पढ़ाई जरूरी, पर जिंदगी से बड़ी तो नहीं
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कुछ दिन पहले पढ़कर कुछ बनने का सपना देख रही नवीं की छात्रा आशा के एक डंपर के चलते मौत हो गई। तब से गांव में भय बना हुआ है। आशा का भाई कमल सिंह कहते हैं कि सैकड़ों डंपर दिन-रात सड़क, गलियों को रौंद रहे हैं। इनसे पत्थर उछल कर गिरते रहते हैं, इसी से आशा की मौत हो गई। अब बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं। सुनीता और फूलदेवी कहती हैं कि बच्चों की जान का खतरा है... कैसे स्कूल भेजे। चंदरी राम कहते है कि कुछ दिन तो माता-पिता अपने सुरक्षा में में जैसे तैसे स्कूल बच्चो को लाने और छोड़ने जाते थे, पर आशा की मौत ने हिम्मत तोड़ दी। स्कूल तो छोड़ो घर के पास ही डंपर दौड़ रहे हैं, बच्चो को आंगन तक भेजने में खतरा लगता है। करीब एक महीने से अधिकांश बच्चे स्कूल नहीं गए हैं, यह बच्चों की जिंदगी का सवाल है।