फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   National Diabetes annual session started

राष्ट्रीय डायबिटीज वार्षिक अधिवेशन शुरू

Sun, 11 Oct 2015 02:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/रामनगर।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/रामनगर। Updated Sun, 11 Oct 2015 02:04 AM IST
विज्ञापन

उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश का 14वां राष्ट्रीय डायबिटीज का दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन शनिवार को ढिकुली के रिजोर्ट में शुरू हुआ। जिसका शुभारंभ वित्त मंत्री डॉ. इंदिरा हृदयेश ने किया।

विज्ञापन


उन्होंने कहा कि यह उत्तराखंड के लिये गर्व की बात है, कि डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी की जागरूकता एवं उसके तकनीकी, चिकित्सकीय पक्ष पर मंथन करने के लिये राष्ट्रीय सेमिनार हो रहा है, इस सेमिनार में डॉक्टरों के विचार विमर्श एवं सुझावों से जो तथ्य सामने आए हैं वह निश्चित ही जनस्वास्थ्य के लिए लाभदायक होंगे।
विज्ञापन


अधिवेशन में चेन्नई से आये विशेषज्ञ बी मोहन, रणजीत उन्नीकृष्ण, डॉ. केजी शेषाद्रि, हैदराबाद के डॉ. राकेश सहाय, इलाहाबाद की डॉ. सरिता बजाज ने शोधपत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने डायबिटीज की रोकथाम, दवा और इंसुलिन की मात्रा घटाने के बारे में चर्चा की।
विज्ञापन
विज्ञापन


 विशेषज्ञों ने बताया कि दुनियाभर में डायबिटीज के करीब 40 करोड़ मरीज हैं। इनमें 6.57 करोड़ हमारे देश में हैं और बढ़ते जा रहे है। डायबिटीज का मुख्य कारण शारीरिक श्रम न करना, व्यायाम, पैदल भ्रमण न करना, खान-पान, रहन-सहन, धूम्रपान, एलकोहल हैं।

 इस दौरान हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने एक शोधपत्र भी प्रस्तुत किया। अधिवेशन रविवार को भी जारी रहेगा। कार्यक्रम में अधिवेशन के चेयरमैन डॉ. केसी लोहनी, सचिव डॉ. निलांबर भट्ट, मीडिया प्रभारी डॉ. डीसी पंत, एमसी तिवारी, भूषण कपूर, त्रिलोचन सिंह, प्रकाश पंत, अरुण जोशी, विवेक सत्यवली आदि थे।

 भारत सरकार ने नियम बनाया है कि सभी सरकारी अस्पतालों में टीबी मरीजों को डायबिटीज की भी जांच करानी होगी। इंडियन चेस्ट सोसायटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पल्मोनरी मेडिसिन विभाग किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ के विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि अक्सर टीबी और डायबिटीज के मरीज एक ही जांच कराते हैं जो अधूरी है।

 उन्होंने बताया कि डायबिटीज, टीबी का घनिष्ठ संबंध है, क्योंकि टीबी के कीटाणु डायबिटीज की बाउंडरी लाइन वाले मरीजों को भी पूरी तरह डायबिटीज में बदल देते हैं। टीबी डायबिटीज को और डायबिटीज टीबी को बढ़ावा देता है। इसलिए दोनों की जांच जरूरी है।

 डॉ. सूर्यकांत ने बताया डायबिटीज फैलने वाली बीमारी नहीं है जबकि टीबी संक्रामक रोग है। उन्होंने बताया कि देश में टीबी के 80 लाख मरीज, डायबिटीज के 6.57 करोड़ मरीज हैं। डायबिटीज की अपेक्षा टीबी में मृत्यु दर ज्यादा होती है, इससे दुनिया में हर डेढ़ मिनट में टीबी के मरीज मौत के मुंह में समा जाते हैं।


 टीबी का मरीज एक साल में 15 नये टीबी रोगी बना देता है, जबकि डायबिटीज में ऐसा नहीं होता। उन्होंने बताया कि टीबी के कीटाणु अधिकतर लोगों में पाए जाते हैं लेकिन यह बीमारी सभी को नहीं होती। डायबिटीज वालों के खून में शुगर ज्यादा होती है। जिससे कीटाणु बढ़ जाते हैं। जिससे शरीर का सुरक्षा तंत्र कमजोर हो जाता है और वह अन्य रोगों से लड़ने की क्षमता घटा देता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed