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इन भवनों, मशीन और गाड़ियों पर किसी को तरस नहीं आया, लाखों खर्च कर बनाया और खरीदा मगर काम कोई नहीं आया
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इन भवनों, मशीन और गाड़ियों पर किसी को तरस नहीं आया
लाखों खर्च कर बनाया और खरीदा मगर काम कोई नहीं आया
पड़ताल
कॉमन इंट्रो
सरकारी योजनाओं का हाल भगवान भरोसे है। लाखों खर्च कर भवन बना दिए गए, मशीनें खरीदी गईं, वाहन खरीद डाले मगर कोई किसी काम का नहीं। इनका उपयोग कैसे हो, इसकी न किसी को चिंता न कोई मतलब नहीं। जनता के पैसे जनता की सेवा में लगाने की फिक्र न जनप्रतिनिधियों को दिख रही है न ही अफसर इसका संज्ञान ले रहे हैं। धारणा बन गई है कि सब चलता है, चलता रहेगा... परेशान होती है तो सिर्फ जनता।
करोड़ों का कूड़ा निस्तारण प्लांट नहीं चला तो उखाड़ फेंका
हल्द्वानी। सरकारी धन की बर्बादी देखनी हो तो हल्द्वानी मंडी समिति में देखने को मिल जाएगी। मंडी में फलों, सब्जी के निकलने वाले कूड़ा करकट के निस्तारण के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत मंडी परिषद मुख्यालय रुद्रपुर ने गौलापार में वनभूमि पर ओडब्ल्यूसी प्लांट लगाया था। मंडी रिकार्ड के मुताबिक आठ जुलाई 2015 को कार्यदायी संस्था मंडी निर्माण शाखा ने मंडी समिति हल्द्वानी को यह प्लांट हैंडओवर भी कर दिया। इसके निर्माण पर तीन करोड़ 50 लाख रुपये की धनराशि खर्च की गई है। इस प्लांट का लगाने का उद्देश्य फलों एवं सब्जी के कूड़ा करकट से जैविक खाद बनाना था लेकिन इस प्लांट से एक क्विंटल भी खाद तैयार नहीं हुई। इसका संचालन मंडी समिति स्वयं नहीं कर सकी तो देहरादून की एक संस्था को ठेके पर दे दिया गया लेकिन संस्था भी इसे नहीं चला सकी। बाद में काफी समय तक मंडी समिति ने इस प्लांट की रखवाली करने के लिए तीन सुरक्षा गार्डों को तैनात करने पर लाखों रुपये खर्च किए और अंत में पिछले साल इस प्लांट के अस्थि पंजर उखाड़ कर मंडी कार्यालय के परिसर में डाल दिए गए। जो कि अभी भी पड़े हुए देखे जा सकते हैं।
प्लास्टिक कांपेक्टर, कूड़ा गाड़ियां और एनिमल कैचर खा रहा है धूल
हल्द्वानी। करोड़ों खर्च करने के बाद भी निगम की कूड़ा गाड़ियां, प्लास्टिक कांपेक्टर और एनिमल कैचर नगर निगम में धूल फांक रहे हैं। निगम बजट का रोना रोकर इनका प्रयोग नहीं कर रहा है।
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नगर निगम ने सफाई आयोग से 5.5 करोड़ का ऋण लिया था। एक साल में नगर निगम इस पर 20 लाख का ब्याज चुका है लेकिन कूड़ा गाड़ियां, जेसीबी आने के बाद भी इनका प्रयोग नहीं हो पा रहा है। नगर निगम में ये धूल फांक रहे हैं। उधर, नगर निगम ने करीब छह लाख रुपये की लागत से प्लास्टिक कांपेक्टर खरीदा था। इसे ट्रंचिंग ग्राउंड में एक कमरे के अंदर लगा दिया गया। आठ माह से यह अभी तक शुरू भी नहीं हो पाया है। तीन साल पहले आवारा पशु, कुत्तों आदि को पकड़कर ले जाने के लिए एनिमल कैचर खरीदा गया था। इसमें करीब 12.5 लाख रुपये खर्च किए गए। अब यह एनिमल कैचर नगर निगम की लकड़ियां और सेंचुरी पेपर मिल से सोडियम हाइपो क्लोराइट लाने के लिए प्रयोग किया जा रहा है।
