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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Ointment on the green grass of a forest fire

जंगल की आग पर हरी घास का मरहम

Sun, 05 Jun 2016 11:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी। Updated Sun, 05 Jun 2016 11:45 PM IST
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 प्रदेश में हजारों हेक्टेयर में जंगल की आग लगी थी। इसमें पेड़, पौधों से लेकर जानमाल का भारी नुकसान हुआ। अब प्रकृति ने जंगल की आग पर मरहम लगाना शुरू किया है। जहां-जहां पर जंगल की आग लगी थी, वहां पर हरी घास उग रही है। इस घास से नुकसान की कुछ भरपाई शुरू हुई है साथ में जंगल की आग का खतरा भी कम हो गया है। इस घास ने वन महकमे और ग्रामीणों दोनों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है। 
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जाड़े की बरसात न होने और बढ़ते तापमान के कारण जंगल धूं-धूं कर जले। आग को रोकने के लिए एयर फोर्स से लेकर दूसरे सरकारी महकमों की मदद लेनी पड़ी है। तमाम कोशिशों के बाद भी 4420 हेक्टेयर में जंगल की आग में खाक हो गए। पर बीते दिनों रुक-रुक कर हुई बरसात राहत लेकर आयी थी। प्रकृति ने अब जंगल पर ‘मरहम’ लगाना शुरू किया है। डीएफओ डा. पराग मधुकर धकाते कहते हैं कि जहां पर आग लगी थी, करीब हर जगह बीते दिनों हुई बरसात के बाद घास आना शुरू हो गई है।
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यह घास आगे भी जंगल की आग को रोकने में मददगार होगी। मुख्य वन संरक्षक व वनाग्नि नियंत्रण के नोडल अधिकारी बीपी गुप्ता कहते हैं कि बरसात के कारण आग करीब बुझ चुकी है। छिटपुट घटना ही सामने आ रही है। वैसे 15 जून के बाद ही विधिवत फायर सीजन बंद होता है। जो हालात है, उसमें सभी कुछ नियंत्रण में है। अब जली हुई जगहों पर घास आना शुरू हो गई है। यह अच्छे संकेत हैं।
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कुमाऊं में हुई घटनाएं कम
हल्द्वानी। प्रदेश में सबसे ज्यादा वनाग्नि की घटना गढ़वाल में हुई है। कुमाऊं में 706 घटनाओं में 1700 हेक्टेयर जंगल का नुकसान हुआ, जबकि गढ़वाल में 1134 घटना में 1969 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है। 
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