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याची को आदेश, बताएं कि हाईकोर्ट में और कितने जजों की जरूरत
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High court uttrakhand 2
नैनीताल। हाईकोर्ट में जजों की कमी के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को आदेश दिया है कि वह दो सप्ताह के भीतर प्रतिशपथपत्र दाखिल कर यह बताए कि हाईकोर्ट में कितने और जजों की आवश्यकता है और कितने वाद हाईकोर्ट में लंबित हैं।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। अधिवक्ता कमलेश कुमार तिवारी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि उत्तराखंड हाइकोर्ट में जजों की और नियुक्ति की जाए ताकि वादकारियों को समय पर न्याय मिल सके। याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट में जजों की कमी है। वादकारियों को समय पर न्याय नहीं मिल रहा है।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि हाईकोर्ट में प्रतिदिन वीकली लिस्ट को छोड़कर डेलीलिस्ट में साढ़े पांच सौ से अधिक मुकदमे लगते हैं लेकिन अधिक मुकदमे लगने के कारण मामलों में सुनवाई नहीं हो पा रही है। इसलिए और जजों की नियुक्ति की जाए। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को दो सप्ताह के भीतर प्रतिशपथपत्र दाखिल कर यह बताने के आदेश दिए कि हाईकोर्ट में और कितने जजों की आवश्यकता है। कितने वाद हाइकोर्ट में लंबित हैं।
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मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। अधिवक्ता कमलेश कुमार तिवारी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि उत्तराखंड हाइकोर्ट में जजों की और नियुक्ति की जाए ताकि वादकारियों को समय पर न्याय मिल सके। याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट में जजों की कमी है। वादकारियों को समय पर न्याय नहीं मिल रहा है।
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याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि हाईकोर्ट में प्रतिदिन वीकली लिस्ट को छोड़कर डेलीलिस्ट में साढ़े पांच सौ से अधिक मुकदमे लगते हैं लेकिन अधिक मुकदमे लगने के कारण मामलों में सुनवाई नहीं हो पा रही है। इसलिए और जजों की नियुक्ति की जाए। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को दो सप्ताह के भीतर प्रतिशपथपत्र दाखिल कर यह बताने के आदेश दिए कि हाईकोर्ट में और कितने जजों की आवश्यकता है। कितने वाद हाइकोर्ट में लंबित हैं।
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