चार करोड़ इलेक्ट्रानिक कांटे, संचालन एक बार भी नहीं
हल्द्वानी। हल्द्वानी मंडी में इलेक्ट्रानिक कांटे लगाने के नाम पर भी वारे-न्यारे हो चुके हैं। मंडी परिषद मुख्यालय रुद्रपुर ने कुछ साल पहले मंडी के दो गेटों पर करीब साढ़े चार करोड़ की लागत से इलेक्ट्रानिक कांटे लगवाए थे। इन कांटों का संचालन एक बार भी नहीं हो सका। जब भी मंडी समिति ने इनका संचालन करने की कोशिश की व्यापारियों के विरोध के बाद सारे प्रयास विफल हो गए। इन कांटों को लगाने के पीछे मंडी की यह मंशा थी कि मंडी से जो भी बाहर मॉल निकलेगा, उस पर मंडी शुल्क की चोरी नहीं हो सकेगी तथा तौल के आधार पर मंडी शुल्क मिल सकेगा लेकिन व्यापारी इसके लिए सहमत नहीं हुए। बाद में साल तक इसी तरह कांटे लगे रहने के बाद उखाड़ कर यहां दीवार खड़ी कर दी गई।
लाइट वेट स्ट्रक्चर के क्लास रूम बदहाल
हल्द्वानी। एमबीपीजी कॉलेज में चार साल पहले करीब पांच करोड़ की लागत से छात्र-छात्राओं के लिए लाइटवेट स्ट्रक्चर प्रणाली से क्लासरूमों का निर्माण कराया गया था। उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण निगम इसमें कार्यदायी संस्था थी। इन क्लासरूमों का हाल यह है कि छतों में लगीं भारी भरकम टाइल्स निकल कर कब किस के सिर पर गिर जाए पता नहीं। कालेज प्रशासन द्वारा कई बार कार्यदायी संस्था को लिखा गया मगर क्लासरूम इसी तरह पड़े हैं। छात्र-छात्राओं की सुरक्षा की किसी को कोई परवाह नहीं है।
एक करोड़ के ट्रैफिक सिग्नल की बत्ती गुल
हल्द्वानी। यातायात निदेशालय ने मार्च में शहर के 13 स्थानों पर एक करोड़ से अधिक लागत से ट्रैफिक सिग्नल लगाए थे। लगाने के बाद पता चला कि कुछ स्थानों पर ट्रैफिक सिग्नल अनावश्यक रूप से चल रहे हैं। तब से इन सिग्नल की बत्ती गुल है। अब यातायात विभाग सफाई दे रहा है कि सिग्लन संचालित करने के लिए तीन जगह पर ट्रायल चल रहा है।
सावल्दे में 571.47 लाख के कनवेंशन सेंटर को भी भूल गए
रामनगर (नैनीताल)। पर्यटन विभाग की ओर से 571.47 लाख की लागत से सावल्दे में कनवेंशन सेंटर का निर्माण किया गया था, जिसका उद्घाटन जनवरी में पर्यटन और सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने किया था। यह कनवेंशन सेंटर धूल फांक रहा है।
इसका मकसद था कि जनपद स्तरीय, राज्य स्तरीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले बैठकों एवं राजकीय कार्यक्रमों का सुव्यवस्थित तरीके से आयोजन किया जाए। युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने के साथ क्षेत्र का विकास होने की बात कही गई थी। कनवेंशन सेंटर वर्तमान में धूल फांक रहा है और बिल्डिंग की हालत बिना देखरेख के खराब हो रही है।
हालांकि तत्कालीन डीएम सविन बंसल ने कनवेंशन सेंटर को कोविड अस्पताल बनाने की कार्यवाही शुरू की थी। तब स्वास्थ्य विभाग की ओर से यहां पर 150 बेड रखे गए थे और कहा गया था कि यहां पर कोरोना के मरीजों का उपचार होगा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। यहां पर पड़े बेड भी धूल फांक रहे है और कोई देखने वाला नहीं है।
