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Nainital News: आधुनिक तकनीकों से बदलेगी पर्वतीय मत्स्य पालन की सूरत

Sun, 29 Mar 2026 01:52 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल Updated Sun, 29 Mar 2026 01:52 AM IST
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Modern techniques will change the face of mountain fisheries
नैनीताल। हिमालयी जल-संपदा के संरक्षण और पर्वतीय क्षेत्रों में नीली क्रांति को नई दिशा देने के उद्देश्य से कुमाऊं विवि के प्राणी विज्ञान विभाग की ओर से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। डीएसबी परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम और बायोफ्लॉक जैसी अत्याधुनिक तकनीक को स्वरोजगार का भविष्य करार दिया।
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मुख्य वक्ता डीसीएफआरआई (आईसीएआर) भीमताल के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. सुरेश चंद्र ने कहा कि भारत आज विश्व में मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। उन्होंने हिमालय की मूल प्रजाति स्नो ट्राउट के संरक्षण की आवश्यकता बताई और कहा कि व्यावसायिक दृष्टि से रेनबो ट्राउट वर्तमान में अधिक लाभकारी सिद्ध हो रही है।
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डॉ. चंद्र ने तराई क्षेत्रों के लिए कैटफिश और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए ग्रास कार्प व महाशीर जैसी प्रजातियों के पालन को स्वरोजगार का बेहतर जरिया बताया।
विभागाध्यक्ष प्रो. एचसीएस बिष्ट ने विभाग की उपलब्धियों और भविष्य की शोध योजनाओं को साझा किया। परिसर निदेशक प्रो. नीता बोरा शर्मा ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों के विकास के लिए ऐसी तकनीकी कार्यशालाएं आवश्यक हैं। प्रो. आशीष तिवारी के नेतृत्व में छात्रों ने मत्स्य पालन की नई तकनीक को जाना। इस मौके पर प्रो. ललित तिवारी, प्रो. हरिप्रिया, प्रो. रीना, डॉ. हिमांशु, डॉ. दीपक, डॉ. सीता देवली, डॉ. संदीप, डॉ. लज्जा भट्ट आदि मौजूद रहे।
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