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Nainital News: जिले में पुरुष भी हो रहे महिला के उत्पीड़न का शिकार
Mon, 07 Apr 2025 01:51 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Mon, 07 Apr 2025 01:51 AM IST
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हल्द्वानी। विडंबना हैं कि पत्नी के खिलाफ कार्रवाई के लिए घरेलू हिंसा कानून नहीं है, यही वजह है कि पुरुष भी महिलाओं के उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं। यह बात चौंकाने वाली जरूर है लेकिन महिला सेल के आंकड़े यही कड़वी हकीकत बयां कर रहे हैं।
महिला सुरक्षा के लिए बनाए कानून का दुरुपयोग तेजी से बढ़ रहा है जिसका शिकार पति हो रहे हैं। महिला हेल्पलाइन की इंचार्ज और सब-इंस्पेक्टर सुनीता कुंवर बताती हैं कि ज्यादातर शिकायतें पुरुषों की ओर से किए गए महिला उत्पीड़न से जुड़ी होती हैं। पर काउंसलिंग के दौरान पाया गया कि पुरुष अक्सर अपने साथ हो रहे अत्याचारों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने में झिझकते हैं। समाज में बनी इस धारणा के कारण कि पीड़ित केवल महिलाएं होती हैं। 100 में से करीब 10 मामले ऐसे पाए गए जिनमें महिला का कहीं और अफेयर था। पतियों पर लगाए दहेज उत्पीड़न, मारपीट करने जैसे आरोप गलत पाए गए। पूछताछ में सामने आया कि पुरुषों को भी महिलाओं के उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा है।
ये रहे महिला सेल के आंकड़े
महिला सेल में दर्ज शिकायतों के आंकड़े बताते हैं नैनीताल जिले में सबसे अधिक 1,411 शिकायतें आईं, इनमें से 1,393 मामलों को सुलझा लिया गया है। वहीं हल्द्वानी शहर के मामलों में गौर करें तो वर्ष 2024 में 930 मामले दर्ज किए गए जिनमें 412 में समझौता और 24 में केस पंजीकृत हुए। पति-पत्नी में सहमति न बनने पर 494 केस कोर्ट में भेजे गए। वहीं, कुमाऊं के छह जिलों में नवंबर 2023 से नवंबर 2024 तक महिला हिंसा की 3,078 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से 3,018 मामलों का निस्तारण किया गया।
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ईगो पैदा कर रहा दरार
महिला सेल में काउंसलिंग के दौरान एक बात खासतौर पर सामने आई है कि सप्ताह में 2-3 केस ऐसे सामने आते हैं जिनमें पति-पत्नी के बीच ईगो की समस्या होती है। यह ईगो इस बात को लेकर है कि वे एक-दूसरे से ज्यादा शिक्षित होना या ज्यादा सैलरी है। इस बात को लेकर भी तनाव है कि वे काम के चलते एक दूसरे को समय नहीं दे पाते। वहीं मोबाइल, सोशल मीडिया, पत्नी से दूरी, खर्च कम देने आदि को लेकर भी पति से झगड़ा होने पर महिलाएं हेल्पलाइन पहुंचीं हैं।
वर्जन
पुरुष उत्पीड़न का सीधा असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। यह उन्हें हताशा या आत्महत्या जैसे कदम उठाने के लिए मजबूर कर देता है। बेंगलुरु के अतुल सुभाष का मामला इसका ताजा उदाहरण है। पुरुषों को भी जागरूक करने और उनकी मदद के लिए एक सशक्त प्रणाली की आवश्यकता है। - डॉ. युवराज पंत, मनोचिकित्सक
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महिला सुरक्षा के लिए बनाए कानून का दुरुपयोग तेजी से बढ़ रहा है जिसका शिकार पति हो रहे हैं। महिला हेल्पलाइन की इंचार्ज और सब-इंस्पेक्टर सुनीता कुंवर बताती हैं कि ज्यादातर शिकायतें पुरुषों की ओर से किए गए महिला उत्पीड़न से जुड़ी होती हैं। पर काउंसलिंग के दौरान पाया गया कि पुरुष अक्सर अपने साथ हो रहे अत्याचारों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने में झिझकते हैं। समाज में बनी इस धारणा के कारण कि पीड़ित केवल महिलाएं होती हैं। 100 में से करीब 10 मामले ऐसे पाए गए जिनमें महिला का कहीं और अफेयर था। पतियों पर लगाए दहेज उत्पीड़न, मारपीट करने जैसे आरोप गलत पाए गए। पूछताछ में सामने आया कि पुरुषों को भी महिलाओं के उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा है।
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ये रहे महिला सेल के आंकड़े
महिला सेल में दर्ज शिकायतों के आंकड़े बताते हैं नैनीताल जिले में सबसे अधिक 1,411 शिकायतें आईं, इनमें से 1,393 मामलों को सुलझा लिया गया है। वहीं हल्द्वानी शहर के मामलों में गौर करें तो वर्ष 2024 में 930 मामले दर्ज किए गए जिनमें 412 में समझौता और 24 में केस पंजीकृत हुए। पति-पत्नी में सहमति न बनने पर 494 केस कोर्ट में भेजे गए। वहीं, कुमाऊं के छह जिलों में नवंबर 2023 से नवंबर 2024 तक महिला हिंसा की 3,078 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से 3,018 मामलों का निस्तारण किया गया।
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ईगो पैदा कर रहा दरार
महिला सेल में काउंसलिंग के दौरान एक बात खासतौर पर सामने आई है कि सप्ताह में 2-3 केस ऐसे सामने आते हैं जिनमें पति-पत्नी के बीच ईगो की समस्या होती है। यह ईगो इस बात को लेकर है कि वे एक-दूसरे से ज्यादा शिक्षित होना या ज्यादा सैलरी है। इस बात को लेकर भी तनाव है कि वे काम के चलते एक दूसरे को समय नहीं दे पाते। वहीं मोबाइल, सोशल मीडिया, पत्नी से दूरी, खर्च कम देने आदि को लेकर भी पति से झगड़ा होने पर महिलाएं हेल्पलाइन पहुंचीं हैं।
वर्जन
पुरुष उत्पीड़न का सीधा असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। यह उन्हें हताशा या आत्महत्या जैसे कदम उठाने के लिए मजबूर कर देता है। बेंगलुरु के अतुल सुभाष का मामला इसका ताजा उदाहरण है। पुरुषों को भी जागरूक करने और उनकी मदद के लिए एक सशक्त प्रणाली की आवश्यकता है। - डॉ. युवराज पंत, मनोचिकित्सक