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ऐतिहासिक और भव्य होगा नंदा देवी महोत्सव
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/नैनीताल।
Updated Mon, 24 Aug 2015 01:11 AM IST
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नंदा देवी महोत्सव को ऐतिहासिक और भव्य स्वरूप दिया जाएगा। उत्तराखंड की सांस्कृतिक और लोक विधाओं को संरक्षित करने के लिए प्रदेश भर से सांस्कृतिक टीमें आमंत्रित की जाएंगी। नंदा देवी महोत्सव को राज्य का प्रमुख मेला घोषित किए जाने के लिए राज्य सरकार स्तर पर पहल करने के सुझाव भी दिए गए।
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रामसेवक सभा की ओर से बुलाई गई बैठक में मेले को भव्य रूप देने के साथ ही इसे राज्य का प्रमुख मेला घोषित करने की मांग की गई।
श्री रामसेवक सभा के सभागार में हुई बैठक में इस बार नंदा देवी महोत्सव में श्रद्धालुओं को पूजा अर्चना में परेशानी न हो, इसके लिए लोगों ने पुजारियों की संख्या बढ़ाए जाने का भी सुझाव दिया।
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साथ ही, मंदिर के आसपास गड्ढों के भरे जाने, बल्दियाखान और आसपास के लोगों को मेला स्थल तक लाने के लिए अतिरिक्त वाहन लगाए जाएं। वर्ष का कलेंडर महोत्सव से पहले घोषित किया जाए।
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साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने के लिए मंदिर परिसर के आसपास अतिरिक्त डस्टबिन लगाए जाएं। इस बार निबंध प्रतियोगिता भी कराई जाए।
सुझाव देने वालों में डा. रमेश पांडे, जगदीश लोहन, पूर्व विधायक डा. नारायण सिंह जंतवाल, डा. मनोज बिष्ट, डा. ललित तिवारी, डीके शर्मा, शांति मेहरा, नवीन साह, भगवती सुयाल थे।
इस मौके पर अध्यक्ष मुकेश जोशी, महासचिव राजेंद्र लाल साह, गंगा प्रसाद साह, मुकुल जोशी, संजय कुमार संजू, किशन सिंह नेगी, अजय बिष्ट, दीपक कुमार भोलू, जगदीश बवाड़ी, कमलेश ढौंढियाल, डा. एनएस राणा, ज्योति, चंद्रा पंत, नीमा बिष्ट, अमिता साह आदि मौजूद थे।
बैठक में तय किया गया कि इस बार मां नंदा और सुनंदा की मूर्तियों के निर्माण के लिए कदली वृक्ष ज्योलीकोट के नजदीक चोपड़ा गांव से लाए जाने पर आम सहमति बनी।
112वां श्री नंदा देवी महोत्सव 18 सितंबर से 23 सितंबर तक चलेगा। 18 सितंबर को चोपड़ा गांव से लाए जाने वाले कदली वृक्षों का पूजन होगा। 19 को कदली वृक्षों को लाया जाएगा।
उसी दिन दोपहर में कदली वृक्षों का नगर भ्रमण पारंपरिक पारंपरिक वेशभूषा और भजन कीर्तन के साथ होगा। शोभायात्रा नगर भ्रमण करेगी।
फोटो: 23 एनटीएल 04 पी।