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Nainital News: एआईसीटीई मानकों के अनुरूप ही कराई जाएगी भर्ती
Wed, 07 Oct 2026 03:11 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Wed, 07 Oct 2026 03:11 AM IST
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हाईकोर्ट
नैनीताल। हाईकोर्ट ने पॉलिटेक्निक प्रवक्ताओं की भर्ती मामले में सरकार के उन कथनों के आधार पर याचिका को निस्तारित कर दिया है जिसमें सरकार ने कहा कि 27 मार्च 2026 को नियमों में संशोधन कर दिया गया है। इसके तहत ही अब एआईसीटीई मानकों के अनुरूप ही भर्ती कराई जाएगी। पहले स्नातक अर्हता वाले अभ्यर्थी भी परीक्षा में शामिल हो सकते थे लेकिन संशोधन के बाद लेवल 10 लेक्चरर पद के लिए स्नातक के साथ स्नातकोत्तर की अनिवार्यता नियम में स्पष्ट रूप से दर्ज कर दी गई है। इसी को संज्ञान में लेते हुए कोर्ट ने याचिका निस्तारित कर दी।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मधुसूदन पैन्यूली व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि मार्च 2025 में परीक्षा से दो दिन पहले हाईकोर्ट ने भर्ती पर स्थगनादेश जारी किया था। याचिका में कहा गया था कि राज्य सरकार ने पॉलिटेक्निक लेक्चरर पद के लिए जो अर्हता तय की थी, वह अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद 2019 के मानकों के विपरीत थी। याचिकाकर्ताओ की ओर से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के प्रतिपादित सिद्धांत के अनुसार कोई भी सरकार या संस्थान एआईसीटीई के विपरीत जाकर तकनीकी शिक्षा के मानदंड तय नहीं कर सकता। सरकार द्वारा नियमों में बदलाव न किए जाने पर कोर्ट ने स्थगनादेश पारित किया था।
सरकार ने 27 मार्च 2026 को नियमों में संशोधन कर दिया, जिसके तहत अब भर्ती एआईसीटीई मानकों के अनुरूप ही कराई जाएगी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि याचिका इसी आधार पर दाखिल की गई थी कि जहां स्नातकोत्तर अनिवार्य अर्हता है, वहां सरकार गलत नियमों के तहत स्नातक पात्र अभ्यर्थियों को भी भर्ती में शामिल कर रही थी। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब इसे सही कर लिया गया है।
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मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मधुसूदन पैन्यूली व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि मार्च 2025 में परीक्षा से दो दिन पहले हाईकोर्ट ने भर्ती पर स्थगनादेश जारी किया था। याचिका में कहा गया था कि राज्य सरकार ने पॉलिटेक्निक लेक्चरर पद के लिए जो अर्हता तय की थी, वह अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद 2019 के मानकों के विपरीत थी। याचिकाकर्ताओ की ओर से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के प्रतिपादित सिद्धांत के अनुसार कोई भी सरकार या संस्थान एआईसीटीई के विपरीत जाकर तकनीकी शिक्षा के मानदंड तय नहीं कर सकता। सरकार द्वारा नियमों में बदलाव न किए जाने पर कोर्ट ने स्थगनादेश पारित किया था।
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सरकार ने 27 मार्च 2026 को नियमों में संशोधन कर दिया, जिसके तहत अब भर्ती एआईसीटीई मानकों के अनुरूप ही कराई जाएगी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि याचिका इसी आधार पर दाखिल की गई थी कि जहां स्नातकोत्तर अनिवार्य अर्हता है, वहां सरकार गलत नियमों के तहत स्नातक पात्र अभ्यर्थियों को भी भर्ती में शामिल कर रही थी। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब इसे सही कर लिया गया है।
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