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Nainital News: धड़कन की रफ्तार से कहीं पीछे न छूट जाए जिंदगी

Mon, 29 Sep 2025 02:20 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल Updated Mon, 29 Sep 2025 02:20 AM IST
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May life not lag behind the pace of heartbeat
हल्द्वानी। बीमार होने पर दिल चेतावनी देने लगता है। हृदय विशेषज्ञों के अनुसार धड़कन का अत्यधिक बढ़ना या कम होना घातक हो सकता है। वर्तमान में मिलावटी भोजन और शारीरिक परिश्रम कम होने के कारण मेजर और माइनर हार्ट अटैक के अलावा हार्ट फेलियर के मामले लगातार आ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जीवनशैली में बदलाव होने से फूड हैबिट बदल चुकी है और दिल की बीमारियां आम होने लगी हैं। बड़े-बूढ़ों के अलावा बच्चों में हृदयरोग के बढ़ते मामले भविष्य में गंभीर खतरों के प्रति आगाह कर रहे हैं।
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माइनर अटैक के 20 और हार्ट फेलियर के 15 मामले रोजाना
हल्द्वानी में इस समय मेजर हार्ट अटैक के प्रतिदिन तीन से चार और माइनर अटैक के 15 से 20 मामले रोजाना आ रहे हैं। करीब 15 मामले हार्ट फेलियर के हैं। इसमें व्यक्ति की सांस तेजी से फूलने लगती है। कोविड के बाद जीवनशैली इतनी ज्यादा बदल चुकी है कि अधिकतर लोग ऑनलाइन काम ज्यादा कर रहे हैं। बैठे-बैठे भोजन, देर रात तक काम और व्यायाम नहीं करने से युवावस्था में ही लोग हृदयरोगी बन रहे हैं। वर्तमान में युवाओं को बीपी और शुगर ने चपेट में ले लिया है। यही बाद में दिल की गंभीर बीमारी में बदल जाता है। इंसान को बीमारियों से पहले मिलने वाले संकेतों को समझना होगा और उसके लिए उपाय करने होंगे। - डाॅ. प्रकाश पंत, वरिष्ठ हृदयरोग विशेषज्ञ, हल्द्वानी।
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बचपन को संभालिए, 15-16 की उम्र से शुरू कर दें जांच
बच्चों में आउटडोर गेम कम हो गए हैं। योगाभ्यास की कमी, मीठे का ज्यादा सेवन, स्वस्थ आहार न लेने के कारण 28 से 30 वर्ष की उम्र में पहुंचते-पहुंचते युवाओं में अटैक के मामले आ रहे हैं। कुछ कारण आनुवांशिक भी होते हैं। बच्चों पर बचपन से ध्यान देने की जरूरत है। 15-16 साल की उम्र से ही बच्चों की बीपी, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच शुरू कर देनी चाहिए। युवाओं में डायबिटिक के 12 से 12 फीसदी और प्रीडायबेटिक के 15 फीसदी मामले रोजाना आ रहे हैं। हर रोज पांच से सात लोगों की एंजियोग्राफी अकेले हल्द्वानी में हो रही है। समय-समय पर किशोरों की भी ईसीजी, ईको, टीएमटी जांच करा लेनी चाहिए। - डाॅ. दिनेश चंद्र पंत, वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट, हल्द्वानी।
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यह करें उपाय
बीपी, शुगर की जांच के अलावा इनकी संख्या भी पता रखें।
फिजिकल कार्य ज्यादा करें यानि पैदल चलने का अभ्यास ज्यादा हो।
देर रात तक काम से बचें।
योगाभ्यास पर ज्यादा ध्यान दें।
रेगुलर फूड हैबिट पर ध्यान दें।
मांस पेशियों को मजबूत बनाएं।
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