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Nainital News: एसटीएच में मरीजों के ऑपरेशन टले, बिना इलाज लौटने को मजबूर
Sat, 12 Sep 2026 01:17 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Sat, 12 Sep 2026 01:17 AM IST
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हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल (एसटीएच) में इंटर्न और पीजी डॉक्टरों की हड़ताल का सीधा खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ा। इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचे मरीज ऑपरेशन की तारीख मिलने के बावजूद बगैर सर्जरी लौटने के लिए मजबूर हैं। सहयोगी डॉक्टरों की कमी के चलते वरिष्ठ चिकित्सकों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। अगले सप्ताह तक निर्धारित करीब 15 ऑपरेशन टाल दिए गए हैं।
वार्डों में भर्ती मरीज और उनके तीमारदार दिनभर ऑपरेशन होने की उम्मीद में इंतजार कर रहे हैं लेकिन हड़ताल के चलते उनकी तारीख लगातार आगे बढ़ाई जा रही है। कई मरीजों के ऑपरेशन दूसरी बार टाले जा चुके हैं। इससे अस्पताल में भर्ती मरीजों की परेशानी बढ़ती जा रही है।
केस 01 : कौसानी निवासी चंदन सिंह की किडनी में ट्यूमर है। शुक्रवार को उनका ऑपरेशन होना था लेकिन हड़ताल के कारण सर्जरी नहीं हो सकी। चंदन के मुताबिक उनका ऑपरेशन पहले भी दो बार रोका जा चुका है। अब उन्हें यह भी पता नहीं कि अगली तारीख कब मिलेगी।
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केस 02 : हल्द्वानी निवासी रेहान की किडनी में पथरी है। बृहस्पतिवार को ऑपरेशन होना था लेकिन उसे रद्द कर शुक्रवार की तारीख दी गई। शुक्रवार को भी सर्जरी नहीं हो सकी। उन्हें बताया गया कि डॉक्टरों की हड़ताल खत्म होने तक ऑपरेशन कर पाना मुश्किल है।
केस 03 : काठगोदाम निवासी सुधीर कर्नाटक को ऑपरेशन के लिए सोमवार को अस्पताल में भर्ती किया गया था। हड़ताल के चलते बिना ऑपरेशन किए ही उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। अब उन्हें दोबारा ऑपरेशन की तारीख दी जाएगी।
पीजी डॉक्टरों की हड़ताल से मुख्य रूप से इलेक्टिव यानी पहले से निर्धारित ऑपरेशन प्रभावित हो रहे हैं। इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर सेवाएं प्रभावित नहीं हैं। - प्रो. अजय आर्या, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी
स्टाइपेंड बढ़ा तो इंटर्न लौटे, पीजी डॉक्टर अब भी अड़े
इंटर्न डॉक्टरों के लिए सरकार की ओर से स्टाइपेंड 17 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये किए जाने के बाद शुक्रवार दोपहर दो बजे के बाद इंटर्न काम पर लौट आए। उन्होंने प्राचार्य से मुलाकात कर सरकार के फैसले पर आभार जताया लेकिन पीजी डॉक्टरों का आंदोलन जारी है। शुक्रवार को भी इसका असर अस्पताल की ओपीडी पर दिखाई दिया। व्यवस्था संभालने के लिए पीजी थर्ड ईयर के डॉक्टरों को वरिष्ठ चिकित्सकों के साथ ओपीडी में लगाया गया।
ऑर्थो वार्ड में पीजी डॉक्टरों की अनुपस्थिति रही जहां करीब 35 मरीज भर्ती हैं। यहां एसआर ने मरीजों को देखा। नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में भी पीजी डॉक्टर नहीं पहुंचे। मेडिसिन विभाग में पीजी थर्ड ईयर और एसआर ने जिम्मेदारी संभाली। ईएनटी में दो एसआर और करीब आठ पीजी डॉक्टर ड्यूटी पर रहे। बाल रोग और सर्जरी के महिला वार्ड में भी पीजी थर्ड ईयर के डॉक्टरों ने मोर्चा संभाला।
25 हजार स्टाइपेंड के बाद भी उत्तराखंड पीछे
सरकार ने इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया है लेकिन अन्य राज्यों की तुलना में उत्तराखंड अब भी पीछे है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक ओडिशा में इंटर्न को करीब 28,050 से 44,319 रुपये, असम में 36 हजार, कर्नाटक में 30 हजार, तेलंगाना में 29 से 30 हजार, तमिलनाडु में 27,315 और बिहार में 27 हजार रुपये तक मासिक स्टाइपेंड मिल रहा है। यानी बढ़ोतरी के बावजूद उत्तराखंड के इंटर्न का स्टाइपेंड कई राज्यों से कम है।
अब रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी बढ़ाया दबाव
इंटर्न के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी के बाद अब रेजिडेंट डॉक्टरों का आंदोलन और तेज होने के संकेत हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के रेजिडेंट डॉक्टरों ने शनिवार से उत्तराखंड के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ओपीडी सेवाएं वापस लेने का ऐलान किया है। हल्द्वानी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राजदीप बिंद्रा के अनुसार रेजिडेंट डॉक्टरों को करीब 62 हजार रुपये मासिक स्टाइपेंड मिल रहा है और करीब एक दशक से इसमें कोई सार्थक संशोधन नहीं हुआ है। उनका कहना है कि सरकार ने इंटर्न के स्टाइपेंड पर फैसला तो लिया लेकिन रेजिडेंट डॉक्टरों की मांग को नजरअंदाज कर दिया। रेजिडेंट डॉक्टरों ने स्वास्थ्य विभाग और सरकार से तत्काल स्टाइपेंड संशोधित करने की मांग की है। हालांकि आंदोलन के दौरान इमरजेंसी, आईसीयू और लेबर रूम जैसी आवश्यक सेवाएं जारी रखने की बात कही गई है।
