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Nainital News: नेहा पाल ने खोजी दुनिया की नई लाइकेन प्रजाति
Wed, 14 Oct 2026 01:22 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Wed, 14 Oct 2026 01:22 AM IST
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नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर की शोध छात्रा नेहा पाल ने लाइकेन पर शोध के दौरान महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने उत्तराखंड में 47 ऐसी लाइकेन प्रजातियों को दर्ज किया है जिनकी जानकारी इससे पहले राज्य के संदर्भ में उपलब्ध नहीं थी। इसके साथ ही भारत के लिए चार नई प्रजातियों के रिकॉर्ड सामने आए हैं जिनमें एक प्रजाति विज्ञान जगत के लिए पूरी तरह नई है।
नेहा की इस उपलब्धि में सबसे खास खोज अल्मोड़ा स्थित बिनसर वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र से मिली लाइकेन प्रजाति है। इसे ‘ऑलोग्राफा बिनसारेन्सिस’ नाम दिया गया है। इस नई प्रजाति का विवरण प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जर्नल द ब्रायोलॉजिस्ट में प्रकाशित हुआ है।
शोध के दौरान ग्राफिस एंटीलारम लाइकेन को भारतीय उपमहाद्वीप में पहली बार दर्ज किया गया जबकि लेसिडेला डेस्टीट्यूटा लाइकेनको भारत के लिए नए रिकॉर्ड के रूप में शामिल किया गया। इन प्रजातियों से संबंधित शोध क्रमशः बायोलॉजी बुलेटिन और फेड्स रेपर्टोरियम जैसे वैज्ञानिक जर्नलों में प्रकाशित हुआ। इसके अलावा, उत्तराखंड में पहली बार दर्ज की गई 13 बुएलॉयड लाइकेन प्रजातियों पर शोध को प्रतिष्ठित पत्रिका कवका में स्थान मिला है।
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वायु प्रदूषण के प्राकृतिक सूचक हैं लाइकेन
लाइकेन कवक और शैवाल के सहजीवी संबंध से बनने वाले जीव-समूह हैं। इनकी कई प्रजातियां वायु प्रदूषण के प्रति संवेदनशील होती हैं। इसलिए वैज्ञानिक इनका उपयोग हवा की गुणवत्ता और पर्यावरणीय बदलावों का आकलन करने में करते हैं।
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नेहा की इस उपलब्धि में सबसे खास खोज अल्मोड़ा स्थित बिनसर वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र से मिली लाइकेन प्रजाति है। इसे ‘ऑलोग्राफा बिनसारेन्सिस’ नाम दिया गया है। इस नई प्रजाति का विवरण प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जर्नल द ब्रायोलॉजिस्ट में प्रकाशित हुआ है।
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शोध के दौरान ग्राफिस एंटीलारम लाइकेन को भारतीय उपमहाद्वीप में पहली बार दर्ज किया गया जबकि लेसिडेला डेस्टीट्यूटा लाइकेनको भारत के लिए नए रिकॉर्ड के रूप में शामिल किया गया। इन प्रजातियों से संबंधित शोध क्रमशः बायोलॉजी बुलेटिन और फेड्स रेपर्टोरियम जैसे वैज्ञानिक जर्नलों में प्रकाशित हुआ। इसके अलावा, उत्तराखंड में पहली बार दर्ज की गई 13 बुएलॉयड लाइकेन प्रजातियों पर शोध को प्रतिष्ठित पत्रिका कवका में स्थान मिला है।
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लाइकेन कवक और शैवाल के सहजीवी संबंध से बनने वाले जीव-समूह हैं। इनकी कई प्रजातियां वायु प्रदूषण के प्रति संवेदनशील होती हैं। इसलिए वैज्ञानिक इनका उपयोग हवा की गुणवत्ता और पर्यावरणीय बदलावों का आकलन करने में करते हैं।