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Nainital News: कोई है बाहर, मुझे बचा लो.. और फिर खामोश हो गई आवाज

Sun, 07 Jun 2026 12:58 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल Updated Sun, 07 Jun 2026 12:58 AM IST
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"Is there anyone out there? Save me..." and then the voice fell silent.
हल्द्वानी। ‘कोई है बाहर.... मुझे बचा लो....कोई है बाहर...बचाओ...बचाओ...’ अमेज़न के वेयरहाउस में धधकती आग के बीच जिंदगी की जंग लड़ रहे अमित कुमार (26) और नरेंद्र प्रसाद (36) की जुबान से निकले ये आखिरी शब्द थे। लगभग 20 मिनट तक वेयरहाउस के भीतर से मदद के लिए यह चीखें आती रहीं और फिर अचानक सब कुछ खामोश हो गया। दमकल कर्मियों ने जब भारी-भरकम शटर को काटकर रास्ता बनाया और भीतर दाखिल हुए तो वहां सिर्फ सन्नाटा पसरा था। धुएं ने दीवारों को स्याह कर दिया था। इसी मलबे और राख के बीच दोनों युवकों के बेजान शरीर बरामद हुए।
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शॉर्ट सर्किट से हुआ यह दर्दनाक हादसा शुक्रवार रात करीब साढ़े 11 बजे रामपुर रोड स्थित अमेज़न के गोदाम में हुआ। घटना की शुरुआत तब हुई जब बाइक सवार एक युवक ब्लिंकिट से डिलीवरी लेकर निकल रहा था। उसने गोदाम के शटर के नीचे से धुआं निकलते देखा लेकिन इसे सामान्य समझकर वह आगे बढ़ गया। रास्ते में उसने एक स्कूटी सवार को इसकी जानकारी दी। स्कूटी सवार ने स्थिति की गंभीरता को भांपा और तुरंत ब्लिंकिट के अन्य कर्मियों को सूचित किया। देखते ही देखते अगले 30 मिनट में धुएं ने विकराल आग का रूप ले लिया। स्थानीय लोगों और कर्मियों ने जलते हुए तपने लगे शटर को खोलने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे। अंदर फंसे लोग दम घुटने से चीखते रहे और कुछ देर बाद इंसानी आवाजें हमेशा के लिए शांत हो गईं। इसके बाद आग की भयावह लपटें रह गईं जिस पर काफी मशक्कत के बाद दमकल विभाग ने काबू पाया।
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इस बड़े हादसे के पीछे गोदाम की बनावट और सुरक्षा मानकों की कमी एक बड़ी वजह बनकर सामने आई है। गोदाम में लगभग 20 फीट ऊंचे तीन भारी-भरकम शटर थे जिनमें से दो की लंबाई 10 से 12 फीट और छोटे शटर की लंबाई 8 फीट थी। ये सभी मैनुअल रोलिंग शटर थे जिन्हें अंदर से खोलना मुश्किल था।
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एसी में सोने के कारण नहीं पता चला

पुलिस तफ्तीश के मुताबिक, हादसे के वक्त नरेंद्र और अमित गोदाम के भीतर बने एक एयर-कंडीशनर (एसी) रूम में सो रहे थे। कमरा पूरी तरह से पैक था और एसी चल रहा था। इस कारण शुरुआत में उन्हें बाहर फैल रहे धुएं और आग का बिल्कुल भी अहसास नहीं हुआ। जब तक धुआं कमरे के भीतर पहुंचा और उनकी नींद खुली, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। वे कमरे से बाहर निकलकर मुख्य शटर तक तो पहुंचे और बचने का हरसंभव प्रयास भी किया लेकिन बाहर नहीं आ सके।




नरेन्द्र और अमित की मौत के जिम्मेदार

- फायर अलार्म, अग्निशामक यंत्र (सिलिंडर) जैसे बेसिक इंतजाम तक नहीं।

-भारी भूभाग में बंद वेयर हाउस में तीन शटर के अलावा एक भी निकास द्वार का न होना।

- टिन शेड के वेयर हाउस में वेंटिलेशन और एग्जॉस्ट फैन न लगा होना।

- टिनशेड को गर्मी व बरसात से बचाने के लिए फोमिंग कर पूरी तरह पैक करना।



घटना की सूचना मिलते ही पुलिस व फायर टीम ने आग पर 30 मिनट के अंदर काबू पा लिया। अंदर दो शव मिले। आग लगने के सटीक कारणों की जांच की जा रही है। प्रथमदृष्टया शार्ट सर्किट की बात सामने आई है। यदि तहरीर मिलती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे।

डॉ. मंजुनाथ टीसी, एसएसपी
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