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पिरूल के तिनकों से मंजू ने बुनी स्वरोजगार की नीड़, बना रही हैं आभूषण और अन्य सजावटी सामान

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 28 Sep 2020 12:39 AM IST
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Manju has made self-employed needles, making jewelery and other decorative items from Pirul straws.
पिरूल के तिनकों से बने उत्पादों के साथ मंजू।
हल्द्वानी। अगर आप पहाड़ वासी हैं या कभी पहाड़ों की ओर गए हैं तो पिरूल से भलीभांति परिचित होंगे। आमतौर पर लोग पिरूल को जंगलों में लगने वाली आग का सबब मानते हैं लेकिन द्वाराहाट की मंजू आर साह ने चीड़ के इन सुईनुमा पत्तों के तिनके-तिनके जोड़कर स्वरोजगार की नीड़ (आशियाना) बना दी।
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द्वाराहाट के हाट गांव निवासी मंजू चीड़ के पत्तों (पिरूल) से आभूषण और अन्य सजावटी सामान बना रही हैं। मंजू बताती हैं कि उनकी मौसेरी बहन पूजा बिष्ट राणा ने पिरूल से साज-सज्जा के सामान बनाने का प्रशिक्षण लिया था। बहन से ही उन्होंने ये हुनर सीखा और आज वह इसमें पारंगत हैं।
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राजकीय इंटर कॉलेज ताड़ीखेत में प्रयोगशाला सहायक पद पर तैनात मंजू को इसी हुनर के कारण 2019 में कोलकाता में आयोजित इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में बेस्ट अपकमिंग आर्टिस्ट के खिताब से नवाजा जा चुका है। उनका कहना कि कोरोना काल में कई प्रवासी बेरोजगार हो गए हैं। ऐसे में वह पिरूल को अपनी आमदनी का जरिया बना सकते हैं। उन्होेंने अपनी सफलता का श्रेय गौरी शंकर कांडपाल और इंदू भंडारी सिन्हा को दिया।
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शौक को आमदनी का बनाया जरिया
मंजू अपने स्कूल की छात्राओं, शिक्षिकाओं और कई महिलाओं को भी पिरूल से उत्पाद निर्माण का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। वह कहती हैं कि पिरूल को हस्तशिल्प से जोड़कर पहाड़ की महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं। वह इन उत्पादों से हर माह पांच से छह हजार कमा रही हैं। उनका कहना है कि पिरूल को पहाड़ के लिए घातक समझा जाता था लेकिन अब प्रवासी इसे आय का स्रोत बना सकते हैं। उनके पास पूरे कुमाऊं से ऑर्डर आ रहे हैं।
ये उत्पाद बना रहीं मंजू
मंजू पिरूल से पेन स्टैंड, डोरमैट, टी कोस्टर, डाइनिंग मैट, ईयर रिंग, फूलदान, मोबाइल चार्जिंग पॉकेट, पर्स, हैट, पेंडेंट, अंगूठी, टोकरी, पूजा थाल, फूलदान, आसन सहित तमाम तरीके के साज-सज्जा के उत्पाद बना रही हैं।

प्रवासियों के लिए बढ़ाया मदद का हाथ
कोरोना काल में नौकरी छोड़कर लौटे प्रवासियों के लिए मंजू डूबते हुए के लिए तिनके का सहारा बनी हैं। ये तिनका उन्हें गरीबी के दलदल में जहां डूबने से बचाएगा, वहीं पटरी से उतरी उनकी आर्थिकी को भी संबल देगा। हस्तशिल्प में महारथ रखने वाली मंजू ऑनलाइन माध्यम से कई प्रवासियों को प्रशिक्षण दे रही हैं। इस काम में उनके पति मनीष उनका भरपूर सहयोग कर रहे हैं। जल्द ही वह एक कंपनी शुरू कर इसे और आगे ले जाएंगी।
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