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एनईपी- प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए स्किल्ड होने की राह मुश्किल
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हल्द्वानी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों के कौशल विकास पर भी जोर दिया गया है, ताकि वह समय पर रोजगार पा सकें। एनईपी में कौशल विकास पाठ्यक्रमों की एक अलग स्ट्रीम है। इनमें छात्र-छात्राओं को अपने पसंद का पाठ्यक्रम चुनना है। पहले सेमेस्टर के बाद पाठ्यक्रम बदल जाएगा। दूसरे सेमेस्टर में अलग कौशल कोर्सों का चुनाव करना होगा। एमबीपीजी समेत कई महाविद्यालयों में कौशल कोर्स संचालित होने लगे हैं, लेकिन अब भी कई ऐसे महाविद्यालय हैं जिनमें ये कौशल कोर्स शुरू नहीं हो सके हैं। सबसे ज्यादा चुनौती एक ही संकाय वाले महाविद्यालयों के लिए बनी है।
प्रदेश में 119 महाविद्यालय है। इनमें करीब 43 महाविद्यालय ऐसे हैं जिनमें कला संकाय की कक्षाएं चलती हैं। ऐसे महाविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए पहले सेमेस्टर में स्किल्ड होने की राह मुश्किल नजर आ रही है। एनईपी में कौशल विकास से हर सेमेस्टर में एक कोर्स करना आवश्यक है। इसके छात्र-छात्राओं को क्रडिट मिलेंगे जो अगले सेमेस्टर में जोड़े जाएंगे। दूरस्थ क्षेत्रों में संचालित एक ही संकाय वाले महाविद्यालयों में कौशल विकास पाठ्यक्रम के संचालित करने में कई चुनौतियां सामने आ रही है। ऐसे में यहां के छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन ही किसी मान्यता प्राप्त सरकारी या निजी संस्था से कौशल कोर्सों का चुनाव करना होगा। तभी उनके प्रथम सेमेस्टर की पढ़ाई पूरी मानी जाएगी।
इधर, महिला डिग्री कॉलेज के डॉ. फकीर सिंह नेगी ने बताया कि बीकॉम में 90 प्रतिशत छात्राओं ने समर्थ पोर्टल इत्यादि से कौशल विकास पाठ्यक्रम का चुनाव कर लिया है। एक पाठ्यक्रम की फीस एक हजार रुपये है। वहीं एबीपीजी के प्राचार्य डॉ. एनएस बनकोटी ने बताया कि महाविद्यालय में जो स्किल कोर्स संचालित हो रहे हैं। उनकी अलग से कोई फीस नहीं ली जाएगी। यह पाठ्यक्रम के साथ शामिल हैं।
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इनसेट
स्किल कोर्स की चुकानी होगी अलग राशि
प्रदेश के जिन महाविद्यालयों में एनईपी के कौशल विकास कोर्स संचालित नहीं हो रहे हैं। वहां के विद्यार्थियों को समर्थ पोर्टल या अन्य किसी माध्यम से मान्यता प्राप्त सरकारी और निजी संस्थानों के कौशल कोर्स करने होंगे। इसके लिए छात्र-छात्राओं को अलग से फीस भरनी होगी। एनईपी की गाइडलाइन के अनुसार कौशल कोर्स करना आवश्यक है।
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प्रदेश में 119 महाविद्यालय है। इनमें करीब 43 महाविद्यालय ऐसे हैं जिनमें कला संकाय की कक्षाएं चलती हैं। ऐसे महाविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए पहले सेमेस्टर में स्किल्ड होने की राह मुश्किल नजर आ रही है। एनईपी में कौशल विकास से हर सेमेस्टर में एक कोर्स करना आवश्यक है। इसके छात्र-छात्राओं को क्रडिट मिलेंगे जो अगले सेमेस्टर में जोड़े जाएंगे। दूरस्थ क्षेत्रों में संचालित एक ही संकाय वाले महाविद्यालयों में कौशल विकास पाठ्यक्रम के संचालित करने में कई चुनौतियां सामने आ रही है। ऐसे में यहां के छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन ही किसी मान्यता प्राप्त सरकारी या निजी संस्था से कौशल कोर्सों का चुनाव करना होगा। तभी उनके प्रथम सेमेस्टर की पढ़ाई पूरी मानी जाएगी।
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इधर, महिला डिग्री कॉलेज के डॉ. फकीर सिंह नेगी ने बताया कि बीकॉम में 90 प्रतिशत छात्राओं ने समर्थ पोर्टल इत्यादि से कौशल विकास पाठ्यक्रम का चुनाव कर लिया है। एक पाठ्यक्रम की फीस एक हजार रुपये है। वहीं एबीपीजी के प्राचार्य डॉ. एनएस बनकोटी ने बताया कि महाविद्यालय में जो स्किल कोर्स संचालित हो रहे हैं। उनकी अलग से कोई फीस नहीं ली जाएगी। यह पाठ्यक्रम के साथ शामिल हैं।
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स्किल कोर्स की चुकानी होगी अलग राशि
प्रदेश के जिन महाविद्यालयों में एनईपी के कौशल विकास कोर्स संचालित नहीं हो रहे हैं। वहां के विद्यार्थियों को समर्थ पोर्टल या अन्य किसी माध्यम से मान्यता प्राप्त सरकारी और निजी संस्थानों के कौशल कोर्स करने होंगे। इसके लिए छात्र-छात्राओं को अलग से फीस भरनी होगी। एनईपी की गाइडलाइन के अनुसार कौशल कोर्स करना आवश्यक है।