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जब मैं लिखूंगा तो बहुत बम फूटेंगे : पायलट
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सचिन पायलट।
- फोटो : NAINITAL
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नैनीताल। राजस्थान के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा कि जब हमारी सरकार थी, तब हमसे सवाल पूछे जाते थे, आज सरकार हमारी नहीं है, तब भी सवाल हमसे ही पूछे जा रहे हैं। कुछ हिम्मत कर सत्ता में बैठे लोगों से भी सवाल करने की कोशिश करनी चाहिए। साहित्य की यदि बात करूं तो मैं ज्यादा नहीं पढ़ता, लेकिन पढ़ना जरूर चाहिए। बच्चे से लेकर बुजुर्ग सभी मोबाइल की जकड़ में हैं। रही मेरे लिखने की बात तो जब मैं लिखूंगा तो बहुत बम फूटेंगे, बस इंतजार कीजिए।
यह बातें हिमालयन इकोज संस्था की ओर से कला और साहित्य विषयक दो दिनी कार्यक्रम में पहुंचे पायलट ने कही। मंच पर सैफ महमूद ने शेर-ओ-शायरी के साथ उनसे साहित्य एवं राजनीति से जुड़े कई सवाल किए, जिनका सचिन पायलट ने हंसते मुस्कुराते हुए जवाब दिया। कहा कि 2004 में जब उनकी उम्र 26 वर्ष थी तब वह सांसद बने। राजनीति में जो आजकल का दौर चल रहा है वहां सभी भाषण देने वाले हैं, सुनने वाले नहीं। पहले आपसी संवाद होते थे, जो आज कहीं नहीं होते। आज कई लोग कहते हैं यह नेता अच्छा है और यह अच्छा नहीं है, लेकिन यह नेता हमारे ही गली मोहल्लों से आते हैं और इन्हें हम ही चुनते हैं।
आज की जो राजनीति है, वह टकराव की है। राजनीति में नेता अपने दुखों से दुखी नहीं हैं, वह दूसरे नेता के सुखों से दुखी हैं। आज के परिप्रेक्ष्य में यदि देखा जाए तो राजनीति में लोग व्यक्ति का विरोध करते हैं। व्यक्ति को बुरा भला कहने लगते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि व्यक्ति के परिवार को नहीं उसके काम को बुरा भला कहना चाहिए।
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यह बातें हिमालयन इकोज संस्था की ओर से कला और साहित्य विषयक दो दिनी कार्यक्रम में पहुंचे पायलट ने कही। मंच पर सैफ महमूद ने शेर-ओ-शायरी के साथ उनसे साहित्य एवं राजनीति से जुड़े कई सवाल किए, जिनका सचिन पायलट ने हंसते मुस्कुराते हुए जवाब दिया। कहा कि 2004 में जब उनकी उम्र 26 वर्ष थी तब वह सांसद बने। राजनीति में जो आजकल का दौर चल रहा है वहां सभी भाषण देने वाले हैं, सुनने वाले नहीं। पहले आपसी संवाद होते थे, जो आज कहीं नहीं होते। आज कई लोग कहते हैं यह नेता अच्छा है और यह अच्छा नहीं है, लेकिन यह नेता हमारे ही गली मोहल्लों से आते हैं और इन्हें हम ही चुनते हैं।
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आज की जो राजनीति है, वह टकराव की है। राजनीति में नेता अपने दुखों से दुखी नहीं हैं, वह दूसरे नेता के सुखों से दुखी हैं। आज के परिप्रेक्ष्य में यदि देखा जाए तो राजनीति में लोग व्यक्ति का विरोध करते हैं। व्यक्ति को बुरा भला कहने लगते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि व्यक्ति के परिवार को नहीं उसके काम को बुरा भला कहना चाहिए।
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