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लाखों खर्च कर बनाया और खरीदा मगर काम कोई नहीं आया
पड़ताल
कॉमन इंट्रो
सरकारी योजनाओं का हाल भगवान भरोसे है। लाखों खर्च कर भवन बना दिए गए, मशीनें खरीदी गईं, वाहन खरीद डाले मगर कोई किसी काम का नहीं। इनका उपयोग कैसे हो, इसकी न किसी को चिंता न कोई मतलब नहीं। जनता के पैसे जनता की सेवा में लगाने की फिक्र न जनप्रतिनिधियों को दिख रही है न ही अफसर इसका संज्ञान ले रहे हैं। धारणा बन गई है कि सब चलता है, चलता रहेगा... परेशान होती है तो सिर्फ जनता।
करोड़ों का कूड़ा निस्तारण प्लांट नहीं चला तो उखाड़ फेंका
हल्द्वानी। सरकारी धन की बर्बादी देखनी हो तो हल्द्वानी मंडी समिति में देखने को मिल जाएगी। मंडी में फलों, सब्जी के निकलने वाले कूड़ा करकट के निस्तारण के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत मंडी परिषद मुख्यालय रुद्रपुर ने गौलापार में वनभूमि पर ओडब्ल्यूसी प्लांट लगाया था। मंडी रिकार्ड के मुताबिक आठ जुलाई 2015 को कार्यदायी संस्था मंडी निर्माण शाखा ने मंडी समिति हल्द्वानी को यह प्लांट हैंडओवर भी कर दिया। इसके निर्माण पर तीन करोड़ 50 लाख रुपये की धनराशि खर्च की गई है। इस प्लांट का लगाने का उद्देश्य फलों एवं सब्जी के कूड़ा करकट से जैविक खाद बनाना था लेकिन इस प्लांट से एक क्विंटल भी खाद तैयार नहीं हुई। इसका संचालन मंडी समिति स्वयं नहीं कर सकी तो देहरादून की एक संस्था को ठेके पर दे दिया गया लेकिन संस्था भी इसे नहीं चला सकी। बाद में काफी समय तक मंडी समिति ने इस प्लांट की रखवाली करने के लिए तीन सुरक्षा गार्डों को तैनात करने पर लाखों रुपये खर्च किए और अंत में पिछले साल इस प्लांट के अस्थि पंजर उखाड़ कर मंडी कार्यालय के परिसर में डाल दिए गए। जो कि अभी भी पड़े हुए देखे जा सकते हैं।
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प्लास्टिक कांपेक्टर, कूड़ा गाड़ियां और एनिमल कैचर खा रहा है धूल
हल्द्वानी। करोड़ों खर्च करने के बाद भी निगम की कूड़ा गाड़ियां, प्लास्टिक कांपेक्टर और एनिमल कैचर नगर निगम में धूल फांक रहे हैं। निगम बजट का रोना रोकर इनका प्रयोग नहीं कर रहा है।
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नगर निगम ने सफाई आयोग से 5.5 करोड़ का ऋण लिया था। एक साल में नगर निगम इस पर 20 लाख का ब्याज चुका है लेकिन कूड़ा गाड़ियां, जेसीबी आने के बाद भी इनका प्रयोग नहीं हो पा रहा है। नगर निगम में ये धूल फांक रहे हैं। उधर, नगर निगम ने करीब छह लाख रुपये की लागत से प्लास्टिक कांपेक्टर खरीदा था। इसे ट्रंचिंग ग्राउंड में एक कमरे के अंदर लगा दिया गया। आठ माह से यह अभी तक शुरू भी नहीं हो पाया है। तीन साल पहले आवारा पशु, कुत्तों आदि को पकड़कर ले जाने के लिए एनिमल कैचर खरीदा गया था। इसमें करीब 12.5 लाख रुपये खर्च किए गए। अब यह एनिमल कैचर नगर निगम की लकड़ियां और सेंचुरी पेपर मिल से सोडियम हाइपो क्लोराइट लाने के लिए प्रयोग किया जा रहा है।
