नैनीताल। हाईकोर्ट ने गुरिल्ला यूनियन की ओर से विभिन्न मांगों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के बाद केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर जबाव दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। गुरिल्ला यूनियन के सचिव गरमपानी निवासी जितेंद्र सिंह बिष्ट ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा था कि केंद्र सरकार ने उन्हें आर्मी प्रशिक्षण देकर देश के सीमावर्ती क्षेत्रों की आंतरिक व्यवस्था की देखभाल का जिम्मा दिया था। जिसके एवज में केंद्रीय गृह मंत्रालय से उन्हें दैनिक डीए, वर्दी व आवश्यक सामान की किट दी जाती थी, जो कि वर्ष 2002 तक दी गई। इसके बाद यह सुविधा उत्तराखंड में खत्म कर दी गई, जबकि उत्तराखंड की तरह ही मणिपुर में कार्यरत विलेज वॉलेंटियर्स फोर्स को गुवाहाटी हाईकोर्ट व सुप्रीम हाईकोर्ट के एक आदेश पर यह सुविधा दी जा रही है। याचिका में कहा कि उत्तराखंड के गुरिल्लों को भी यह सुविधा दी जाए। उन्होंने कम आयु के गुरिल्लों को सरकारी नौकरी देने, उम्रदराज गुरिल्लों को पेंशन देने और दिवंगत गुरिल्लो के आश्रितों को भी सुविधाएं देने की मांग की है। याचिका में कहा कि राज्य में करीब 19 हजार गुरिल्ला हैं, जिसमें आखिरी 2002 के आर्म्ड प्रशिक्षित हैं। इसके अलावा गुरिल्लों की ओर से लगातार की जा रही मांग को देखते हुए 2015 में सरकार ने गुरिल्लों का प्रदेश भर में शिविर लगाकर सत्यापन भी किया, लेकिन उनकी मांगों पर सरकार ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है।