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संघर्ष की कहानी: खो-खो खिलाड़ी ने खोले जिंदगी के राज, कहा- पापा भी मैच देखने नहीं आते थे, अब पूरी दुनिया...!

Wed, 29 Jan 2025 01:59 PM IST
हीरा मेहरा राघव तिवारी, अमर उजाला
राघव तिवारी, अमर उजाला Published by: हीरा मेहरा Updated Wed, 29 Jan 2025 01:59 PM IST
सार

गौलापार स्टेडियम में राष्ट्रीय खेलों के तहत मंगलवार से खो-खो प्रतियोगिता का शुभारंभ हुआ। पहले दिन आठ इवेंट हुए। दूसरा और तीसरा मुकाबला महाराष्ट्र और उत्तराखंड के बीच खेला गया। दोनों मुकाबले महाराष्ट्र ने जीते। 

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Kho-Kho player Suyash Vishwas Garkate said that earlier even father did not come to watch Kho-Kho
सुयश विश्वास गरकटे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कहते हैं न संघर्ष में आदमी अकेला होता है। सफलता में पूरी दुनिया उसके साथ होती है। महाराष्ट्र के खो-खो खिलाड़ियों के साथ भी यह दृश्य प्रासंगिक लगता है। खाली मैदान में खेलते इन खिलाड़ियों को देखने कोई नहीं आता था लेकिन राष्ट्रीय खेलों के बाद जब इन खिलाड़ियों ने खो-खो विश्व कप में भारतीय टीम को विश्व विजेता बनाया तो पूरी दुनिया की निगाहें इन पर थीं। अब यही खिलाड़ी हल्द्वानी में चल रहे राष्ट्रीय खेलों में महाराष्ट्र टीम से खेल रहे हैं।

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गौलापार स्टेडियम में राष्ट्रीय खेलों के तहत मंगलवार से खो-खो प्रतियोगिता का शुभारंभ हुआ। पहले दिन आठ इवेंट हुए। दूसरा और तीसरा मुकाबला महाराष्ट्र और उत्तराखंड के बीच खेला गया। दोनों मुकाबले महाराष्ट्र ने जीते। महाराष्ट्र टीम में सुयश विश्वास गरकटे, रामजी कश्यप और आदित्य गनपुले ने भी भाग लिया। ये खिलाड़ी खो-खो विश्वकप विजेता भारतीय टीम के भी सदस्य थे। 26 वर्षीय सुयश विश्वास गरकटे ने बताया कि पहले वह लंगड़ी खेलते थे। साल 2011 से खो-खो खेलना शुरू किया था। तब वह कक्षा 8 में पढ़ते थे, उस समय पापा और घर वाले खो-खो खेलने से मना करते थे। पढ़ाई पर ध्यान देने को कहते थे। खो-खो में कोई कॅरिअर नहीं बताते थे, लेकिन सुयश ने घर वालों की बात को अनसुना कर खो-खो पर ध्यान दिया।

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लोकल स्तर पर कई खो-खो आयोजन में सुयश ने भाग लिया लेकिन कोई अपना देखने नहीं आता था। पिछले महीने खो-खो विश्व कप में सुयश भारतीय टीम में शामिल थे। उनके फाइनल मुकाबले को घर तो क्या पूरे विश्व ने देखा। जीतने के बाद पापा सुयश के जिद पर फर्क करने लगे। इससे पहले भी सुयश गोवा और गुजरात में राष्ट्रीय खेलों में भी स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। वर्तमान में सुयश इनकम ट्रैक्स में ग्रुप सी में कार्यरत हैं। अब वह स्पोटर्स एक्जिक्यूटिव ऑफिसर के पद पर ज्वाइन करने वाले हैं। सुयश को महाराष्ट्र सरकार का सर्वोच्च पुरस्कार शिवछत्रपति अवॉर्ड मिल चुका है।

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टीचर ने दौड़ते देखा तो खो-खो का दिया ऑफर
महाराष्ट्र के सोलापुर के रामपुर जी कश्यप राष्ट्रीय खेल में भाग ले रहे हैं। इन्होंने 12 साल की उम्र से खो-खो खेलना शुरू कर दिया था। पहले रामजी दौड़ लगाते थे। एक बार उनके टीचर ने उन्हें दौड़ते हुए देख लिया। खो-खो में फुर्ती की काफी आवश्यकता होती है। इस वजह से टीचर ने उन्हें अपने स्कूल की खो-खो टीम में शामिल होने को कहा। सप्ताह में एक दिन खेल होता था। टीचर की उस नजर ने आज रामजी की जिदंगी बना दी। गत महीने टीवी पर पूरी दुनिया ने रामजी की फुर्ती देखी।

ओडिशा टीम में भी हैं विश्व विजेता
राष्ट्रीय खेलों में ओडिशा की टीम भी प्रतिभाग कर रही है। इसमें प्रबानी साबर, मगई माझी और सुभाष्री सिंह हैं। ये खिलाड़ी हाल ही में दिल्ली में हुए विश्वकप विजेता भारतीय टीम के सदस्य रहे हैं। सोमवार को स्टेडियम पहुंचकर इन्होंने अभ्यास शुरू कर दिया है।

 

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