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एसएनसीयू में नवजात की मौत
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प्रतीकात्मक।
हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल में चल रहे एसएनसीयू के हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। यहां भर्ती बागेश्वर की एक नवजात ने इलाज के दौरान सोमवार की दोपहर में दम तोड़ दिया। परिजनों ने डॉक्टरों और कर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
बागेश्वर निवासी सरिता के नवजात को छह मार्च को सुशीला तिवारी अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती कराया गया था। सोमवार की दोपहर में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। सरिता के रिश्तेदार भूपेंद्र ने कहा कि एसएनसीयू में कोई डॉक्टर या कर्मचारी यह बताने को तैयार नहीं था कि नवजात की हालत कैसी है। एसटीएच के एमएस डॉ. अरुण जोशी ने बताया कि नवजात की हालत बहुत गंभीर थी और सोमवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजन अगर कोई लिखित शिकायत करते हैं तो मामले की जांच कराई जाएगी।
बता दें कि एसएनसीयू में नवजातों की मौतें का आंकड़ा अचानक बढ़ने के कारण मेडिसिन विभाग की तीन सदस्यीय टीम ने जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपी थी। मार्च के पहले सप्ताह में बाहर से आई टीम ने भी एसएनसीयू में आए केसों की जांच की थी। सोमवार को एसएनसीयू की कार्यशैली को लेकर राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा की अध्यक्षता में दो घंटे तक बैठक हुई। डॉ. भैसोड़ा ने माना कि एसएनसीयू में नवजातों की मौत के मामले बढ़े हैं। साथ ही कहा कि एसएनसीयू पर अभी सीधे तौर पर प्राचार्य और एसटीएच का कोई नियंत्रण नहीं है। भारत सरकार से पत्राचार कर अधिकार देने को कहा जाएगा। एसटीएच में कार्यरत कुछ डॉक्टरों की पत्नी ही बतौर डॉक्टर एसएनसीयू में तैनात हैं। डॉ. भैसोड़ा ने बताया कि पीजी जेआर समेत अन्य डॉक्टरों एवं स्टाफ को कार्यशैली में सुधार करने को कहा गया है। एसएनसीयू में कार्यरत डॉक्टरों और कर्मियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। लापरवाही करने पर रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
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बागेश्वर निवासी सरिता के नवजात को छह मार्च को सुशीला तिवारी अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती कराया गया था। सोमवार की दोपहर में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। सरिता के रिश्तेदार भूपेंद्र ने कहा कि एसएनसीयू में कोई डॉक्टर या कर्मचारी यह बताने को तैयार नहीं था कि नवजात की हालत कैसी है। एसटीएच के एमएस डॉ. अरुण जोशी ने बताया कि नवजात की हालत बहुत गंभीर थी और सोमवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजन अगर कोई लिखित शिकायत करते हैं तो मामले की जांच कराई जाएगी।
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बता दें कि एसएनसीयू में नवजातों की मौतें का आंकड़ा अचानक बढ़ने के कारण मेडिसिन विभाग की तीन सदस्यीय टीम ने जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपी थी। मार्च के पहले सप्ताह में बाहर से आई टीम ने भी एसएनसीयू में आए केसों की जांच की थी। सोमवार को एसएनसीयू की कार्यशैली को लेकर राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा की अध्यक्षता में दो घंटे तक बैठक हुई। डॉ. भैसोड़ा ने माना कि एसएनसीयू में नवजातों की मौत के मामले बढ़े हैं। साथ ही कहा कि एसएनसीयू पर अभी सीधे तौर पर प्राचार्य और एसटीएच का कोई नियंत्रण नहीं है। भारत सरकार से पत्राचार कर अधिकार देने को कहा जाएगा। एसटीएच में कार्यरत कुछ डॉक्टरों की पत्नी ही बतौर डॉक्टर एसएनसीयू में तैनात हैं। डॉ. भैसोड़ा ने बताया कि पीजी जेआर समेत अन्य डॉक्टरों एवं स्टाफ को कार्यशैली में सुधार करने को कहा गया है। एसएनसीयू में कार्यरत डॉक्टरों और कर्मियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। लापरवाही करने पर रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
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