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51 शक्तिपीठों में से एक है नैनीताल का नयना देवी मंदिर
भूपेंद्र मोहन रौतेला नैनीताल।
Updated Mon, 13 Jun 2016 12:39 AM IST
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सरोवर नगरी नैनीताल के उत्तरी किनारे पर स्थित मां नयना देवी मंदिर भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है कि मां सती के नयन नैनी झील में गिरने के बाद मां सती के शक्तिरूप की पूजा के उद्देश्य से ही नयना देवी मंदिर की स्थापना हुई। यह मंदिर नेपाल की पैगोड़ा और गौथिक शैली का समावेश है। शहरवासियों समेत लोगों की मंदिर से जुड़ी आस्था का अंदाजा इसी से लगया जा सकता है कि जो भी देशी-विदेशी सैलानी नैनीताल घूमने आता है मां के दर्शन किए बिना नहीं लौटता। मां नयना देवी सभी भक्तजनों की मनोकामना पूरी करती है।
मंदिर की पौराणिक मान्यता
नैनीताल। पुराणों में उल्लेख है कि दक्ष पुत्री सती का विवाह शिव के साथ हुआ। एक बार दक्ष ने यज्ञ करवाया। जिसमें शिव-सती को नहीं बुलाया गया। सती अपने पिता के घर आई। यज्ञ में शिव की आहुति न दिये जाने से अपमानित देवी ने आत्मदाह कर लिया। गुस्साएं भगवान शिव ने तांडव करते हुए दक्ष की यज्ञशाला नष्ट कर दी और सती का शव लेकर कैलास पर्वत की ओर जाने लगे। अनहोनी की आशंका से विष्णु ने सती के शव पर चक्र चला दिया। इससे उनके शरीर के अंग कटकर 51 स्थानों पर जा गिरे। उमा की बांयी आंख नैनीताल के नैनीझील में गिरी।
मंदिर का वर्तमान स्वरुप
नैनीताल में बोट हाउस क्लब और पंत पार्क के निकट मंदिर की स्थापना हुई थी। 1880 में शहर में आए भयंकर भूस्खलन से मंदिर ध्वस्त हो गया। बताया जाता है कि श्री मां नयना देवी मंदिर ने नगर के प्रमुख व्यवसायी मोती राम साह के पुत्र अमर नाथ साह को स्वप्न में उस स्थान का पता बताया जहां उनकी मूर्ति दबी पड़ी थी। अमरनाथ शाह ने अपने मित्रों की मदद से देवी की मूर्ति का उद्धार किया और नए सिरे से मंदिर का निर्माण किया। बाद में यह मंदिर 1883 में बनकर तैयार हो गया।
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स्थापना दिवस पर होंगे विविध अनुष्ठान
नैनीताल। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष जेपी साह ने बताया कि 13 जून को श्री मां नयना देवी के जन्मोत्सव( स्थापना दिवस) के मौके पर ब्रह्म मुहूर्त में श्री मां की आरती, 8 बजे कुल पूजा, 11 बजे महायज्ञ, 1 बजे सुंदरकांड, 2 बज से भंडारा तथा संगीत कला अकादमी के सहयोग से शाम को 5 बजे से भजन संध्या होगी। ब्यूरो
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मंदिर की पौराणिक मान्यता
नैनीताल। पुराणों में उल्लेख है कि दक्ष पुत्री सती का विवाह शिव के साथ हुआ। एक बार दक्ष ने यज्ञ करवाया। जिसमें शिव-सती को नहीं बुलाया गया। सती अपने पिता के घर आई। यज्ञ में शिव की आहुति न दिये जाने से अपमानित देवी ने आत्मदाह कर लिया। गुस्साएं भगवान शिव ने तांडव करते हुए दक्ष की यज्ञशाला नष्ट कर दी और सती का शव लेकर कैलास पर्वत की ओर जाने लगे। अनहोनी की आशंका से विष्णु ने सती के शव पर चक्र चला दिया। इससे उनके शरीर के अंग कटकर 51 स्थानों पर जा गिरे। उमा की बांयी आंख नैनीताल के नैनीझील में गिरी।
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मंदिर का वर्तमान स्वरुप
नैनीताल में बोट हाउस क्लब और पंत पार्क के निकट मंदिर की स्थापना हुई थी। 1880 में शहर में आए भयंकर भूस्खलन से मंदिर ध्वस्त हो गया। बताया जाता है कि श्री मां नयना देवी मंदिर ने नगर के प्रमुख व्यवसायी मोती राम साह के पुत्र अमर नाथ साह को स्वप्न में उस स्थान का पता बताया जहां उनकी मूर्ति दबी पड़ी थी। अमरनाथ शाह ने अपने मित्रों की मदद से देवी की मूर्ति का उद्धार किया और नए सिरे से मंदिर का निर्माण किया। बाद में यह मंदिर 1883 में बनकर तैयार हो गया।
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स्थापना दिवस पर होंगे विविध अनुष्ठान
नैनीताल। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष जेपी साह ने बताया कि 13 जून को श्री मां नयना देवी के जन्मोत्सव( स्थापना दिवस) के मौके पर ब्रह्म मुहूर्त में श्री मां की आरती, 8 बजे कुल पूजा, 11 बजे महायज्ञ, 1 बजे सुंदरकांड, 2 बज से भंडारा तथा संगीत कला अकादमी के सहयोग से शाम को 5 बजे से भजन संध्या होगी। ब्यूरो