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वार्डों में भर्ती मरीज और उनके तीमारदार दिनभर ऑपरेशन होने की उम्मीद में इंतजार कर रहे हैं लेकिन हड़ताल के चलते उनकी तारीख लगातार आगे बढ़ाई जा रही है। कई मरीजों के ऑपरेशन दूसरी बार टाले जा चुके हैं। इससे अस्पताल में भर्ती मरीजों की परेशानी बढ़ती जा रही है।
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केस 01 : कौसानी निवासी चंदन सिंह की किडनी में ट्यूमर है। शुक्रवार को उनका ऑपरेशन होना था लेकिन हड़ताल के कारण सर्जरी नहीं हो सकी। चंदन के मुताबिक उनका ऑपरेशन पहले भी दो बार रोका जा चुका है। अब उन्हें यह भी पता नहीं कि अगली तारीख कब मिलेगी।
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केस 02 : हल्द्वानी निवासी रेहान की किडनी में पथरी है। बृहस्पतिवार को ऑपरेशन होना था लेकिन उसे रद्द कर शुक्रवार की तारीख दी गई। शुक्रवार को भी सर्जरी नहीं हो सकी। उन्हें बताया गया कि डॉक्टरों की हड़ताल खत्म होने तक ऑपरेशन कर पाना मुश्किल है।
केस 03 : काठगोदाम निवासी सुधीर कर्नाटक को ऑपरेशन के लिए सोमवार को अस्पताल में भर्ती किया गया था। हड़ताल के चलते बिना ऑपरेशन किए ही उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। अब उन्हें दोबारा ऑपरेशन की तारीख दी जाएगी।
पीजी डॉक्टरों की हड़ताल से मुख्य रूप से इलेक्टिव यानी पहले से निर्धारित ऑपरेशन प्रभावित हो रहे हैं। इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर सेवाएं प्रभावित नहीं हैं। - प्रो. अजय आर्या, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी
स्टाइपेंड बढ़ा तो इंटर्न लौटे, पीजी डॉक्टर अब भी अड़े
इंटर्न डॉक्टरों के लिए सरकार की ओर से स्टाइपेंड 17 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये किए जाने के बाद शुक्रवार दोपहर दो बजे के बाद इंटर्न काम पर लौट आए। उन्होंने प्राचार्य से मुलाकात कर सरकार के फैसले पर आभार जताया लेकिन पीजी डॉक्टरों का आंदोलन जारी है। शुक्रवार को भी इसका असर अस्पताल की ओपीडी पर दिखाई दिया। व्यवस्था संभालने के लिए पीजी थर्ड ईयर के डॉक्टरों को वरिष्ठ चिकित्सकों के साथ ओपीडी में लगाया गया।
ऑर्थो वार्ड में पीजी डॉक्टरों की अनुपस्थिति रही जहां करीब 35 मरीज भर्ती हैं। यहां एसआर ने मरीजों को देखा। नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में भी पीजी डॉक्टर नहीं पहुंचे। मेडिसिन विभाग में पीजी थर्ड ईयर और एसआर ने जिम्मेदारी संभाली। ईएनटी में दो एसआर और करीब आठ पीजी डॉक्टर ड्यूटी पर रहे। बाल रोग और सर्जरी के महिला वार्ड में भी पीजी थर्ड ईयर के डॉक्टरों ने मोर्चा संभाला।
25 हजार स्टाइपेंड के बाद भी उत्तराखंड पीछे
सरकार ने इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया है लेकिन अन्य राज्यों की तुलना में उत्तराखंड अब भी पीछे है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक ओडिशा में इंटर्न को करीब 28,050 से 44,319 रुपये, असम में 36 हजार, कर्नाटक में 30 हजार, तेलंगाना में 29 से 30 हजार, तमिलनाडु में 27,315 और बिहार में 27 हजार रुपये तक मासिक स्टाइपेंड मिल रहा है। यानी बढ़ोतरी के बावजूद उत्तराखंड के इंटर्न का स्टाइपेंड कई राज्यों से कम है।
अब रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी बढ़ाया दबाव
इंटर्न के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी के बाद अब रेजिडेंट डॉक्टरों का आंदोलन और तेज होने के संकेत हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के रेजिडेंट डॉक्टरों ने शनिवार से उत्तराखंड के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ओपीडी सेवाएं वापस लेने का ऐलान किया है। हल्द्वानी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राजदीप बिंद्रा के अनुसार रेजिडेंट डॉक्टरों को करीब 62 हजार रुपये मासिक स्टाइपेंड मिल रहा है और करीब एक दशक से इसमें कोई सार्थक संशोधन नहीं हुआ है। उनका कहना है कि सरकार ने इंटर्न के स्टाइपेंड पर फैसला तो लिया लेकिन रेजिडेंट डॉक्टरों की मांग को नजरअंदाज कर दिया। रेजिडेंट डॉक्टरों ने स्वास्थ्य विभाग और सरकार से तत्काल स्टाइपेंड संशोधित करने की मांग की है। हालांकि आंदोलन के दौरान इमरजेंसी, आईसीयू और लेबर रूम जैसी आवश्यक सेवाएं जारी रखने की बात कही गई है।