चार करोड़ इलेक्ट्रानिक कांटे, संचालन एक बार भी नहीं
हल्द्वानी। हल्द्वानी मंडी में इलेक्ट्रानिक कांटे लगाने के नाम पर भी वारे-न्यारे हो चुके हैं। मंडी परिषद मुख्यालय रुद्रपुर ने कुछ साल पहले मंडी के दो गेटों पर करीब साढ़े चार करोड़ की लागत से इलेक्ट्रानिक कांटे लगवाए थे। इन कांटों का संचालन एक बार भी नहीं हो सका। जब भी मंडी समिति ने इनका संचालन करने की कोशिश की व्यापारियों के विरोध के बाद सारे प्रयास विफल हो गए। इन कांटों को लगाने के पीछे मंडी की यह मंशा थी कि मंडी से जो भी बाहर मॉल निकलेगा, उस पर मंडी शुल्क की चोरी नहीं हो सकेगी तथा तौल के आधार पर मंडी शुल्क मिल सकेगा लेकिन व्यापारी इसके लिए सहमत नहीं हुए। बाद में साल तक इसी तरह कांटे लगे रहने के बाद उखाड़ कर यहां दीवार खड़ी कर दी गई।
लाइट वेट स्ट्रक्चर के क्लास रूम बदहाल
हल्द्वानी। एमबीपीजी कॉलेज में चार साल पहले करीब पांच करोड़ की लागत से छात्र-छात्राओं के लिए लाइटवेट स्ट्रक्चर प्रणाली से क्लासरूमों का निर्माण कराया गया था। उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण निगम इसमें कार्यदायी संस्था थी। इन क्लासरूमों का हाल यह है कि छतों में लगीं भारी भरकम टाइल्स निकल कर कब किस के सिर पर गिर जाए पता नहीं। कालेज प्रशासन द्वारा कई बार कार्यदायी संस्था को लिखा गया मगर क्लासरूम इसी तरह पड़े हैं। छात्र-छात्राओं की सुरक्षा की किसी को कोई परवाह नहीं है।
एक करोड़ के ट्रैफिक सिग्नल की बत्ती गुल
हल्द्वानी। यातायात निदेशालय ने मार्च में शहर के 13 स्थानों पर एक करोड़ से अधिक लागत से ट्रैफिक सिग्नल लगाए थे। लगाने के बाद पता चला कि कुछ स्थानों पर ट्रैफिक सिग्नल अनावश्यक रूप से चल रहे हैं। तब से इन सिग्नल की बत्ती गुल है। अब यातायात विभाग सफाई दे रहा है कि सिग्लन संचालित करने के लिए तीन जगह पर ट्रायल चल रहा है।
सावल्दे में 571.47 लाख के कनवेंशन सेंटर को भी भूल गए
रामनगर (नैनीताल)। पर्यटन विभाग की ओर से 571.47 लाख की लागत से सावल्दे में कनवेंशन सेंटर का निर्माण किया गया था, जिसका उद्घाटन जनवरी में पर्यटन और सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने किया था। यह कनवेंशन सेंटर धूल फांक रहा है।
इसका मकसद था कि जनपद स्तरीय, राज्य स्तरीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले बैठकों एवं राजकीय कार्यक्रमों का सुव्यवस्थित तरीके से आयोजन किया जाए। युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने के साथ क्षेत्र का विकास होने की बात कही गई थी। कनवेंशन सेंटर वर्तमान में धूल फांक रहा है और बिल्डिंग की हालत बिना देखरेख के खराब हो रही है।
हालांकि तत्कालीन डीएम सविन बंसल ने कनवेंशन सेंटर को कोविड अस्पताल बनाने की कार्यवाही शुरू की थी। तब स्वास्थ्य विभाग की ओर से यहां पर 150 बेड रखे गए थे और कहा गया था कि यहां पर कोरोना के मरीजों का उपचार होगा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। यहां पर पड़े बेड भी धूल फांक रहे है और कोई देखने वाला नहीं है।