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Nainital News: जन को योजनाओं के पूरा होने का इंतजार, तंत्र चल रहा अपनी चाल
Fri, 26 Jan 2024 03:14 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Fri, 26 Jan 2024 03:14 AM IST
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हल्द्वानी। जिले में सिंचाई, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाओं का खाका खींचा गया है, लेकिन आज भी इनके धरातल पर उतरने का इंतजार ही हो रहा है। सत्तर के दशक में बनी जमरानी बांध की अभी तक पूरी नहीं हो सकी। करीब 18 साल पहले सार्वजनिक परिवहन की सेवा को बेहतर करने के लिए आईएसबीटी की योजना बनी, वह भी अधर में है। इसके बाद एक और आईएसबीटी या हिल डिपो की योजना बनी, यह भी कागजों में ही सफर बन रही है। वाहनों के दबाव से निपटने को वर्ष-2017 में रिंग रोड की योजना बनी थी, जो सात साल से विभागों के चक्कर काट रही है।
अभी कागजों में है बांध, अगले महीने टेंडर होने का अनुमान
जमरानी बांध परियोजना का शिलान्यास फरवरी 1976 को किया गया था। इसके बाद से योजना के पूरी नहीं, बल्कि शुरू होने का ही इंतजार हो रहा है। पिछले साल वन भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया पूरी हुई। बीती 25 अक्तूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (सीआईईए) ने पीएमकेएसवाई एआईबीपी के तहत जमरानी को शामिल करने की स्वीकृति मिल चुकी है। पर धरातल पर काम शुरू होने से पहले कई कागजी चक्र से गुजरना है। फिलहाल उम्मीद की जा रही है कि अगले महीने परियोजना के टेंडर जारी होंगे।
फाइलों में चक्कर काट रही रिंग रोड की योजना
हल्द्वानी। वर्ष-2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने हल्द्वानी में वाहनों का दबाव कम करने के लिए लोनिवि ने गन्ना सेंटर-कमलुवागांजा-फतेहपुर-गुलाबघाटी तक रिंग रोड (51 किमी) बनायी। उस समय योजना की लागत 400 करोड़ आंकी गई, जो पूरी न हो सकी। इसी बीच तीन बार संशोधित डीपीआर जरूर बनी। इसमें लागत 1200 करोड़ तक पहुंच गई। इस योजना को लेकर केवल फाइल चल रही है। लोनिवि के अधिशासी अभियंता अशोक चौधरी का कहना है कि शासन को दिसंबर-2023 को 1200 करोड़ की संशोधित डीपीआर भेजी गई है। वहीं, रामपुर-काठगोदाम फेरलेन योजना अभी तक पूरी नहीं हो सकी है, योजना को 2019 में पूरा होने का लक्ष्य रखा गया था।
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स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में पेड़ों के कटान का मामला फंसा
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सहयोग से स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट की योजना भी नियमों के फेर में फंसी हुई है। पहले अवैध कब्जे को रेगुलर किया गया, इसके बाद वन भूमि हस्तांतरण और पेड़ों के कटान का मामला चल रहा है। इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से लेकर शासन और निदेशालय तक के अधिकारी दौरा कर चुके हैं पर आश्वासन ही मिला है। स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. केसी पांडे का कहना है कि मंत्रालय से अनुमति प्राप्त करने के लिए हरसंभव कदम उठाये गए हैं।
दो आईएसबीटी की योजना, धरातल पर एक भी नहीं
सावर्जनिक परिवहन सेवा को बेहतर करने और बस अड्डे दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए पहले गौलापार में आईएसबीटी की योजना बनी। पर वर्ष- 2017 में शासन ने गौलापार में चयनित स्थल की जगह दूसरी जगह पर आईएसबीटी बनाने का फैसला किया। अब यह मामला कोर्ट में विचाराधीन हो गया है। इस बीच काठगोदाम में दूसरा आईएसबीटी बनाने की योजना बना ली गई, जहां से मुख्य रूप से पर्वतीय रूट पर सेवाएं संचालित की जा सकें। इसके लिए शुरुआती राशि की घोषणा भी हो गई है, अभी काठगोदाम डिपो के दस आवासीय परिसर खाली करने का नोटिस दिया गया है। एआरएम काठगोदाम कार्यालय के लिए भवन की तलाश हो रही है। पर अभी योजना धरातल पर उतरने के लिए इंतजार की स्थिति है। इस संबंध में सचिव परिवहन अरविंद ह्यांकी से योजना के संंबंध में पक्ष लेने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हुआ।
गौलापार महाविद्यालय: अभी वन भूमि का चल रहा प्रस्ताव
गौलापार में डिग्री काॅलेज खोला गया, जो कमरों में संचालित हो रहा है। नए डिग्री कॉलेज के लिए चार एकड़ वन भूमि की जरूरत है। इसके लिए शिक्षा विभाग की तरफ से प्रस्ताव भेजा गया है। पिछले दिनों वन भूमि प्रस्ताव में कुछ आपत्तियां आई थीं, जिसका निराकरण किया गया। गौलापार डिग्री काॅलेज के प्राचार्य प्रो. संजय कुमार का कहना है कि वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही है, इसके अलावा उच्च शिक्षा मंत्री ने भवन निर्माण के लिए पांच करोड़ की राशि दी हुई है। वन भूमि मिलने के बाद और राशि मिलेगी।
