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Jamrani Dam: जंगल का राजा, जमरानी बांध में नहीं बनेगा बाधा; वाइल्ड लाइफ बोर्ड ने इन शर्तों के साथ दी स्वीकृति

Tue, 12 Mar 2024 12:10 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: हीरा मेहरा Updated Tue, 12 Mar 2024 12:10 PM IST
सार

Jamrani Dam: नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड की स्टैडिंग कमेटी ने जमरानी बांध क्षेत्र में आ रहे टाइगर कॉरिडोर के मामले में 16 शर्ताें के साथ स्वीकृति दे दी है।
 

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NBWL has given approval with 16 conditions in the case of Tiger Corridor coming under Jamrani Dam
जमरानी बांध परियोजना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अब जमरानी बांध परियोजना में जंगल के राजा के बाधा बनने की अड़चन दूर होती दिख रही है। नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड की स्टैडिंग कमेटी ने जमरानी बांध क्षेत्र में आ रहे टाइगर कॉरिडोर के मामले में 16 शर्ताें के साथ स्वीकृति दे दी है।

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जमरानी बांध परियोजना के लिए लंबे समय से तक वन भूमि हस्तांतरण का मामला फंसा रहा। बाद में स्टेज-एक और स्टेज-दो की अनुमति मिल गई। इस अनुमति के बाद भी पूरी तरह रास्ता साफ नहीं हुआ। बांध के इलाके में बाघ के दुधवा-लग्गा टाइगर काॅरिडोर को लेकर चिंता गहरा गई। बांध बनने से काॅरिडोर पर पड़ने वाले प्रभावों के आकलन को लेकर एनटीसीए, जंगलात, वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया टीम के विशेषज्ञों की एक कमेटी भी अध्ययन के लिए पहुंची थी। इसके अलावा टाइगर काॅरिडोर मैनेजमेंट प्लान के साथ बाघ और दूसरे वन्यजीवों के संरक्षण करीब 22 करोड़ का बजट भी रखा गया। बाघ और काॅरिडोर जैसे संवेदनशील विषय को देखते हुए प्रकरण नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड तक पहुंचा था। इसमें 28 फरवरी को बोर्ड ने 16 शर्ताें के साथ स्वीकृति प्रदान की है। इन शर्तों का अनुपालन राज्य सरकार को करना होगा।

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इन शर्तों का अनुपालन करना होगा

- वन भूमि का दूसरा उपयोग नहीं कर सकेंगे

- परियोजना की मानीटरिंग डीएफओ करेंगे और कोई उल्लंघन होने पर रिपोर्ट करेंगे

- कोई भी श्रमिक बस्ती फाॅरेस्ट इलाके में नहीं बनेगी

- डीएफओ दुधवा लग्गा टाइगर काॅरिडोर काॅरिडोर मैनेजमेंट प्लान को पूरा कराना सुनिश्चित करेंगे।

- परियोजना की पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करेंगे

- वाइल्ड लाइफ एक्ट का पालन करेंगे

- काॅरिडोर की उत्तरी दिशा में जमरानी बांध की ऊंचाई आंशिक कम करेंगे

- जमरानी बांध में दाएं किनारे पर प्रस्तावित पावर हाउस योजना का हिस्सा, जो कि उत्तरी दिशा में प्रस्तावित है, उसे छोड़ दें

- बाघ के मूवमेंट के विशेष व्यवस्था की जाएगी, स्ट्रक्चर बनेंगे

- हल्द्वानी शहर की उत्तरी दिशा में कोई भी विकास कार्य नहीं होगा, काॅरिडोर क्षेत्र में मानवीय हस्तक्षेप कम किया जाएगा। यहां पर बायो फैसिंग की जाएगी।

नई तकनीक से मानीटरिंग होगी, खर्चा उठायेगा सिंचाई विभाग
नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड के मिनट्स जारी हुए हैं, उसमें कहा गया है कि इलाके में जंगलात वाइल्ड लाइफ की मानीटरिंग करेगा। इसमें कैमरा ट्रैप और ड्रोन से किया जाएगा। इसमें आने वाले खर्च की व्यवस्था सिंचाई विभाग करेगा। इसके अलावा कॉरिडोर में वास स्थल सुधार किया जाएगा। साथ ही आधुनिक तरीके से पेट्रोलिंग की जाएगी। बांध बनने के दौरान और बाद के दस साल तक लगातार अध्ययन विशेष संस्था के माध्यम से किया जाएगा। हर साल शर्तों के अनुपालन का प्रमाणपत्र भी भेजना होगा।

क्या कहते हैं अधिकारी
प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव समीर सिन्हा कहते हैं कि नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसमें कई शर्त लगाई गई हैं, जिनका अनुपालन किया जाएगा। नैनीताल वन प्रभाग के डीएफओ चंद्रशेखर जोशी कहते हैं कि टाइगर कॉरिडोर मैनेजमेंट प्लान के तहत करीब 22 करोड़ की राशि रखी गई है, जिससे दस सालों तक क्रम से खर्च किया जाएगा।


 

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