपुर स्टेशन में मालगाड़ी के आठ डिब्बे बगैर इंजन खड़े थे। जेसीबी मशीन से इन डिब्बों में गिट्टी लादी जा रही थी कि जेसीबी से लगे धक्के से मालगाड़ी के ये डिब्बे अचानक ट्रेक पर दौड़ पड़े। इससे रेल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए थे। टनकपुर से बनबसा तक इन डिब्बों को रोकने का भरसक प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली थी। इसके बाद बनबसा स्टेशन से आगे बढ़ चुके डिब्बों को रोकने के लिए चकरपुर के पास लाइन पर एक ट्रैक्टर खड़ा किया गया, लेकिन तेज रफ्तार ये डिब्बे ट्रैक्टर को भी अपने साथ घसीट ले गए। तब तक खटीमा स्टेशन पर अवरोधक बना दिया गया था और इन डिपट्रॉलियों से टकराने के बाद ही डिब्बों को रोकने में सफलता मिल पाई थी। (संवाद)
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