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सचिव परिवहन निगम को समस्त रिकॉर्ड के 26 को पेश होने के निर्देश
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नैनीताल। उत्तराखंड परिवहन निगम के कर्मचारियों को तीन माह से वेतन न देने पर हाईकोर्ट ने परिवहन सचिव को समस्त रिकॉर्ड के साथ 26 सितंबर को कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने सरकार के स्तर पर लंबित भुगतान की जानकारी भी मांगी है ताकि निगमकर्मियों का वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जा सके। सरकार कोर्ट में पूरा ब्योरा नहीं दे सकी। अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जून में निगम को 7 करोड़ रुपये दिए गए हैं। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
रोडवेज कर्मचारी संघ ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि मांगों को लेकर जब वे आंदोलन करते है तो सरकार उन पर एस्मा लगाने की चेतावनी देती है। यूनियन का कहना था कि आपदा के दौरान, सीनियर सिटिजन और रक्षाबंधन पर महिलाओं को मुफ्त यात्रा तथा दिव्यांगों को बस भाड़े में छूट दी जा रही है लेकिन सरकार निगम को भुगतान नहीं कर रही है। याचिका में यह भी कहा गया कि सरकार निगम में कार्यरत संविदा और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित नहीं कर रही है और ना ही उन्हें समय पर वेतन दिया जा रहा है।
सेवानिवृत्त कर्मचारी देयकों के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। रोडवेज कर्मचारी फिर आंदोलन को मजबूर हो रहे हैं। याचिका में कहा गया कि प्रदेश सरकार को निगम को 45 करोड़ रुपये देने हैं। वहीं, उप्र परिवहन निगम से भी 800 करोड़ रुपये अब तक उत्तराखंड परिवहन निगम को नहीं मिले हैं। कहा गया कि इस राशि के मिलने के बाद निगम की सारी समस्याओं का समाधान हो सकता है। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सचिव (परिवहन निगम) को समस्त रिकॉर्ड के साथ कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं।
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रोडवेज कर्मचारी संघ ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि मांगों को लेकर जब वे आंदोलन करते है तो सरकार उन पर एस्मा लगाने की चेतावनी देती है। यूनियन का कहना था कि आपदा के दौरान, सीनियर सिटिजन और रक्षाबंधन पर महिलाओं को मुफ्त यात्रा तथा दिव्यांगों को बस भाड़े में छूट दी जा रही है लेकिन सरकार निगम को भुगतान नहीं कर रही है। याचिका में यह भी कहा गया कि सरकार निगम में कार्यरत संविदा और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित नहीं कर रही है और ना ही उन्हें समय पर वेतन दिया जा रहा है।
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सेवानिवृत्त कर्मचारी देयकों के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। रोडवेज कर्मचारी फिर आंदोलन को मजबूर हो रहे हैं। याचिका में कहा गया कि प्रदेश सरकार को निगम को 45 करोड़ रुपये देने हैं। वहीं, उप्र परिवहन निगम से भी 800 करोड़ रुपये अब तक उत्तराखंड परिवहन निगम को नहीं मिले हैं। कहा गया कि इस राशि के मिलने के बाद निगम की सारी समस्याओं का समाधान हो सकता है। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सचिव (परिवहन निगम) को समस्त रिकॉर्ड के साथ कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं।
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