रक्षा एवं पर्यटन राज्यमंत्री अजय भट्ट ने बताया सभी योजनाओं में प्रगति है। कुछ योजनाओं में अड़चन भी आयी है तो उन्हें दूर किया जा रहा है। आज जो बीज बो रहे हैं, निकट भविष्य में उसका फल जरूर मिलेगा।
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अभी कागजों में है बांध, अगले महीने टेंडर होने का अनुमान
जमरानी बांध परियोजना का शिलान्यास फरवरी 1976 को किया गया था। इसके बाद से योजना के पूरी नहीं, बल्कि शुरू होने का ही इंतजार हो रहा है। पिछले साल वन भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया पूरी हुई। बीती 25 अक्तूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (सीआईईए) ने पीएमकेएसवाई एआईबीपी के तहत जमरानी को शामिल करने की स्वीकृति मिल चुकी है। पर धरातल पर काम शुरू होने से पहले कई कागजी चक्र से गुजरना है। फिलहाल उम्मीद की जा रही है कि अगले महीने परियोजना के टेंडर जारी होंगे।
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फाइलों में चक्कर काट रही रिंग रोड की योजना
हल्द्वानी। वर्ष-2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने हल्द्वानी में वाहनों का दबाव कम करने के लिए लोनिवि ने गन्ना सेंटर-कमलुवागांजा-फतेहपुर-गुलाबघाटी तक रिंग रोड (51 किमी) बनायी। उस समय योजना की लागत 400 करोड़ आंकी गई, जो पूरी न हो सकी। इसी बीच तीन बार संशोधित डीपीआर जरूर बनी। इसमें लागत 1200 करोड़ तक पहुंच गई। इस योजना को लेकर केवल फाइल चल रही है। लोनिवि के अधिशासी अभियंता अशोक चौधरी का कहना है कि शासन को दिसंबर-2023 को 1200 करोड़ की संशोधित डीपीआर भेजी गई है। वहीं, रामपुर-काठगोदाम फेरलेन योजना अभी तक पूरी नहीं हो सकी है, योजना को 2019 में पूरा होने का लक्ष्य रखा गया था।
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स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में पेड़ों के कटान का मामला फंसा
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सहयोग से स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट की योजना भी नियमों के फेर में फंसी हुई है। पहले अवैध कब्जे को रेगुलर किया गया, इसके बाद वन भूमि हस्तांतरण और पेड़ों के कटान का मामला चल रहा है। इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से लेकर शासन और निदेशालय तक के अधिकारी दौरा कर चुके हैं पर आश्वासन ही मिला है। स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. केसी पांडे का कहना है कि मंत्रालय से अनुमति प्राप्त करने के लिए हरसंभव कदम उठाये गए हैं।
दो आईएसबीटी की योजना, धरातल पर एक भी नहीं
सावर्जनिक परिवहन सेवा को बेहतर करने और बस अड्डे दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए पहले गौलापार में आईएसबीटी की योजना बनी। पर वर्ष- 2017 में शासन ने गौलापार में चयनित स्थल की जगह दूसरी जगह पर आईएसबीटी बनाने का फैसला किया। अब यह मामला कोर्ट में विचाराधीन हो गया है। इस बीच काठगोदाम में दूसरा आईएसबीटी बनाने की योजना बना ली गई, जहां से मुख्य रूप से पर्वतीय रूट पर सेवाएं संचालित की जा सकें। इसके लिए शुरुआती राशि की घोषणा भी हो गई है, अभी काठगोदाम डिपो के दस आवासीय परिसर खाली करने का नोटिस दिया गया है। एआरएम काठगोदाम कार्यालय के लिए भवन की तलाश हो रही है। पर अभी योजना धरातल पर उतरने के लिए इंतजार की स्थिति है। इस संबंध में सचिव परिवहन अरविंद ह्यांकी से योजना के संंबंध में पक्ष लेने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हुआ।
गौलापार महाविद्यालय: अभी वन भूमि का चल रहा प्रस्ताव
गौलापार में डिग्री काॅलेज खोला गया, जो कमरों में संचालित हो रहा है। नए डिग्री कॉलेज के लिए चार एकड़ वन भूमि की जरूरत है। इसके लिए शिक्षा विभाग की तरफ से प्रस्ताव भेजा गया है। पिछले दिनों वन भूमि प्रस्ताव में कुछ आपत्तियां आई थीं, जिसका निराकरण किया गया। गौलापार डिग्री काॅलेज के प्राचार्य प्रो. संजय कुमार का कहना है कि वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही है, इसके अलावा उच्च शिक्षा मंत्री ने भवन निर्माण के लिए पांच करोड़ की राशि दी हुई है। वन भूमि मिलने के बाद और राशि मिलेगी।
रक्षा एवं पर्यटन राज्यमंत्री अजय भट्ट ने बताया सभी योजनाओं में प्रगति है। कुछ योजनाओं में अड़चन भी आयी है तो उन्हें दूर किया जा रहा है। आज जो बीज बो रहे हैं, निकट भविष्य में उसका फल जरूर मिलेगा।