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प्रो. शेर सिंह बिष्ट का निधन
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एसटीएच में रविवार देर रात ली अंतिम सांस
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कोविड नियमों के तहत हुआ अंतिम संस्कार
संवाद न्यूज एजेंसी
हल्द्वानी। हिंदी और कुमांऊनी के लेखक, कवि, शोधकर्ता और समीक्षक प्रो. शेर सिंह बिष्ट का 68 वर्ष की आयु में निधन हो गया। कोविड संक्रमण की चपेट में आने से रविवार देर रात तीन बजे सुशीला तिवारी अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया।
सोमवार को कोविड नियमों के तहत उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया है। उनके निधन पर समूचे साहित्य जगत में शोक की लहर है। उनकी 46 पुस्तकें अब तक प्रकाशित हो चुकीं है। हिंदी, कुमाऊंनी में साहित्य लेखन के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुके हैं।
कुमाऊं विश्वविद्यालय के एसएसजे कैंपस अल्मोड़ा में हिंदी विभागाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त रहे प्रो. बिष्ट मूल रूप से अल्मोड़ा में भनोली तहसील के डूंगरा गाँव निवासी थे। वर्तमान में वह रौतेला कालोनी, रूपनगर हल्द्वानी में रह रहे थे। वह अपने पीछे पत्नी विमला देवी, दो पुत्र पृथ्वीपाल और आदित्य प्रताप के अलावा नाती, पोतों से भरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके बड़े पुत्र पृथ्वीपाल हल्द्वानी के एक अस्पताल में कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं, उन्हें निधन की सूचना नहीं दी गई है। छोटा बेटा ऑस्ट्रेलिया में है।
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डॉ. बिष्ट की धर्मपत्नी विमला देवी ने बताया कि तीन दिन पहले तक वह स्वस्थ थे। सांस लेने में दिक्कत हुई तो भर्ती हो गए। अंत में अंतिम दर्शन भी नहीं कर सके। उनके मित्र डॉ. गजेंद्र बटोही ने बताया कि वह एक और किताब का लेखन पूरा कर चुके हैं जिसे पब्लिश कराने की तैयारी चल रही थी।
फ़ोटो- फ़ाइल फ़ोटो ट्रैक से
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