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सड़क-सेहत सुविधा के अभाव ने ली गर्भ में पल रहे बच्चे की जान

Sat, 15 Jul 2017 01:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो भीमताल (नैनीताल)।
अमर उजाला ब्यूरो भीमताल (नैनीताल)। Updated Sat, 15 Jul 2017 01:54 AM IST
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Lack of road-health facility has taken birth in childbirth
सड़क-से‌हत सु‌विधा के अभाव ने ली गर्भ में पल रहे बच्चे की जान - फोटो : अमर उजाला

स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में फिर गर्भ में पल रहे एक नवजात की जान चली गई। ब्लॉक के मलुवाताल ग्रामसभा के तोक तल्ली कनाली निवासी प्रसव पीड़िता को परिजन और ग्रामीण चारपाई पर लिटाकर उफना रही कलसा नदी को पार कराते हुए छह किलोमीटर खड़ी चढ़ाई पैदल चलने के बाद हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचे। लेकिन उनकी सारी मेहनत शासन-प्रशासन की लचर व्यवस्थाओं के आगे बेकार हो गई। 

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मलुवाताल ग्रामसभा के तोक तल्ली कनाली निवासी किसान कुंवर सिंह गंगोला की पत्नी उमा गंगोला को शुक्रवार तड़के प्रसव पीड़ा उठी। इस तोक से बूढ़ाधूरा तक का सफर पैदल तय करने के साथ ही उफान पर बह रही कलसा नदी को भी पार करना होता है।
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संसाधनों के अभाव में परिजनों ने प्रसव पीड़िता को चारपाई पर लिटाकर सुबह पांच बजे तोक से जंगलिया गांव तक का छह किलोमीटर का सफर करीब तीन घंटे में तय किया। जंगलिया गांव पहुंचकर गर्भवती को वाहन से भीमताल सीएचसी लाया गया। डॉक्टरों ने उसे सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी के लिए रेफर कर दिया। एसटीएच पहुंचने पर प्रसव पीड़िता ने मृत पुत्र को जन्म दिया। 
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बरसात में मलुवाताल वालों का कट जाता है देश से संपर्क

मलुवाताल ग्रामसभा में कलसा नदी के दूसरी ओर लगभग 35 परिवार रहते हैं जो बरसात में कलसा का बहाव तेज होने के कारण देश दुनिया से कट जाते हैं। कई बार की मांग के बावजूद सरकार आज तक कलसा नदी पर पुल का निर्माण नहीं करा सकी है। नदी में तेज बहाव के कारण कई बार नदी से दूसरी ओर रहने वाले शिक्षक भी तोक कनाली स्थित अपने स्कूलों तक नहीं पहुंच पाते हैं। 
 
विस्थापन बना गांव के विकास में रोड़ा : गंगोला

मलुवाताल के पूर्व प्रधान लक्ष्मण सिंह गंगोला बताते हैं कि बूढ़ाधूरा से मलुवाताल और उसके तोकों को जोड़ने के लिए 2013 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सर्वे के बाद डीपीआर भी तैयार हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि पूर्व में मलुवाताल में भूस्खलन होता रहा है जिस कारण सरकार ने ग्रामीणों के विस्थापन की योजना बनाई।


विस्थापन तो आज तक नहीं हुआ उल्टा विस्थापन के चक्कर में गांव का विकास रुक गया। गंगोला बताते हैं कि जब भी वह विभागीय अधिकारियों से गांव में सड़क और पुल की मांग करते हैं तो अधिकारियों का एक ही जवाब होता है कि गांव में रह रहे लोगों का विस्थापन होना है तो फिर सड़क और पुल किसके लिए बनाएं।

जबकि विस्थापन की रूपरेखा कई साल पहले बनी थी जिसे आज तक धरातल पर नहीं उतारा गया।

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