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अब तो जरूरत का सामान भी हो गया खत्म, उधार देने वालों ने भी मुंह फेर लिया

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 25 Apr 2020 12:36 AM IST
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Now even the necessities are gone, even the lenders turned away
हल्द्वानी कर्फ्यू में मिली ढील के दौरान लाइन नं0 17 स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा के बाहर लगी ग्राहक? - फोटो : HALDWANI
हल्द्वानी। बनभूलपुरा में कर्फ्यू के चलते कई लोग अब दैनिक जरूरतों की पूर्ति के लिए परेशान हैं। उनका कहना है कि अब तो उधार देने वाले भी मुंह मोड़ लिए हैं।
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नई बस्ती गोपाल मंदिर के पास रहने वाली नसरीन (34) पत्नी रईस पैसे निकालने के लिए बैंक के सामने सुबह से लाइन में खड़ी थी। बैंककर्मियों ने चेक किया तो उसके खाते में पैसे खत्म हो गए थे। वह गैस की सब्सिडी के बारे में जानने के लिए एजेंसी जाना चाहती थी लेकिन पुलिस ने उसे जाने से रोक दिया तो वह बनभूलपुरा थाने आई।
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थानाध्यक्ष सुशील कुमार को बताया कि उसने सुबह से परेशान है। कर्फ्यू के चलते पति मजदूरी करने नहीं गए। बैंक में जमा पैसा खर्च हो गया। उधारी पर उसने कुछ दिन अपनी आवश्यकता पूरी की। उसके पास पैसे नहीं है। राशन दो दिन के लिए बचा हैं।
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थानाध्यक्ष ने उसे गैस एजेंसी जाने के लिए मुहर लगाकर पास और पीने के लिए पानी की एक बोतल दी। भरोसा दिलाया कि यदि कोई इंतजाम नहीं होगा तो कुछ इंतजाम किया जाएगा। इसके बाद वह गैस एजेंसी में सब्सिडी के बारे में पूछने गई। गैस लेने के बाद उसके खाते में सब्सिडी के पैसे नहीं आए थे। इसी तरह कई महिलाएं कर्फ्यू और पाबंदी के चलते परेशान हो गई हैं। जवाहर नगर की एक महिला अपनी व्यथा सुनाते हुए महिला पुलिसकर्मियों के सामने रो पड़ी। महिला पुलिसकर्मियों ने उसे खाना मंगाने का भरोसा दिलाया।
फल के ग्राहक नदारद
नई बस्ती में ठेला लगाए दुकानदार रईस अहमद ने कहा कि उसके पास सुबह से ग्राहक नहीं आ रहे हैं। मूलधन निकालना मुश्किल हो गया है। अन्य दुकानदार समीर ने कहा कि एक भी केला नहीं बिका हैं। ऐसे में कैसे घर का खर्च चलेगा। ऐसे हालात में मूलधन डूब जाएगा।

22 मार्च से बंद है दुकान
बनभूलपुरा नई बस्ती निवासी शहनवाज मलिक ने कहा कि उसकी कुसुमखेड़ा में हार्डवेयर की दुकान है। दुकान लॉकडाउन से पहले 22 मार्च से बंद है। शुक्रवार को लॉकडाउन से थोड़ी राहत मिली है लेकिन काम धंधा ठप होने से सभी लोग परेशान है। जिला प्रशासन को और एटीएम खोलने चाहिए। सिर्फ दो एटीएम से लोगों की आवश्यकता पूर्ति संभव नहीं है।
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