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रिश्वतखोरी मामले में प्रधानाचार्य को पांच वर्ष कारावास की सजा
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नैनीताल। जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम राजीव कुमार खुल्बे ने 15 हजार की रिश्वत लेने का दोषी पाते हुए प्रधानाचार्य को पांच साल का कारावास और दस हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं चुकाने पर प्रधानाचार्य को तीन माह अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
फरवरी 2015 में राजकीय इंटर कॉलेज महुवाडाबरा (जसपुर) में कार्यरत सहायक अध्यापक (एलटी) गनपत सिंह पुत्र बलराम सिंह निवासी श्यामनगर जसपुर ने विजिलेंस से शिकायत की थी कि विभाग को उसका ढाई लाख वेतन-एरियर का भुगतान करना है। कई बार वह आहरण वितरण अधिकारी प्रधानाचार्य ऋषिपाल रवि से लंबित देयकों का भुगतान कराने की मांग कर चुका है, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। रिपोर्टकर्ता की शिकायत थी कि आहरण वितरण अधिकारी प्रधानाचार्य ऋषिपाल ने उससे लंबित भुगतान के एवज में 15 हजार रिश्वत की मांग की है।
शिकायती पत्र पर 10 फरवरी 2015 को पुलिस अधीक्षक सतर्कता अधिष्ठान हल्द्वानी ने निरीक्षक डीआर आर्या को जांच के निर्देश दिए। 12 फरवरी 2015 को विजिलेंस की ट्रैप टीम ने प्रधानाचार्य ऋषिपाल रवि निवासी विजय नगर मानपुर रोड काशीपुर को सहायक अध्यापक गनपत सिंह से दस हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों धर लिया।
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बृहस्पतिवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के न्यायालय में दोष साबित करने के मामले में बहस हुई। इस दौरान अभियोजन पक्ष से मामले की पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक डीएस जंगपांगी ने सात गवाह पेश किए। अभियोजन पक्ष की दलीलों और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने प्रधानाचार्य ऋषिपाल रवि को रिश्वत लेने का दोषी मानते हुए धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत पांच वर्ष कारावास, दस हजार जुर्माना और जुर्माना न देने पर तीन माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। साथ ही धारा 13 (1) डी-सपठित 13 (2) के तहत भी पांच वर्ष कारावास, दस हजार जुर्माना और जुर्माना ने देने पर तीन माह अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई।
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फरवरी 2015 में राजकीय इंटर कॉलेज महुवाडाबरा (जसपुर) में कार्यरत सहायक अध्यापक (एलटी) गनपत सिंह पुत्र बलराम सिंह निवासी श्यामनगर जसपुर ने विजिलेंस से शिकायत की थी कि विभाग को उसका ढाई लाख वेतन-एरियर का भुगतान करना है। कई बार वह आहरण वितरण अधिकारी प्रधानाचार्य ऋषिपाल रवि से लंबित देयकों का भुगतान कराने की मांग कर चुका है, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। रिपोर्टकर्ता की शिकायत थी कि आहरण वितरण अधिकारी प्रधानाचार्य ऋषिपाल ने उससे लंबित भुगतान के एवज में 15 हजार रिश्वत की मांग की है।
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शिकायती पत्र पर 10 फरवरी 2015 को पुलिस अधीक्षक सतर्कता अधिष्ठान हल्द्वानी ने निरीक्षक डीआर आर्या को जांच के निर्देश दिए। 12 फरवरी 2015 को विजिलेंस की ट्रैप टीम ने प्रधानाचार्य ऋषिपाल रवि निवासी विजय नगर मानपुर रोड काशीपुर को सहायक अध्यापक गनपत सिंह से दस हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों धर लिया।
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बृहस्पतिवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के न्यायालय में दोष साबित करने के मामले में बहस हुई। इस दौरान अभियोजन पक्ष से मामले की पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक डीएस जंगपांगी ने सात गवाह पेश किए। अभियोजन पक्ष की दलीलों और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने प्रधानाचार्य ऋषिपाल रवि को रिश्वत लेने का दोषी मानते हुए धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत पांच वर्ष कारावास, दस हजार जुर्माना और जुर्माना न देने पर तीन माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। साथ ही धारा 13 (1) डी-सपठित 13 (2) के तहत भी पांच वर्ष कारावास, दस हजार जुर्माना और जुर्माना ने देने पर तीन माह अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई।