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सात नंबर के समीप नाले में मिली नवजात बच्ची
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नवजात शिशु (बालिका) को उसकी मां जनने के कुछ देर बाद ही नाले में छोड़ गई। गनीमत यह रही कि उसके रोने की
- फोटो : NAINITAL
नैनीताल। मुश्किल से चंद मिनट हुए होंगे उसे दुनिया में आए हुए। अभी ठीक से आंखें भी नहीं खोली थी लेकिन उसे जन्म देने वाली मां दिल में पत्थर रखकर उसे नाले में छोड़कर चली गई। वह रोती रही... शायद इस उम्मीद के साथ कि उसे जन्म देने वालों की ममता जाग जाए क्योंकि वह तो निर्दोष थी। वह तो अभी दुनिया की जद्दोजहद से भी अनजान थी। ममता तो जागी नहीं मागी मगर इंसानियत जरूर सामने आ गई। दो परिवारों ने न सिर्फ उस बच्ची पर प्यार लुटाया बल्कि उसे अस्पताल में भर्ती भी कराया। जहां से उसे सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी रेफर कर दिया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। उसे एसएनसीयू में रखा गया है।
यह किस्सा बृहस्पतिवार की सुबह साढ़े सात बजे नैनीताल के सात नंबर क्षेत्र का है। यहां रहने वाले राशिद अली बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। उन्हें लगा कि पड़ोस में किसी के घर आए मेहमान का बच्चा रो रहा होगा लेकिन जब देर तक बच्चा रोता रहा तो राशिद घर से बाहर निकले। उन्हें सामने नाले में रोती हुई नवजात दिखी। नाले में उतरकर उन्होंने नवजात को उठा लिया और पास में रहने वाली शांति देवी के घर ले गए। वहां उसे कपड़े में लपेटकर हीटर की गर्मी देने के बाद बीडी पांडे अस्पताल पहुंचाया गया।
बीडी पांडे अस्पताल में डॉ. रश्मि त्रिपाठी ने नवजात का स्वास्थ्य परीक्षण कर उसे ऑक्सीजन लगाई। बाद में संजीव खर्कवाल ने उसका इलाज किया। डॉ. खर्कवाल के मुताबिक नवजात प्री-मैच्योर पैदा हुई है और नग्न अवस्था में ठंड में पड़े रहने के कारण उसे हाईपोथर्मियां की शिकायत है। उन्होंने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे इलाज के लिए हल्द्वानी स्थित सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर कर दिया गया।
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दूध तक पीने की स्थिति में नहीं थी
नैनीताल। घंटों तक अस्पताल में बच्ची के साथ रही सामाजिक कार्यकर्ता काजल राजपूत ने बताया कि बच्ची के होंठ पूरी तरह से नीले और टाइट थे जिस कारण वह दूध पीने तक की स्थिति में नहीं थी। हालांकि अस्पताल में एक दिन पहले ही बच्चे को जन्म देने वाली एक महिला नवजात को अपना दूध पिलाने के लिए तैयार थी। ऐसे में बच्ची को ग्लूकोज पर रखा गया था।
तीमारदारों और नर्सों ने की मदद
नैनीताल। नवजात को देख अस्पताल में मौजूद मरीजों और उनके तीमारदारों के अलावा ड्यूटी पर तैनात नर्सों की भी आंखें भर आई। अस्पताल कर्मचारी नीरज जोशी ने अपने घर से कपड़े मंगाकर बच्ची को पहनवाए। तीमारदार और नर्सें भी बच्ची के इलाज और सेवा में जुटी रहीं।
हर कोई हैरान, बोले कौन है ऐसा हैवान
नैनीताल। नवजात को नाले में फेंकने की सूचना मिलने से शहर में हर कोई हैरान दिखा। यही नहीं लोगों ने नवजात को नाले में फेंकने वालों को हैवान तक की संज्ञा दे डाली।
प्रसव के तुरंत बाद फेंक दी गई बच्ची
नैनीताल। नवजात को मरने के लिए नाले में फेंक दिया गया था लेकिन यहां जाको राखे साईंया मार सके न कोई की कहावत चरितार्थ हुई। कड़ाके की ठंड के बाद भी नवजात की सांसें चलती रहीं। उसे प्रसव के तुरंत बाद नाले में फेंका गया था ऐसा इसलिए क्योंकि उसकी नाल तक नहीं काटी गई थी। उसका शरीर खून से सना हुआ था और फेंके जाने के कारण शरीर में कई जगह खरोंच भी थी। सात नंबर क्षेत्र निवासी शांति देवी के पति होटल कर्मी रमेश चंद्र ने बताया कि जब वह सुबह 6:52 बजे घर से ड्यूटी के लिए निकले थे तब नाले में नवजात नहीं थी।
गोद लेने वाले भी अस्पताल पहुंचे
नैनीताल। नवजात के मिलने की खबर शहर में फैली तो कुछ देर बाद ही कई ऐसे लोग भी अस्पताल पहुंचे गए जो बच्ची को गोद लेना चाहते थे। उन्होंने अस्पताल के डॉक्टरों से बच्ची को गोद दिलाने की मांग की लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका।
बच्ची को फेंकने वालों का पता बताओ दस हजार का इनाम पाओ
नैनीताल। डीएम सविन बंसल ने नवजात के नाले में मिलने की घटना को गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि इस तरह का घिनौना काम करने वालों को जल्द से जल्द पकड़ा जाएगा। उन्होंने कहा है कि जो कोई भी बच्ची को फेंकने वालों के बारे में सूचना देगा उसे दस हजार का पुरस्कार दिया जाएगा और उसका नाम गोपनीय रखा जाएगा। डीएम के निर्देश पर जिला बाल संरक्षण अधिकारी व्योमा जैन ने भी अस्पताल पहुंचकर नवजात के बारे में जानकारी ली। डीएम कहा कि सुशीला तिवारी अस्पताल में इलाज के बाद नवजात के पूरी तरह स्वस्थ्य होने पर उसे अल्मोड़ा स्थित शिशु सदन में रखा जाएगा। उसे नियमानुसार ही किसी दंपती को गोद दिया जाएगा। यदि बच्ची को कोई गोद नहीं लेता तो परवरिश, भरण-पोषण, शिक्षा और विवाह तक का सारा खर्च जिला प्रशासन वहन करेगा।
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यह किस्सा बृहस्पतिवार की सुबह साढ़े सात बजे नैनीताल के सात नंबर क्षेत्र का है। यहां रहने वाले राशिद अली बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। उन्हें लगा कि पड़ोस में किसी के घर आए मेहमान का बच्चा रो रहा होगा लेकिन जब देर तक बच्चा रोता रहा तो राशिद घर से बाहर निकले। उन्हें सामने नाले में रोती हुई नवजात दिखी। नाले में उतरकर उन्होंने नवजात को उठा लिया और पास में रहने वाली शांति देवी के घर ले गए। वहां उसे कपड़े में लपेटकर हीटर की गर्मी देने के बाद बीडी पांडे अस्पताल पहुंचाया गया।
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बीडी पांडे अस्पताल में डॉ. रश्मि त्रिपाठी ने नवजात का स्वास्थ्य परीक्षण कर उसे ऑक्सीजन लगाई। बाद में संजीव खर्कवाल ने उसका इलाज किया। डॉ. खर्कवाल के मुताबिक नवजात प्री-मैच्योर पैदा हुई है और नग्न अवस्था में ठंड में पड़े रहने के कारण उसे हाईपोथर्मियां की शिकायत है। उन्होंने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे इलाज के लिए हल्द्वानी स्थित सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर कर दिया गया।
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दूध तक पीने की स्थिति में नहीं थी
नैनीताल। घंटों तक अस्पताल में बच्ची के साथ रही सामाजिक कार्यकर्ता काजल राजपूत ने बताया कि बच्ची के होंठ पूरी तरह से नीले और टाइट थे जिस कारण वह दूध पीने तक की स्थिति में नहीं थी। हालांकि अस्पताल में एक दिन पहले ही बच्चे को जन्म देने वाली एक महिला नवजात को अपना दूध पिलाने के लिए तैयार थी। ऐसे में बच्ची को ग्लूकोज पर रखा गया था।
तीमारदारों और नर्सों ने की मदद
नैनीताल। नवजात को देख अस्पताल में मौजूद मरीजों और उनके तीमारदारों के अलावा ड्यूटी पर तैनात नर्सों की भी आंखें भर आई। अस्पताल कर्मचारी नीरज जोशी ने अपने घर से कपड़े मंगाकर बच्ची को पहनवाए। तीमारदार और नर्सें भी बच्ची के इलाज और सेवा में जुटी रहीं।
हर कोई हैरान, बोले कौन है ऐसा हैवान
नैनीताल। नवजात को नाले में फेंकने की सूचना मिलने से शहर में हर कोई हैरान दिखा। यही नहीं लोगों ने नवजात को नाले में फेंकने वालों को हैवान तक की संज्ञा दे डाली।
प्रसव के तुरंत बाद फेंक दी गई बच्ची
नैनीताल। नवजात को मरने के लिए नाले में फेंक दिया गया था लेकिन यहां जाको राखे साईंया मार सके न कोई की कहावत चरितार्थ हुई। कड़ाके की ठंड के बाद भी नवजात की सांसें चलती रहीं। उसे प्रसव के तुरंत बाद नाले में फेंका गया था ऐसा इसलिए क्योंकि उसकी नाल तक नहीं काटी गई थी। उसका शरीर खून से सना हुआ था और फेंके जाने के कारण शरीर में कई जगह खरोंच भी थी। सात नंबर क्षेत्र निवासी शांति देवी के पति होटल कर्मी रमेश चंद्र ने बताया कि जब वह सुबह 6:52 बजे घर से ड्यूटी के लिए निकले थे तब नाले में नवजात नहीं थी।
गोद लेने वाले भी अस्पताल पहुंचे
नैनीताल। नवजात के मिलने की खबर शहर में फैली तो कुछ देर बाद ही कई ऐसे लोग भी अस्पताल पहुंचे गए जो बच्ची को गोद लेना चाहते थे। उन्होंने अस्पताल के डॉक्टरों से बच्ची को गोद दिलाने की मांग की लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका।
बच्ची को फेंकने वालों का पता बताओ दस हजार का इनाम पाओ
नैनीताल। डीएम सविन बंसल ने नवजात के नाले में मिलने की घटना को गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि इस तरह का घिनौना काम करने वालों को जल्द से जल्द पकड़ा जाएगा। उन्होंने कहा है कि जो कोई भी बच्ची को फेंकने वालों के बारे में सूचना देगा उसे दस हजार का पुरस्कार दिया जाएगा और उसका नाम गोपनीय रखा जाएगा। डीएम के निर्देश पर जिला बाल संरक्षण अधिकारी व्योमा जैन ने भी अस्पताल पहुंचकर नवजात के बारे में जानकारी ली। डीएम कहा कि सुशीला तिवारी अस्पताल में इलाज के बाद नवजात के पूरी तरह स्वस्थ्य होने पर उसे अल्मोड़ा स्थित शिशु सदन में रखा जाएगा। उसे नियमानुसार ही किसी दंपती को गोद दिया जाएगा। यदि बच्ची को कोई गोद नहीं लेता तो परवरिश, भरण-पोषण, शिक्षा और विवाह तक का सारा खर्च जिला प्रशासन वहन करेगा।