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अब लो, गौला से दो गुना ज्यादा
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Sat, 30 Jan 2016 01:07 AM IST
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गौला में खनन की मात्रा दो गुनी करने की तैयारी थी। वन निगम ने जिस संस्था को खनिज की मात्रा निर्धारण करने की जिम्मेदारी सौंपी थी, उसने लक्ष्य बढ़ाने की संस्तुति की है। केंद्र सरकार ने गौला में खनिज निकासी का अधिकतम लक्ष्य 54 लाख घनमीटर किया हुआ है।
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पिछले साल खनन सत्र में जब वन विभाग ने सेंट्रल स्वॉयल वाटर रिसर्च इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (सीएसडब्ल्यूआरटीआई) से नदी का अध्ययन नवंबर-2014 में कराया था, तो उसने 54 लाख को खनिज मात्रा को घटाकर 44 लाख करने की संस्तुति की थी।
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ऐसे में अप्रैल-2015 में वन विभाग ने लक्ष्य पूरा होने के बाद खनन पर रोक लगा दी। इसके बाद देहरादून तक हंगामा हुआ। बाद में रिपोर्ट को ताक पर रखकर केंद्र सरकार के तय लक्ष्य के हिसाब से ही खनन करने का आदेश शासन ने जारी कर दिया।
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सूत्रों के अनुसार बाद में वन निगम ने दुबारा-2015 सीएसडब्ल्यूआरटीआई से ही अध्ययन कराया। तो एक तरह अप्रत्याशित जानकारी सामने आई। पिछली रिपोर्ट में जहां खनन की मात्रा को 10 लाख घनमीटर तक करने की बात कही गई थी, जबकि करीब एक सालबाद हुए अध्ययन में करीब एक करोड़ एक लाख घनमीटर तक करने की संस्तुति की गई।
इसके आधार पर वन निगम ने वन विभाग को पत्र लिखकर खनन मात्रा बढ़ाने को कहा। पर तराई पूर्वी वन प्रभाग ने वन संरक्षण अधिनियम का हवाला देते केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय स्तर (अधिकतम लक्ष्य केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने तय किया है) से ही खनन मात्रा संशोधन कराने को कहा है।
विगत सालों में जिला खनन समिति ने दुर्घटना रोकथाम, बेहतर प्रबंधन के लिए खनन में डंपरों के चक्कर एक करने के साथ वाहनों की संख्या भी तय कर दी थी। चर्चाओं की माने तो इसमें खनिज की मात्रा बढ़ने पर डंपरों के चक्करों की संख्या एक से दो या तीन करने और वाहनों की संख्या बढ़ाने की भी थी योजना।
ये पड़ेगा प्रभाव
- 20 से 25 हजार तक लोगों के रोजगार का मुख्य साधन
है, यह लोग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़े हैं
- 25 स्टोन क्रशर हल्द्वानी, लालकुआं क्षेत्र में है, जिनके
खनिज का मुख्य स्रोत गौला नदी है
- 1475 खनन एरिया में खनन होता है
- राजस्व का हिस्सा वन्यजीव सुरक्षा में भी खर्च होता है
- खनन बंद होने से अवैध खनन, अपराध बढ़ने की आशंका रहती है
मजदूरों की चिंता
खनन से जुड़े लोगों को सबसे ज्यादा चिंता श्रमिकों को लेकर है। अधिकांश श्रमिक पूरब के राज्यों से आते हैं। अगर खनन बंद रहता है, तो यह श्रमिक वापस लौट जायेंगे। इसके अलावा मार्च में होली भी है। ऐसे में खनन के लिये श्रमिकों को जुटाना भी एक चुनौती होगा।