पेंशन मामले में दो जजों की राय अलग-अलग: वृहद पीठ लेगी निर्णय, मुख्य न्यायाधीश 3 जजों की पीठ ने की सुनवाई
अस्थायी कार्मिक के तौर पर की गई सेवा पेंशन के उद्देश्य से नियमित सेवा अवधि में जोड़ी जाए या नहीं, इस पर डबल बेंच के दोनों जजों की राय अलग-अलग होने के कारण अब हाईकोर्ट की वृहद पीठ निर्णय करेगी।
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अस्थायी कार्मिक के तौर पर की गई सेवा पेंशन के उद्देश्य से नियमित सेवा अवधि में जोड़ी जाए या नहीं, इस पर डबल बेंच के दोनों जजों की राय अलग-अलग होने के कारण अब हाईकोर्ट की वृहद पीठ निर्णय करेगी। मुख्य न्यायाधीश जी नरेंदर, न्यायमूर्ति आलोक वर्मा व न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की पीठ ने बृहस्पतिवार को सुनवाई की।
यह मामला वन विभाग में फॉरेस्ट गार्ड के पद पर अलग-अलग डिवीजन से सेवानिवृत्त कर्मियों से संबंधित है। कुंदन सिंह गड़िया व 120 अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि वे 2018 और 19 में सेवानिवृत्त हुए थे। पूर्व में खंडपीठ ने आदेश पारित कर 2013 की स्थायीकरण नियमावली के तहत कार्मिकों को न्यूनतम दस वर्ष की निरंतर सेवा के आधार पर ही नियमित किए जाने का आदेश दिया था। लेकिन जो कार्मिक नियमित होने के बाद दस साल से कम अवधि में रिटायर हुए है, उन्हें पेंशन का लाभ नहीं दिया जा रहा था।
इस पर इन कार्मिकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उनकी अस्थायी सेवा की अवधि को भी पेंशन के उद्देश्य से जोड़ा जाए। लार्जर बेंच यह तय करेगी कि अस्थायी कार्मिक के तौर पर की गई सेवा को पेंशन के उद्देश्य से नियमित सेवा अवधि में जोड़ा जाए या नहीं।