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Nainital News: कागज में योजना, लागत हो गई दोगुना

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 30 Dec 2022 11:47 PM IST
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Plan on paper, cost doubled
हल्द्वानी। जमरानी पेयजल योजना फिलहाल कागजों से आगे तो नहीं बढ़ सकी है लेकिन लागत जरूर बढ़ गई है। अब फिर परियोजना की संशोधित डीपीआर बनाई गई है। उससे दो साल में योजना की लागत दोगुना बढ़ गई है। अफसरों के मुताबिक, योजना को और बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव किए गए हैं, वहीं निर्माण सामग्री की दरों में वृद्धि से भी लागत में बढ़ोतरी हुई है।
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हल्द्वानी को पेयजल समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रस्तावित जमरानी बांध से पानी लाने की योजना है। हल्द्वानी की 30 साल की संभावित आबादी को ध्यान में रखते हुए जमरानी पेयजल योजना बनाई जा रही है। नवंबर 2020 में डीपीआर शासन को भेजी गई थी। तब लागत 355.50 करोड़ थी। यह योजना जमरानी बांध परियोजना का हिस्सा थी। एशियन डेवलपमेंट बैंक की ओर से योजना के लिए धनराशि मिलनी थी। जमरानी बांध परियोजना को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से मंजूरी मिलने के बाद पेयजल निगम ने संशोधित डीपीआर तैयार की गई। अब इसकी लागत 704 करोड़ पहुंच गई है। इस योजना के जरिये हल्द्वानी को प्रतिदिन 117 मिलियन लीटर पानी मिलेगा। इसमें से चार एमएलडी पानी शीतलाहाट पेयजल योजना में दिया जाएगा।
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लागत दोगुनी होने की वजह
- सामग्री की दरों में 50 फीसदी तक वृद्धि
- अमृतपुर में सुरक्षात्मक कार्यों का प्रावधान
- ओवरहेड टैंकों की क्षमता में वृद्धि
- वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता में वृद्धि
- 16 किलोमीटर लंबी दो समानांतर पेयजल लाइन डाली जाएंगी
- पांच वर्ष तक योजना का संचालन और रखरखाव शामिल
- पानी की जोनवाइज व्यवस्था में परिवर्तन
- तीन साल तक महंगाई दर को देखते हुए लागत निर्धारित
- जीएसटी 12 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत पहुंचा
आईआईटी विशेषज्ञों और भू-वैज्ञानिकों ने दिए सुझाव
हल्द्वानी। पेयजल निगम के अधिशासी अभियंता एके कटारिया ने बताया कि आईआईटी के विशेषज्ञों और भू-वैज्ञानिकों की टीम ने प्रस्तावित स्थल का दौरा करते हुए विभिन्न तकनीकी सुझाव दिए थे। विशेषज्ञों से मिले सुझावों का समावेश करते हुए नई डीपीआर में तकनीकी बदलाव किए गए हैं। भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए अमृतपुर में सुरक्षात्मक कार्य किए जाने हैं। नए प्रस्ताव के तहत अमृतपुर से हल्द्वानी तक 16 किलोमीटर लंबी दो समानांतर मुख्य पाइपलाइनें बिछाई जानी हैं। किसी एक के खराब होने की स्थिति में दूसरी लाइन से पेयजल आपूर्ति सुचारू रहेगी। अधिशासी अभियंता एके कटारिया ने बताया कि योजना की लागत बढ़ने की मुख्य वजह यह है कि पांच साल तक इसके रखरखाव का जिम्मा ठेकेदार के पास होगा। योजना तीन वर्ष में पूर्ण होनी प्रस्तावित है। आगामी तीन वर्षों की महंगाई दर के हिसाब से प्रस्ताव तैयार किया गया है।
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तीन वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनेंगे
हल्द्वानी। जमरानी पेयजल योजना के तहत ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता में बढ़ोतरी की गई है। नये प्रस्ताव के मुताबिक, दमुवाढूंगा में 102 एमएलडी, शीशमहल में 30 एमएलडी और शीतलाहाट में 6.5 एमएलडी का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तैयार किया जाएगा।
जोनवाइज होगी पानी की आपूर्ति
हल्द्वानी। जमरानी पेयजल योजना से जोनवाइज पानी की व्यवस्था की जाएगी। किसी एक जोन में सप्लाई बाधित होने से अन्य दूसरे जोन में आपूर्ति सुचारू रहेगी। विभाग के अनुसार उत्तराखंड अर्बन सेक्टर डेवलपमेंट एजेंसी से समन्वय करते हुए जोनिंग एरिया में बदलाव किया गया है। शीतलाहाट जोन, शीशमहल जोन, नैनीताल रोड जोन, रामपुर रोड जोन, लाल डांट जोन, ऊंचापुल जोन, हल्दीखाल जोन, गौला फीडिंग जोन में बांटा गया है।
हल्द्वानी को पेयजल समस्या से मिलेगी निजात
हल्द्वानी शहर की जनता का गला तर करने के लिए 80 एमएलडी पानी की जरूरत है। मगर सभी पेयजल योजनाओं और नलकूपों से मात्र 70 एमएलडी पानी ही मिल पाता है। इस कारण शहर में पानी की समस्या लगातार बनी हुई है। जमरानी पेयजल योजना अगर बनती है तो हल्द्वानी की जनता को पेयजल संकट से निजात मिलने की उम्मीद है।
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आईआईटी विशेषज्ञों और भू-वैज्ञानिकों से मिले सुझावों के आधार पर जमरानी पेयजल योजना की डीपीआर में तकनीकी बदलाव किए गए हैं। संसोधित डीपीआर तैयार कर परीक्षण के लिए आईआईटी रुढ़की भेजा गया है। योजना की संसोधित लागत 704 करोड़ है। तकनीकी स्वीकृति मिलने के बाद संसोधित प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।

एके कटारिया, अधिशासी अभियंता, पेयजल निगम।
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जितना भी खर्च आएगा, दिलाएंगे
शहर की पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए 835 करोड़ की धनराशि खर्च की जाएगी। सभी विभागों से आपसी समन्वय बनाने के लिए कहा गया है जो आवश्यक है उसे बनाया जाएगा। 30 साल की आबादी को ध्यान में रखते हुए पेयजल व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए जितने भी बजट की जरूरत होगी उसकी स्वीकृति कराने के लिए पूरे प्रयास किए जाएंगे।
-अजय भट्ट, केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री।
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