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बेटियों के जन्म के प्रति नहीं बदल रही सोच
अमरनाथ
Updated Sat, 19 Nov 2016 01:35 AM IST
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झेलम एक्स्प्रेस में बच्ची का जन्म
- फोटो : फाइल फोटो
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तमाम मुहिम चलाने के बावजूद बेटियाें के जन्म के प्रति लोगों की सोच बदल नहीं पा रही है। कम से कम हल्द्वानी नगर निगम में दर्ज लिंगानुपात तो यही बता रहा है। 2011 के मुकाबले पिछले पांच सालों में यह लिंगानुपात घटने की बजाय बढ़ गया है।
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सूचना के अधिकार में मिली जानकारी बता रही है कि सरकार के तमाम दावों और कोशिश के बाद भी जन्म-मृत्यु का पंजीकरण कराने मेें लोगों की खास रुचि नहीं है।
हल्द्वानी नगर निगम के पंजीयन में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2015 में जहां पुरुषों की जन्म दर 52.60 प्रतिशत थी, वह वर्ष 2016 में अक्तूबर तक बढ़कर 54.15 प्रतिशत हो गई। महिलाओं की जन्म दर 2015 में 47.40 थी, जो घटकर इस अवधि में 45.85 प्रतिशत रह गई।
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आंकड़ों के आइने से दोनों वर्ष को तुलनात्मक रूप से देखने पर साफ है कि लिंगानुपात का अंतर बढ़ रहा है, जो चिंताजनक है। हालांकि सिर्फ पिछले साल अप्रैल का आंकड़ा संतोष दे सकता है। उक्त अवधि में 666 पुरुषों के मुकाबले 684 महिलाओं के जन्म का रिकार्ड दर्ज हुआ था।
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चिंता की बात यह भी है कि मृत्यु का पंजीयन देखने पर स्त्री-पुरुष की आबादी का अंतर बढ़ता हुआ दिख रहा है। 2015 में मरने वाले पुरुषों का प्रतिशत 67.27 था, जो वर्ष 2016 में अक्तूबर तक घटकर 66 प्रतिशत रह गया, जबकि महिलाओं की मृत्यु का प्रतिशत 2015 के 32.75 के मुकाबले वर्ष 2016 में (अक्तूबर तक) बढ़कर 34 प्रतिशत हो गया।
कहा जा सकता है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की मौत अधिक हो रही है। शायद यह इशारा महिलाओं को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं को तवज्जो न देने की ओर भी है। बता दें कि 2011 के जनगणना के आंकड़ों के अनुसार पुरुषों की संख्या 80641 (52.30 प्रतिशत) और महिलाओं की संख्या 73567 (47.70 प्रतिशत) है।
सरकार ने हालांकि जन्म-मृत्यु का पंजीकरण अनिवार्य किया हुआ है, पर कुल पंजीयन की रफ्तार भी बेहद कम नजर आ रही है। हाईटेक जमाने में भी अभी तक ऑनलाइन पंजीयन की सुविधा लोगों को नहीं मिली है।
इस वजह से भी लोग पंजीयन कराने में रुचि नहीं ले रहे। तत्काल रजिस्ट्रेशन के लिए स्थानीय अस्पतालों को ऑनलाइन करने की योजना भी ठंडे बस्ते में है।
आरटीआई के जवाब में सामने आई लापरवाही
आरटीआई को भी नगर निगम के अधिकारी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। जन्म-मृत्यु संबंधी आरटीआई के सवालों के जवाब में 316 और 255 का योग 583 लिखा है। आरटीआई कार्यकर्ता प्रमोद अग्रवाल गोल्डी ने एक नवंबर को आरटीआई लगाई, जिसका जवाब 11 अक्तूबर की तिथि में भेजा गया।
दो रुपये में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र
जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम-1969 के लागू होने के बाद देश में जन्म और मृत्यु का पंजीयन अनिवार्य है। आम तौर पर जन्म-मृत्यु की घटना को दर्ज करने के लिए 21 दिन का समय निर्धारित होता है।
राजस्थान समेत कई प्रदेशों में यह सुविधा ऑनलाइन और निशुल्क है, लेकिन हल्द्वानी में 21 दिन से एक माह तक आवेदन पर दो रुपये प्रति प्रमाण पत्र शुल्क लिया जाता है। एक वर्ष के भीतर पंजीयन कराने में पांच रुपये और एक वर्ष के बाद 10 रुपये शुल्क लिया जाता है।