फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Nine rebel MLAs have the right to vote

बागी नौ विधायकों को मत देने का दिया अधिकार 

Tue, 29 Mar 2016 11:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल
अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल Updated Tue, 29 Mar 2016 11:41 PM IST
विज्ञापन
Nine rebel MLAs have the right to vote
हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विज्ञापन
हाईकोर्ट ने राष्ट्रपति शासन के खिलाफ निवर्तमान मुख्यमंत्री हरीश रावत की याचिका पर सुनवाई करते हुए विधानसभा में शक्ति परीक्षण के लिए 31 मार्च की तिथि तय की है। साथ ही शक्ति परीक्षण में बागी विधायक भी शामिल होंगे। हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी है कि हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल नरेंद्र दत्त की देखरोख में शक्ति परीक्षण होगा।

कोर्ट ने सभी विधायकों का परिणाम सील कवर मेें रखने के निर्देश दिए है जिसे एक अप्रैल को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान खोला जाएगा। साथ ही कोर्ट ने मुख्य सचिव तथा डीजीपी को आदेशित किया है कि मतदान प्रक्रिया के दौरान कानून व्यवस्था व सदस्यों की पूरी सुरक्षा की व्यवस्था करें जिससे शांति भंग न हो साथ ही मतदान के दौरान सदन में  बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर भी रोक लगाई गई है।   
विज्ञापन


न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। उत्तराखंड में धारा 356 का प्रयोग कर राष्ट्रपति शासन लगाने के निर्णय को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की हाईकोर्ट में चुनौती पर दूसरे दिन भी सुनवाई हुई। वहीं कांग्रेस के नौ विधायकों की तरफ से छह विधायकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उनकी सदस्यता रद करने को चुनौती दी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि फलोर टेस्ट में सभी विधायक शामिल होंगे। बागी विधायकों के वोट अलग से गिने जाएंगे। उनकी सदस्यता पर एक अप्रैल को सुनवाई होगी। केद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता तुषार मेहता तथा भाजपा नेता एवं अधिवक्ता नलिन कोहली ने बहस की।

सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने एसआर बोम्मई और जगदंबिका पाल केस का हवाला देेते हुए दलील दी कि राष्ट्रपति की अधिसूचना में सुप्रीम कोर्ट भी अंतरिम आदेश नहीं दे सकती। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में राज्य सरकार ने संविधान का दुरूपयोग किया। हरीश रावत की ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पैरवी की।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठों के आदेश हैं कि बहुमत का फैसला सदन में ही होगा। केंद्र सरकार ने रावत सरकार को गिराने और बागियों को बचाने की मंशा पूरी करने के लिए धारा 356 का दुरूपयोग किया। उन्होंने कहा कि रावत सरकार का फलोर टेस्ट होना था, लेकिन असंवैधानिक तरीके से सरकार को पदच्युत किया गया। बागियों को विधान सभा अध्यक्ष ने सुनवाई का पूरा मौका दिया था।


सभी पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने विधानसभा में शक्ति परीक्षण के लिए 31 मार्च की तिथि तय की है। साथ ही  शक्ति परीक्षण में बागी विधायक भी शामिल होंगे। हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी है  कि हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल नरेंद्र दत्त की देखरोख में शक्ति  परीक्षण होगा। कोर्ट ने सभी विधायकों का परिणाम सील कवर मेें रखने के  निर्देश दिए है तथा एक अप्रैल को हाईकोर्ट में इसमें दो बजे सुनवाई के लिए  रखा जाएगा।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed